शिवपुरी में साइबर ठगी का नया खेल:बिना OTP, बिना लिंक और सिर्फ एक कॉल में खातों से उड़ाए लाखों रुपए, तीन मामलों ने बढ़ाई चिंता

Nikk Pandit
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बंटी शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी जिले में साइबर अपराधी लगातार ठगी के नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। अब ठग केवल फर्जी लिंक भेजकर या ओटीपी पूछकर ही नहीं, बल्कि बिना किसी बैंकिंग जानकारी लिए और बिना किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक कराए भी लोगों के खातों से लाखों रुपए पार कर रहे हैं।

शिवपुरी में सामने आए तीन अलग-अलग मामलों ने साइबर सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन तीनों मामलों में करीब 5 लाख रुपए की साइबर ठगी हुई है। कहीं महज पांच मिनट में खाते से लगभग तीन लाख रुपए निकाल लिए गए, कहीं केवल एक फोन कॉल रिसीव करने के बाद एक लाख रुपए से अधिक की रकम गायब हो गई, तो एक अन्य मामले में मोबाइल अपने-आप अपडेट होने के बाद खाते से 99 हजार रुपए निकाल लिए गए।

सबसे ताजा मामला शहर के नामोनगर का है। यहां रहने वाले रेत-सीमेंट कारोबारी अरविंद धाकड़ ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि उन्हें एक ठेकेदार को ऑनलाइन 25 हजार रुपए का भुगतान करना था। जब उन्होंने मोबाइल में बैंकिंग एप खोला तो खाते का बैलेंस देखकर उनके होश उड़ गए। उनके खाते से पहले ही 2 लाख 94 हजार रुपए निकाले जा चुके थे और खाते में केवल 15 रुपए शेष बचे थे।

बैंक स्टेटमेंट निकलवाने पर पता चला कि महज पांच मिनट के भीतर चार अलग-अलग ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिए पूरी रकम किसी अज्ञात खाते में ट्रांसफर कर दी गई। सबसे हैरानी की बात यह रही कि पीड़ित ने न तो किसी को ओटीपी बताया, न किसी लिंक पर क्लिक किया और न ही कोई नया एप डाउनलोड किया था। मामले की शिकायत मिलते ही पुलिस ने जांच साइबर सेल को सौंप दी है और ट्रांजेक्शन की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है।

दूसरा मामला कोतवाली थाना क्षेत्र के अग्रवाल धर्मशाला रोड का है। यहां हार्डवेयर व्यवसायी विकास गोयल (34) को साइबर ठगों ने केवल एक फोन कॉल के जरिए निशाना बना लिया। विकास ने पुलिस को बताया कि 25 मई की सुबह वह अपनी दुकान पर बैठे थे। इसी दौरान एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। उन्होंने सामान्य रूप से कॉल रिसीव किया, लेकिन कुछ ही देर बाद उनके मोबाइल पर बैंक खाते से पैसे निकलने के संदेश आने लगे।

ठगों ने बैंक ऑफ इंडिया के खाते से चार अलग-अलग ट्रांजेक्शन में 1,01,660.95 रुपए निकाल लिए। इनमें 49,999.97 रुपए, 39,999.99 रुपए, 5 हजार रुपए और 6,660.99 रुपए की राशि शामिल है। पीड़ित का कहना है कि उन्होंने किसी भी व्यक्ति को बैंक की जानकारी, ओटीपी या पासवर्ड साझा नहीं किया था। इस मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

तीसरा मामला भौंती थाना क्षेत्र का है। यहां रहने वाले शिवम गुप्ता ने बताया कि 26 जुलाई को उनका मोबाइल अचानक बंद हो गया। जब उन्होंने मोबाइल दोबारा चालू किया तो करीब 39 मिनट तक फोन "अपडेटिंग" मोड में रहा। अपडेट पूरा होने के बाद मोबाइल का पूरा डेटा अपने-आप डिलीट हो गया। अगले दिन जब उन्होंने अपने बैंक खातों की जांच की तो पता चला कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के खाते से 97 हजार रुपए और कोटक महिंद्रा बैंक के खाते से 2 हजार रुपए अज्ञात यूपीआई आईडी पर ट्रांसफर किए जा चुके थे। उन्होंने किसी प्रकार का ऑनलाइन भुगतान नहीं किया था और न ही किसी को बैंक संबंधी जानकारी दी थी। इस मामले में भी पुलिस ने अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

इन तीनों मामलों में ठगी का तरीका अलग-अलग रहा, लेकिन नतीजा एक ही निकला—कुछ ही मिनटों में बैंक खातों से लाखों रुपए साफ हो गए। पुलिस अब बैंक ट्रांजेक्शन, यूपीआई आईडी, मोबाइल कॉल डिटेल और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। वहीं साइबर सेल ने नागरिकों से अपील की है कि यदि मोबाइल में कोई असामान्य गतिविधि दिखाई दे, अनजान नंबर से संदिग्ध कॉल आए या बैंक खाते से बिना जानकारी के लेन-देन हो, तो तुरंत संबंधित बैंक को सूचित करें और 1930 साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराएं।

समय रहते शिकायत करने से साइबर ठगी की राशि वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटल लेन-देन के दौर में हर व्यक्ति को पहले से कहीं अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।
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