शिवपुरी में 13 भैंस चोरी का बड़ा खुलासा:चोरों को पनाह देने वाले भी पुलिस के शिकंजे में

Nikk Pandit
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खुशबू शर्मा खबर:शिवपुरी जिले के बैराड़ थाना क्षेत्र में सामने आए 13 भैंस चोरी के मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। पुलिस ने चोरी की वारदात में शामिल आरोपियों के साथ-साथ चोरों को कथित रूप से मदद और आश्रय देने वाले आरोपियों की भूमिका भी सामने लाई है। मामले में अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से दो आरोपियों को जेल भेज दिया गया। वहीं प्रकरण में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने जंगल में चरने के लिए छोड़ी गई 13 भैंसों को चोरी किया था। चोरी के बाद आरोपी भैंसों को लेकर जा रहे थे, लेकिन ग्राम बागवानी के पास पुलिस को देखकर घबरा गए और सभी 13 भैंसों को वहीं छोड़कर मौके से फरार हो गए। पुलिस ने भैंसों को बरामद करने के बाद मामले की जांच शुरू की और लगातार सुराग जुटाते हुए आरोपियों तक पहुंच बनाई।

जंगल में चरने गई थीं 13 भैंसें, लौटकर नहीं आईं
मामले की शुरुआत 21 अगस्त 2026 को हुई, जब ग्राम ककरई निवासी राजेन्द्र पुत्र सिपाही यादव, उम्र 38 वर्ष ने बैराड़ थाने में शिकायत दर्ज कराई।

फरियादी ने पुलिस को बताया कि 21 अगस्त की सुबह उसने अपनी 13 भैंसों को जंगल में चरने के लिए छोड़ा था। कुछ समय बाद जब भैंसों की तलाश की गई तो उनका कोई पता नहीं चला। इसके बाद परिवार और गांव के लोगों ने मिलकर आसपास के जंगलों में भैंसों की तलाश शुरू की।

तलाश करते हुए ग्रामीण ग्राम बागवानी थाना गसवानी क्षेत्र तक पहुंचे। इसी दौरान वहां पुलिस को देखकर कुछ लोग भैंसों को छोड़कर भाग गए। मौके से 13 भैंसें बरामद होने के बाद चोरी की आशंका और मजबूत हुई।

फरियादी की रिपोर्ट पर पुलिस ने अज्ञात चोरों के खिलाफ अपराध क्रमांक 327/26, धारा 303(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की।
पुलिस अधीक्षक ने मामले को गंभीरता से लिया
13 भैंसों की एक साथ चोरी के मामले को पुलिस अधीक्षक शिवपुरी श्रीमती यांगचेन डोलकर भूटिया ने गंभीरता से लिया। उन्होंने आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी के निर्देश दिए।

इसके बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आर.डी. प्रजापति और एसडीओपी पोहरी आनंद राय के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी बैराड़ सुरेश शर्मा के नेतृत्व में पुलिस टीम गठित की गई।

टीम ने तकनीकी जानकारी, मुखबिर तंत्र और पूछताछ के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने के प्रयास शुरू किए।

अंके गुर्जर की गिरफ्तारी से खुली पहली कड़ी

पुलिस को जांच के दौरान एक महत्वपूर्ण सुराग मिला, जिसके आधार पर 1 सितंबर 2026 को अंके गुर्जर पुत्र राजू गुर्जर निवासी बुडावली, थाना जौरा को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस पूछताछ में अंके ने कथित तौर पर बताया कि उसे दल्लो गुर्जर ने भैंस चोरी करने के लिए बुलाया था। इसके बाद वह बंटी गुर्जर निवासी बुडावली, हरेन्द्र गुर्जर निवासी पाउटा थाना तिघरा और करण सिंह गुर्जर निवासी गिरगांव जिला ग्वालियर के साथ ग्राम बेहरदा पहुंचा।

