खुशबू शर्मा:खबर शिवपुरी जिले के करेरा के नगर की समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर नगर परिषद कार्यालय पहुंचने वाले लोगों को यदि जिम्मेदार अधिकारी ही उपलब्ध न मिलें तो नाराजगी होना स्वाभाविक है। करैरा नगर परिषद में अधिकारियों की कथित गैरमौजूदगी को लेकर अब पार्षदों का गुस्सा खुलकर सामने आया है।नाराज पार्षदों ने नगर परिषद कार्यालय में ही पर्चे चिपकाकर विरोध दर्ज कराया। इन पर्चों पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा गया था— “नगर की जनता बेहाल, CMO एवं इंजीनियर लापता।”
पार्षदों द्वारा कार्यालय में चिपकाए गए इन पर्चों ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली और अधिकारियों की उपलब्धता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला सामने आने के बाद नगर परिषद कार्यालय में दिनभर चर्चा का माहौल बना रहा।
पार्षदों का आरोप है कि नगर की जनता अपनी समस्याएं लेकर नगर परिषद कार्यालय पहुंचती है, लेकिन निर्धारित समय पर कई जिम्मेदार अधिकारी उपलब्ध नहीं मिलते। इसके चलते लोगों को अपने काम के लिए बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं और कई बार निराश होकर वापस लौटना पड़ता है।
जनता के काम के लिए अधिकारी मिलना जरूरी: पार्षद
नगर परिषद करैरा के वार्ड क्रमांक 3 की निर्दलीय पार्षद शालिनी सोनी और वार्ड क्रमांक 15 की कांग्रेस पार्षद खुशबू यादव ने अधिकारियों की कथित अनुपस्थिति को लेकर नाराजगी जताई।
पार्षदों का कहना है कि नगर परिषद कार्यालय आम जनता के कामकाज और समस्याओं के निराकरण का प्रमुख स्थान है। शहर के लोग पानी, सफाई, सड़क, नाली, निर्माण कार्य और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी शिकायतें लेकर नगर परिषद पहुंचते हैं। ऐसे में यदि संबंधित अधिकारी कार्यालय में उपलब्ध नहीं होंगे तो लोगों की शिकायतों का समाधान कैसे होगा?
पार्षदों ने आरोप लगाया कि कई बार नागरिक अपनी समस्या लेकर कार्यालय पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें संबंधित अधिकारी नहीं मिलते। इसके चलते उन्हें दोबारा कार्यालय आना पड़ता है। उनका कहना है कि आम जनता पहले ही अपनी रोजमर्रा की समस्याओं से परेशान है और यदि शिकायत सुनने वाला अधिकारी ही उपलब्ध नहीं होगा तो समस्या का समाधान कैसे होगा।
कर्मचारियों की मौजूदगी पर भी सवाल
पार्षद खुशबू यादव ने केवल अधिकारियों की मौजूदगी ही नहीं, बल्कि कुछ कर्मचारियों की कथित गैरमौजूदगी पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि कई बार कर्मचारी भी समय पर कार्यालय में उपलब्ध नहीं मिलते।
पार्षदों के मुताबिक नगर परिषद में आने वाले नागरिकों को अपने छोटे-बड़े कामों के लिए कर्मचारियों और अधिकारियों की तलाश करनी पड़ती है। इससे जनता के बीच नाराजगी बढ़ रही है।
उन्होंने मांग की कि नगर परिषद के अधिकारी और कर्मचारी निर्धारित समय पर कार्यालय में मौजूद रहें, ताकि लोगों की समस्याएं सुनी जा सकें और उनका समय पर निराकरण कराया जा सके।
पर्चे चिपकाकर जताया विरोध
अधिकारियों की कथित गैरमौजूदगी को लेकर पार्षदों ने इस बार सामान्य शिकायत या ज्ञापन देने के बजाय नगर परिषद कार्यालय में ही पर्चे चिपकाकर विरोध दर्ज कराया।
पर्चों पर लिखा था— “नगर की जनता बेहाल, CMO एवं इंजीनियर लापता।”
