खुशबू शर्मा:खबर शिवपुरी जिले में मरीज दवा खरीदता है तो उसके भरोसे के साथ खरीदता है कि मेडिकल स्टोर से मिली दवा सुरक्षित होगी और उसकी एक्सपायरी नहीं निकली होगी। लेकिन यदि किसी मेडिकल स्टोर पर एक्सपायरी डेट की दवाएं और मिल्क पाउडर बिक्री के लिए रखे मिलें, तो यह सिर्फ एक दुकान की लापरवाही का मामला नहीं रह जाता, बल्कि सीधे आम लोगों की सेहत और जिंदगी से जुड़ा गंभीर सवाल बन जाता है।
शिवपुरी के कोर्ट रोड स्थित शिव मेडिकल स्टोर पर मंगलवार देर रात स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई ने इसी भरोसे को कटघरे में खड़ा कर दिया। कलेक्टर अर्पित वर्मा के निर्देश पर पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच के दौरान दुकान में एक्सपायरी डेट का मिल्क पाउडर और कुछ दवाएं बिक्री के लिए रखी मिलीं। इसके बाद अधिकारियों ने मेडिकल स्टोर को सील कर दिया !
अब सवाल यह है कि जिस दुकान पर लोगों को स्वास्थ्य से जुड़ी चीजें मिलती हैं, वहां एक्सपायरी सामान बिक्री के लिए पहुंचा कैसे और उसे समय रहते हटाया क्यों नहीं गया देर रात पहुंची टीम, जांच के बाद दुकान पर जड़ा ताला मेडिकल स्टोर की जांच के लिए सीएमएचओ डॉ. संजय ऋषिश्वर के साथ फार्मासिस्ट बालेंदु रघुवंशी और एएसओ आईपी गोयल मौके पर पहुंचे। कार्रवाई के दौरान तहसीलदार सिद्धार्थ भूषण भी मौजूद रहे।
टीम ने मेडिकल स्टोर में रखे सामान की जांच की। जांच के दौरान एक्सपायरी डेट का मिल्क पाउडर और कुछ दवाएं बिक्री के लिए रखे मिलने की बात सामने आई। इसके बाद अधिकारियों ने दुकान को सील कर दिया।
यह कार्रवाई अपने आप में बताती है कि मामला सामान्य स्टॉक जांच से आगे बढ़कर गंभीरता से लिया गया है।
बड़े अधिकारी के यहां एक्सपायरी प्रोटीन पहुंचने की चर्चा
इस पूरे मामले को लेकर शहर में एक और चर्चा ने जोर पकड़ा है। बताया जा रहा है कि किसी बड़े अधिकारी के यहां एक्सपायरी प्रोटीन पहुंचने की शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हुआ। चर्चा यह भी है कि अधिकारी के कर्मचारी को मेडिकल स्टोर से दिया गया प्रोटीन एक्सपायरी डेट का था।
हालांकि इस दावे की स्वास्थ्य विभाग ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, इसलिए इसकी स्वतंत्र जांच जरूरी है। लेकिन यदि शिकायत वास्तव में हुई है तो जांच एजेंसियों को यह पता लगाना चाहिए कि संबंधित प्रोटीन कहां से खरीदा गया, उसका बैच नंबर क्या था, एक्सपायरी कब हुई थी और वह किस स्टॉक से आया था।
मामला सिर्फ दुकान सील करने से खत्म नहीं होना चाहिए
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मेडिकल स्टोर को सील कर देना ही पर्याप्त कार्रवाई है?
यदि जांच में एक्सपायरी दवाएं और मिल्क पाउडर बिक्री के लिए रखे मिलते हैं तो प्रशासन को दुकान के पूरे स्टॉक, खरीद बिल, बिक्री रिकॉर्ड, बैच नंबर, एक्सपायरी रिकॉर्ड और सप्लायर की जानकारी की जांच करनी चाहिए।
यह भी देखा जाना चाहिए कि एक्सपायरी सामान दुकान में कितने समय से रखा था। क्या यह गलती से स्टॉक में रह गया था या इसे जानबूझकर बिक्री के लिए रखा गया था? क्या पहले भी ऐसा सामान ग्राहकों को बेचा गया? यदि हां, तो कितने लोगों तक पहुंचा?
इन सवालों के जवाब सामने आना बेहद जरूरी हैं।
आम जिंदगी के साथ ऐसा खिलवाड़ गंभीर चिंता का विषय
मेडिकल स्टोर कोई सामान्य किराना दुकान नहीं है, जहां एक्सपायरी सामान मिलने पर सिर्फ जुर्माना लगाकर मामला खत्म कर दिया जाए। यहां दवाएं और स्वास्थ्य संबंधी उत्पाद सीधे लोगों के शरीर में जाते हैं।
कोई व्यक्ति बीमारी में दवा लेने पहुंचता है और यदि उसे एक्सपायरी दवा मिल जाए तो उसके भरोसे के साथ गंभीर खिलवाड़ हो सकता है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के मामले में ऐसी लापरवाही को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
इसलिए प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जब तक पूरे मामले की जांच पूरी न हो जाए, तब तक दुकान को खोलने की अनुमति नहीं दी जाए।
प्रशासन करे गहराई से जांच
इस मामले में सिर्फ यह पता लगाना पर्याप्त नहीं होगा कि दुकान में एक्सपायरी सामान मिला या नहीं। जांच का दायरा उससे आगे जाना चाहिए।
प्रशासन को यह भी देखना चाहिए कि मेडिकल स्टोर में नियमित रूप से एक्सपायरी स्टॉक की निगरानी होती थी या नहीं। संबंधित दवाओं और मिल्क पाउडर की खरीद किस कंपनी या डिस्ट्रीब्यूटर से हुई थी। बिल मौजूद हैं या नहीं। कितनी मात्रा में सामान खरीदा गया था और कितनी मात्रा में बिक्री हुई।
यदि जांच में नियमों का उल्लंघन, जानबूझकर एक्सपायरी सामान बेचने या ग्राहकों की सेहत को जोखिम में डालने की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
अब असली परीक्षा प्रशासन की
शिव मेडिकल स्टोर को सील करने की कार्रवाई के बाद लोगों की नजर अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। यदि मामला सिर्फ दुकान सील करने और कुछ दिनों बाद उसे फिर खोल देने तक सीमित रह गया तो कार्रवाई का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।
जरूरत है कि पूरे स्टॉक की जांच हो, संबंधित रिकॉर्ड खंगाले जाएं और यदि कोई गड़बड़ी सामने आती है तो जिम्मेदारी तय की जाए।
स्वास्थ्य से जुड़े कारोबार में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। एक्सपायरी दवा या खाद्य-सप्लीमेंट बिक्री के लिए रखना बेहद गंभीर विषय है। प्रशासन को निष्पक्ष और विस्तृत जांच करनी चाहिए और जांच पूरी होने तक शिव मेडिकल स्टोर को नहीं खोला जाना चाहिए।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित संचालक के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी मेडिकल स्टोर को आम लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने की हिम्मत न हो।