शिवपुरी में राशन दुकान का बड़ा खेल:पोर्टल पर 118 क्विंटल स्टॉक:मौके पर मिला सिर्फ 3 क्विंटल अनाज

Nikk Pandit
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खुशबू शर्मा:खबर शिवपुरी जिले में गरीब और जरूरतमंद परिवारों के हक का राशन किस तरह कागजों में भरा-पूरा और जमीन पर गायब हो सकता है, इसका एक मामला कोलारस के विनेका गांव में सामने आया है। यहां संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकान की जांच में सरकारी पोर्टल पर 118.80 क्विंटल खाद्यान्न का स्टॉक दर्ज मिला, लेकिन जब जांच टीम मौके पर पहुंची तो दुकान बंद मिली और उपलब्ध खाद्यान्न करीब 3 क्विंटल ही पाया गया।

सरकारी रिकॉर्ड में गेहूं और चावल का बड़ा स्टॉक मौजूद था, लेकिन मौके पर उसका नामोनिशान नहीं मिला। इस भारी अंतर ने राशन वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी जगदीप सिंह लोधी की शिकायत पर इंदार पुलिस ने राशन दुकान से जुड़े तीन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पोर्टल पर भरा पड़ा था राशन, दुकान में पसरा था सन्नाटा
जांच में सामने आया कि सरकारी पोर्टल पर विनेका की राशन दुकान के नाम से 95.24 क्विंटल गेहूं और 23.56 क्विंटल चावल का स्टॉक दर्ज था। यानी रिकॉर्ड के हिसाब से दुकान में 118 क्विंटल से ज्यादा खाद्यान्न मौजूद होना चाहिए था।

लेकिन जब तहसीलदार के नेतृत्व में जांच की गई तो दुकान बंद मिली। मौके पर उपलब्ध खाद्यान्न की मात्रा करीब 3 क्विंटल बताई गई। ऐसे में सरकारी रिकॉर्ड और भौतिक स्टॉक के बीच इतना बड़ा अंतर देखकर जांच टीम के सामने सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हुआ कि आखिर बाकी खाद्यान्न गया कहां?

7 सितंबर को भी बंद मिली थी दुकान

जांच के दौरान पंचों के समक्ष दुकान की स्थिति दर्ज की गई। पंचों के अनुसार 7 सितंबर को भी दुकान बंद थी। यानी जिस दुकान से गरीब हितग्राहियों को नियमित रूप से राशन मिलना चाहिए था, वहां वितरण व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए।

जांच में दुकान का वितरण प्रतिशत भी केवल 44.90 प्रतिशत पाया गया। इसका मतलब यह है कि पात्र हितग्राहियों को मिलने वाले राशन के वितरण की स्थिति भी सामान्य नहीं थी।

अब जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि पोर्टल पर दर्ज खाद्यान्न में से कितना वास्तव में हितग्राहियों को बांटा गया और कितना स्टॉक रिकॉर्ड में दर्ज होने के बावजूद दुकान से गायब हो गया।

3.44 लाख रुपए के खाद्यान्न की गड़बड़ी का आरोप
विभागीय जांच रिपोर्ट के अनुसार पोर्टल पर पर्याप्त मात्रा में स्टॉक दर्ज होने के बावजूद हितग्राहियों को राशन वितरित नहीं किया गया और खाद्यान्न के खुर्द-बुर्द किए जाने का आरोप है।

विभाग ने गड़बड़ी वाले खाद्यान्न की अनुमानित कीमत 3 लाख 44 हजार 575 रुपए बताई है। रकम भले ही कागज पर दिखाई देने वाली एक संख्या हो, लेकिन जिस राशन की बात है वह उन परिवारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जो सरकारी योजना के तहत मिलने वाले अनाज पर निर्भर रहते हैं।

इसलिए मामले को केवल स्टॉक में अंतर मानकर छोड़ देना पर्याप्त नहीं होगा। यह भी जांच जरूरी है कि रिकॉर्ड में दर्ज राशन की वास्तविक स्थिति क्या थी और उसके वितरण से संबंधित दस्तावेज कितने सही हैं।

संचालक समेत तीन लोगों पर FIR

मामले में कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी जगदीप सिंह लोधी की शिकायत के आधार पर इंदार पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

FIR में महिला बहुउद्देशीय सहकारी संस्था रन्नौद के प्रबंधक वीरेंद्र भादौरिया, विक्रेता सचिन राठौर और सह-विक्रेता भाई मिय्या खां को आरोपी बनाया गया है।
पुलिस ने इनके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के तहत मामला दर्ज किया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

अब स्टॉक रजिस्टर और वितरण रिकॉर्ड की होगी पड़ताल

इस मामले में आगे की जांच के दौरान राशन दुकान के स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर, पोर्टल पर दर्ज आंकड़े, हितग्राहियों को जारी किए गए राशन और उपलब्ध खाद्यान्न का मिलान महत्वपूर्ण होगा।

यदि रिकॉर्ड और वास्तविक वितरण में अंतर पाया जाता है तो यह भी सामने आ सकता है कि गड़बड़ी किस स्तर पर हुई। पुलिस और खाद्य विभाग के सामने यह पता लगाना भी जरूरी है कि पोर्टल पर स्टॉक अपडेट किस आधार पर किया गया और मौके पर खाद्यान्न की वास्तविक मात्रा इतनी कम कैसे रह गई।

गरीबों के राशन में गड़बड़ी पर सख्ती जरूरी

सरकारी राशन व्यवस्था का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों तक खाद्यान्न पहुंचाना है। ऐसे में यदि किसी दुकान के रिकॉर्ड में सैकड़ों बोरी अनाज मौजूद दिखे और मौके पर उसका छोटा हिस्सा ही मिले तो यह व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल है।

118 क्विंटल से ज्यादा का दर्ज स्टॉक और मौके पर
 करीब 3 क्विंटल खाद्यान्न का मिलना अपने आप में जांच का बड़ा आधार है। हालांकि अंतिम रूप से खाद्यान्न की वास्तविक गड़बड़ी और जिम्मेदारी जांच के बाद ही तय होगी।

फिलहाल FIR दर्ज होने के बाद मामला पुलिस की जांच में है। अब निगाह इस बात पर है कि जांच एजेंसी रिकॉर्ड और मौके के स्टॉक के बीच हुए भारी अंतर की पूरी कड़ी जोड़ पाती है या नहीं और यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होती है।

गरीबों के हक का राशन रिकॉर्ड में मौजूद और जमीन पर गायब मिलने का मामला गंभीर है। अब सिर्फ FIR नहीं, बल्कि पूरे स्टॉक और वितरण व्यवस्था की गहराई से जांच जरूरी है, ताकि यह साफ हो सके कि 118 क्विंटल का हिसाब आखिर कागजों में कैसे बचा रहा और मौके पर अनाज इतना कम कैसे रह गया।
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