यह संदेश नगर परिषद कार्यालय पहुंचने वाले लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। पार्षदों का यह विरोध इसलिए भी खास रहा, क्योंकि आमतौर पर जनप्रतिनिधि अधिकारियों के खिलाफ शिकायत, ज्ञापन या बैठक के माध्यम से अपनी नाराजगी दर्ज कराते हैं। लेकिन यहां कार्यालय की दीवारों पर ही सवाल लिखकर व्यवस्था पर निशाना साधा गया।
‘अधिकारी रहेंगे तो जनता की सुनी जाएगी’
पार्षदों का कहना है कि नगर परिषद में अधिकारियों की नियमित मौजूदगी महज कार्यालयीन व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध नगर की जनता के कामकाज से है।
उनके अनुसार यदि CMO, इंजीनियर और संबंधित अधिकारी कार्यालय में मौजूद रहेंगे तो लोग सीधे अपनी समस्याएं बता सकेंगे। इसके बाद संबंधित शाखा को निर्देश देकर पानी, सफाई, सड़क, नाली और निर्माण संबंधी समस्याओं का निराकरण कराया जा सकता है।
पार्षदों ने कहा कि जनता को अधिकारियों से मिलने के लिए बार-बार कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए अधिकारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जानी चाहिए।
‘अफसर नहीं मिलते तो लोगों को लगाने पड़ते हैं चक्कर’
पार्षद शालिनी सोनी ने कहा कि नगर परिषद का कार्यालय जनता की समस्याओं के समाधान के लिए है। उनके अनुसार निर्धारित समय पर CMO और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की उपलब्धता जरूरी है।
उन्होंने कहा कि लोग अपनी छोटी-बड़ी समस्याएं लेकर नगर परिषद पहुंचते हैं। यदि अधिकारी नहीं मिलते हैं तो जरूरी काम अटक जाते हैं और लोगों को बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं।
पार्षदों का कहना है कि नगर परिषद को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिसमें नागरिकों को शिकायत लेकर आने पर संबंधित अधिकारी या जिम्मेदार कर्मचारी उपलब्ध मिले और उन्हें अपनी समस्या के समाधान के लिए भटकना न पड़े।
CMO बोले—दो दिन से भोपाल में हूं, लौटकर बात करूंगा
वहीं इस पूरे मामले पर नगर परिषद करैरा के CMO गोपाल गुप्ता ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वह सरकारी काम से पिछले दो दिनों से भोपाल में हैं।
CMO गोपाल गुप्ता के मुताबिक, “मैं सरकारी काम से दो दिन से भोपाल में हूं। शासकीय काम से बाहर न होने पर नियमित रूप से नगर परिषद में बैठता हूं। पार्षदों ने ऐसा क्यों किया और उनकी क्या नाराजगी है, वापस आकर बात करूंगा।”
CMO के इस बयान के बाद अब सवाल यह है कि पार्षदों द्वारा उठाई गई शिकायतों पर उनकी वापसी के बाद क्या चर्चा होती है और नगर परिषद में अधिकारियों की उपलब्धता को लेकर क्या व्यवस्था बनाई जाती है।
पर्चों से गरमाया माहौल, अब जवाब का इंतजार
करैरा नगर परिषद में चिपकाए गए इन पर्चों ने फिलहाल अधिकारियों की कार्यप्रणाली और जनता की समस्याओं के निराकरण को लेकर बहस छेड़ दी है। एक तरफ पार्षद अधिकारियों की कथित अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं CMO का कहना है कि वे सरकारी काम से भोपाल में थे और वापस लौटने के बाद पार्षदों से उनकी नाराजगी को लेकर बातचीत करेंगे।
अब देखना होगा कि CMO की वापसी के बाद पार्षदों के साथ क्या चर्चा होती है और नगर परिषद में अधिकारियों की नियमित उपस्थिति तथा जनता की शिकायतों के समाधान को लेकर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।