पुलिस के अनुसार, वहां दल्लो गुर्जर ने एक व्यक्ति को बुलाया। उस व्यक्ति ने आरोपियों को खाना खिलाया और जंगल में रुकने की व्यवस्था की। इसके बाद कथित रूप से उसी व्यक्ति ने चोरी की गई 13 भैंसें आरोपियों को सौंप दीं।

आरोपी भैंसों को लेकर आगे बढ़े, लेकिन ग्राम बागवानी के पास पुलिस दिखाई देने पर सभी भैंसों को छोड़कर भाग गए।

दल्लो की गिरफ्तारी के बाद सामने आया नया नाम
जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने 3 सितंबर 2026 को दल्लो उर्फ दलवीर पुत्र ईश्वर राम गुर्जर निवासी बुडावली को गिरफ्तार किया। उसे पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई।

पुलिस के अनुसार पूछताछ में दल्लो ने बताया कि ग्राम भिडोली निवासी गिर्राज उर्फ हक्के उर्फ लोहे यादव ने उसे फोन करके अपने साथियों के साथ आने को कहा था। कथित तौर पर गिर्राज ने भैंस चोरी करने की बात कही थी।

इसके बाद दल्लो भिडोली पहुंचा, जहां उसकी गिर्राज से मुलाकात हुई। पुलिस के मुताबिक गिर्राज ने मोबाइल फोन पर उसकी बात गंगाराम यादव निवासी शकुवाया से कराई।

बेहरदा के पास प्लॉट में ठहराया, खाना भी खिलाया
पुलिस पूछताछ में सामने आई जानकारी के अनुसार दल्लो और उसके साथी बेहरदा के पास पहुंचे। वहां उनकी मुलाकात गंगाराम यादव से हुई।

आरोप है कि गंगाराम ने उन्हें अपने प्लॉट पर जंगल में रुकने की जगह उपलब्ध कराई और खाना खिलाया। इसके अगले दिन कथित रूप से उन्हें 13 चोरी की भैंसें सौंप दी गईं।

आरोपी भैंसों को लेकर जा रहे थे, लेकिन बागवानी के पास पुलिस को देखकर उन्हें छोड़कर भाग निकले।
पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि भैंस चोरी की वारदात में कौन-कौन लोग सीधे तौर पर शामिल थे और किन लोगों ने आरोपियों को ठहरने, भोजन या अन्य किसी तरह की सहायता उपलब्ध कराई।

गिर्राज भी गिरफ्तार, दो आरोपी जेल भेजे गए

पुलिस ने इसी क्रम में 3 सितंबर को गिर्राज उर्फ हक्के उर्फ लोहे पुत्र लखन यादव, उम्र 36 वर्ष, निवासी भिडोली थाना गोवर्धन को भी गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।

इस मामले में पुलिस अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं पुलिस के अनुसार चोरी की वारदात में शामिल अन्य आरोपियों और कथित रूप से आरोपियों को आश्रय एवं सहयोग देने वाले लोगों की तलाश जारी है।

पुलिस टीम की रही अहम भूमिका

पूरे मामले के खुलासे में थाना प्रभारी निरीक्षक सुरेश शर्मा के नेतृत्व में पुलिस टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कार्रवाई में सउनि हरिओम पाण्डेय, प्रधान आरक्षक 947 इकवाल अहमद, प्रधान आरक्षक 731 गिर्राज मीणा, आरक्षक 817 रविन्द्र धाकड़, आरक्षक 875 ज्ञान सिंह रावत, आरक्षक 116 संदीप राठौर, आरक्षक अजय शर्मा, आरक्षक 1058 राजेन्द्र प्रसाद और चालक आरक्षक 72 मनीष परिहार का योगदान रहा।

अन्य आरोपियों की तलाश जारी

बैराड़ पुलिस का कहना है कि मामले में अभी जांच पूरी नहीं हुई है। चोरी में शामिल शेष आरोपियों के साथ-साथ चोरों को आश्रय और सहयोग देने वाले लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस का दावा है कि प्रकरण में शामिल अन्य आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने के प्रयास जारी हैं।
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