तेंदुए की खाल मामले में NGO CEO जांच के घेरे में, आरोपियों से पूछताछ में सामने आया नाम;17 अगस्त को शिवपुरी में होगी पूछताछ

Nikk Pandit
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खबर:शिवपुरी तेंदुए की खाल और सिर की बरामदगी से जुड़े वन्यजीव तस्करी मामले की जांच अब दिल्ली स्थित वन्यजीव संरक्षण एनजीओ ‘वन्यजीव बचाओ’ तक पहुंच गई है। मामले में गिरफ्तार भगवान सिंह उर्फ सलीम और उसके सहयोगी वसीम से पूछताछ के दौरान एनजीओ के CEO एवं सह-संस्थापक कार्तिक सत्यनारायण का नाम सामने आने के बाद मध्य प्रदेश राज्य बाघ प्रहार बल (STSF) ने उन्हें नोटिस जारी किया है। कार्तिक सत्यनारायण को 17 अगस्त को शिवपुरी में जांच अधिकारी के सामने उपस्थित होकर पूछताछ में शामिल होने के लिए कहा गया है।

हालांकि, जांच एजेंसी की ओर से अभी कार्तिक सत्यनारायण को मामले में आरोपी नहीं बताया गया है। उनकी भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष भी सामने नहीं आया है। एसटीएसएफ का कहना है कि आरोपियों के बयानों और जांच में मिले अन्य सुरागों के आधार पर उनसे पूछताछ की जा रही है। पूछताछ और सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय होगी।

आगरा से शुरू हुई जांच, श्योपुर तक पहुंचा मामला

वन्यजीव तस्करी से जुड़ा यह मामला तेंदुए की खाल और सिर की बरामदगी के बाद सामने आया था। कुछ समय पहले आगरा में तेंदुए की खाल और सिर के साथ आरोपियों को पकड़ा गया था। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और श्योपुर में भी इस नेटवर्क से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी हुई।

इसी जांच के दौरान भगवान सिंह उर्फ सलीम और उसके सहयोगी वसीम को गिरफ्तार किया गया। दोनों से पूछताछ में कथित तौर पर दिल्ली के एनजीओ ‘वन्यजीव बचाओ’ के CEO कार्तिक सत्यनारायण का नाम सामने आया। आरोपियों के बयानों को जांच एजेंसी अब अन्य उपलब्ध साक्ष्यों और डिजिटल जानकारी से मिलाकर देख रही है।

आरोपियों ने निर्देश पर काम करने का किया दावा

जांच अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ के दौरान भगवान सिंह उर्फ सलीम और वसीम ने दावा किया कि वे कार्तिक सत्यनारायण के निर्देश पर काम कर रहे थे। हालांकि, यह आरोप फिलहाल जांच का विषय है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

एसटीएसएफ द्वारा मामले में आरोपियों के बयानों के साथ-साथ डिजिटल साक्ष्यों और अन्य सुरागों की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गिरफ्तार आरोपियों और कार्तिक सत्यनारायण के बीच किस प्रकार का संपर्क था, उनके बीच कितनी बातचीत हुई और कथित तौर पर उनके बीच किस स्तर पर समन्वय था।

शिकार से लेकर तस्करी तक की पूरी श्रृंखला की जांच

जांच का दायरा केवल तेंदुए की खाल और सिर की बरामदगी तक सीमित नहीं है। एजेंसी तेंदुओं के कथित शिकार, खाल प्राप्त करने, उसके परिवहन और वन्यजीव तस्करी से जुड़े पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है।

जांच एजेंसी इस पहलू को भी जांच रही है कि कहीं वन्यजीवों के कथित शिकार और बाद में जब्ती की कार्रवाई के जरिए एंटी-पोचिंग यानी शिकार-रोधी कार्रवाई की छवि बनाने का कोई प्रयास तो नहीं किया गया। इसके साथ ही संभावित आर्थिक लाभ और वन्यजीव तस्करी के नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।

अधिकारियों के मुताबिक, इन सभी बिंदुओं पर उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है। किसी भी व्यक्ति की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो से भी समन्वय

मध्य प्रदेश की मुख्य वन्यजीव संरक्षक समीता राजौरा के अनुसार, भगवान सिंह उर्फ सलीम और वसीम द्वारा कार्तिक सत्यनारायण का नाम लिए जाने के बाद उन्हें जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया गया है।

मामले की जांच में वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) से भी सहयोग और समन्वय लिया जा रहा है। एजेंसियां वन्यजीव तस्करी के संभावित नेटवर्क और उससे जुड़े संपर्कों की जानकारी जुटाने में लगी हैं।

वन्यजीव संरक्षण के लिए काम करता है NGO

दिल्ली स्थित ‘वन्यजीव बचाओ’ एनजीओ वन्यजीव संरक्षण, वन्यजीव बचाव और अवैध वन्यजीव व्यापार के खिलाफ काम करने का दावा करता है। एनजीओ के अनुसार, उसकी एंटी-पोचिंग टीम वन्यजीव अपराधों से जुड़ी सूचनाएं एकत्र कर पुलिस, वन विभाग और संबंधित जांच एजेंसियों के साथ साझा करती है।

एनजीओ की वेबसाइट पर कार्तिक सत्यनारायण को CEO और सह-संस्थापक के रूप में बताया गया है। अब इसी संगठन से जुड़े व्यक्ति का नाम तेंदुए की खाल और सिर की बरामदगी से जुड़े मामले की पूछताछ में सामने आने के बाद जांच एजेंसियों की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर है।

पूछताछ के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई

एसटीएसएफ शिवपुरी के प्रभारी राजू सिंह राजपूत ने बताया कि तेंदुओं के शिकार से जुड़े मामले में गिरफ्तार भगवान सिंह उर्फ सलीम और वसीम ने कार्तिक सत्यनारायण का नाम लिया है। जांच के दौरान कुछ अन्य सुराग भी सामने आए हैं। इन्हीं तथ्यों के आधार पर कार्तिक सत्यनारायण को नोटिस जारी कर 17 अगस्त को शिवपुरी में पूछताछ के लिए बुलाया गया है।

अधिकारी के अनुसार, पूछताछ के दौरान सामने आने वाली जानकारी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी 17 अगस्त को होने वाली पूछताछ को माना जा रहा है। जांच एजेंसी यह स्पष्ट करने का प्रयास करेगी कि आरोपियों और एनजीओ CEO के बीच वास्तव में किस प्रकार का संपर्क था और तेंदुए के कथित शिकार एवं वन्यजीव तस्करी से जुड़े घटनाक्रम में उनकी कोई भूमिका थी या नहीं। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, कार्तिक सत्यनारायण की भूमिका को लेकर किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

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