14 साल की बच्ची के पेट में बन गया बालों का ‘गुच्छा’:डॉक्टरों ने 3 घंटे की सर्जरी कर निकाला

Nikk Pandit
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खुशबू शर्मा खबर शिवपुरी:शिवपुरी के श्रीमंत राजमाता विजयाराजे सिंधिया मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने एक 14 वर्षीय किशोरी के पेट से करीब 16×14 सेंटीमीटर का बालों का विशाल गुच्छा निकालकर सफल ऑपरेशन किया है। चिकित्सकीय भाषा में इसे ट्राइकोबेजोआर कहा जाता है। बताया गया कि यह गुच्छा किशोरी के पेट के करीब 90 प्रतिशत हिस्से में फैला हुआ था और छोटी आंत तक पहुंच गया था।

किशोरी को पिछले कई महीनों से लगातार पेट दर्द, उल्टी, पेट भरा-भरा महसूस होना और भूख कम लगने जैसी परेशानियां हो रही थीं। शुरुआत में सामान्य पेट की समस्या समझी गई, लेकिन जब परेशानी लगातार बनी रही तो उसे उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज लाया गया। जांच के बाद पेट के अंदर मौजूद बालों के बड़े गुच्छे का पता चला।

किशोरी को 11 सितंबर को सर्जरी विभाग में भर्ती कराया गया। चिकित्सकीय जांच में उसका हीमोग्लोबिन महज 7.8 ग्राम पाया गया। हालत को देखते हुए ऑपरेशन से पहले उसे दो यूनिट रक्त चढ़ाया गया, जिसके बाद डॉक्टरों ने आगे की जांच और सर्जरी की तैयारी शुरू की।

सीटी स्कैन में सामने आई पेट के अंदर की ‘हैरान करने वाली’ तस्वीर

मरीज की स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने सीटी स्कैन कराया। जांच में पेट के अंदर बड़े आकार का बालों का गुच्छा दिखाई दिया। साथ ही आंत में छेद होने की संभावना भी सामने आई। गुच्छे का आकार काफी बड़ा होने के कारण डॉक्टरों के सामने चुनौती थी कि इसे किस तरह सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला जाए।

डॉक्टरों ने मरीज की स्थिति और गुच्छे के आकार को देखते हुए ओपन सर्जरी का निर्णय लिया। इसके बाद मेडिकल कॉलेज की विशेषज्ञ टीम ने करीब तीन घंटे तक ऑपरेशन किया।

एंडोस्कोपी से निकालना मुश्किल, इसलिए करनी पड़ी ओपन सर्जरी

डॉक्टरों के अनुसार पेट में मौजूद बालों का गुच्छा इतना बड़ा और ठोस हो चुका था कि उसे सामान्य एंडोस्कोपी के माध्यम से पूरी तरह बाहर निकालना संभव नहीं था। ऐसे में ओपन सर्जरी ही सुरक्षित विकल्प माना गया।

अधिष्ठाता डॉ. ईला गुजारिया के मार्गदर्शन तथा सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. अनंत राखोंडे के नेतृत्व में ऑपरेशन किया गया। सर्जिकल टीम में प्रोफेसर डॉ. सौरभ चौहान, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कौशलेन्द्र सिंह नरवरिया और पीजी डॉक्टर डॉ. महेश पाटीदार शामिल रहे। वहीं एनेस्थीसिया विभाग की जिम्मेदारी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रियंका गुप्ता की देखरेख में रही।

करीब तीन घंटे तक चली इस जटिल सर्जरी के बाद बालों के विशाल गुच्छे को पेट से बाहर निकाला गया। ऑपरेशन के बाद किशोरी की हालत फिलहाल स्थिर बताई गई है और डॉक्टरों की टीम उसकी निगरानी कर रही है।

बाल पेट में जमा होते रहे और बन गया बड़ा ‘गुच्छा’

प्रोफेसर डॉ. सौरभ चौहान ने बताया कि बाल सामान्य रूप से पचते नहीं हैं। यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक बाल निगलता रहता है तो वे पेट में जमा होते जाते हैं। समय के साथ ये बाल आपस में उलझकर एक ठोस गुच्छे का रूप ले सकते हैं। इसी स्थिति को चिकित्सकीय रूप से ट्राइकोबेजोआर कहा जाता है।

इस मामले में भी लंबे समय तक बाल पेट में जमा होने के कारण उनका आकार लगातार बढ़ता गया और अंततः यह गुच्छा इतना बड़ा हो गया कि उसने पेट के अधिकांश हिस्से को घेर लिया तथा छोटी आंत तक पहुंच गया।

बाल खाने की आदत के पीछे मानसिक तनाव भी हो सकता है कारण

असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कौशलेन्द्र सिंह नरवरिया ने बताया कि इस तरह की स्थिति कई मामलों में ट्राइकोटिलोमेनिया, यानी बाल तोड़ने या खींचने की आदत और ट्राइकोफेजिया, यानी बाल खाने या निगलने की आदत से जुड़ी हो सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार कई बार ऐसी आदतों के पीछे मानसिक तनाव, चिंता अथवा अन्य व्यवहार संबंधी कारण हो सकते हैं। इसलिए केवल ऑपरेशन के बाद उपचार पूरा नहीं माना जाता। मरीज की आगे भी निगरानी और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ परामर्श जरूरी होता है, ताकि समस्या दोबारा न हो।

समय पर इलाज नहीं मिलता तो बढ़ सकती थीं मुश्किलें

डॉक्टरों के मुताबिक पेट में लंबे समय तक बाल जमा रहने से कई तरह की जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। इससे पेट में दर्द, उल्टी, भूख कम होना और भोजन पचाने में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गुच्छा बड़ा होने पर आंत में रुकावट जैसी गंभीर स्थिति भी पैदा हो सकती है।

इस मामले में सीटी स्कैन के दौरान आंत में छेद होने की संभावना भी सामने आई थी, इसलिए डॉक्टरों ने बिना देरी किए सर्जरी का फैसला लिया।

शिवपुरी मेडिकल कॉलेज की टीम की तत्परता और विशेषज्ञ चिकित्सकों की संयुक्त मेहनत से करीब तीन घंटे की जटिल ओपन सर्जरी के बाद किशोरी के पेट से विशाल बालों का गुच्छा सफलतापूर्वक निकाल लिया गया। फिलहाल किशोरी की हालत स्थिर है और चिकित्सकीय टीम उसकी आगे की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

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