कबाड़ा उठाने गया 17 साल का सौरभ:बिजली ने छीन ली जिंदगी

Nikk Pandit
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खुशबू शर्मा खबर शिवपुरी:शिवपुरी में कबाड़ा उठाने गया एक 17 वर्षीय नाबालिग बिजली के तार की चपेट में आ गया। करंट लगते ही उसके शरीर में आग लग गई और वह पहली मंजिल से नीचे जा गिरा। हादसे में करीब 70 प्रतिशत शरीर झुलस चुके सौरभ शाक्य ने कई दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष किया, लेकिन आखिरकार ग्वालियर में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।

मृतक के परिजन अब हादसे की पूरी जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। परिवार का आरोप है कि हादसे के बाद उन्हें मदद मिलने के बजाय संबंधित मकान में मौजूद महिला की ओर से चोरी का आरोप लगाया गया। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

कबाड़ा लेने छत पर पहुंचा और कुछ ही सेकंड में मच गया हड़कंप

बताया गया कि 6 जुलाई को सौरभ शाक्य अपने दोस्त सुमित शाक्य के साथ हाथ ठेला लेकर कबाड़ा खरीदने निकला था। दोनों हनुमान कॉलोनी स्थित एक मकान पर पहुंचे थे। परिवार के अनुसार, मकान में मौजूद महिला ने सौरभ से पहली मंजिल की छत पर रखा कबाड़ा नीचे लाने के लिए कहा।

सौरभ कबाड़ा लेने के लिए पहली मंजिल की छत पर पहुंचा। इसी दौरान वह वहां से गुजर रहे बिजली के तार की चपेट में आ गया। करंट लगते ही उसके शरीर में आग लग गई। अचानक हुए इस हादसे से मौके पर अफरा-तफरी मच गई और सौरभ पहली मंजिल से नीचे जा गिरा। एक पल में कबाड़ा उठाने निकला किशोर जिंदगी और मौत की जंग में पहुंच गया।

दोस्त हाथ ठेले पर लेकर पहुंचा अस्पताल

हादसे के बाद सौरभ को उसके दोस्त सुमित ने किसी तरह संभाला। गंभीर रूप से झुलसे सौरभ को हाथ ठेले पर लेकर सिद्धि विनायक अस्पताल पहुंचाया गया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे मेडिकल कॉलेज भेजा गया।

सौरभ की हालत बेहद गंभीर थी। शरीर का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा झुलस चुका था। चिकित्सकों ने स्थिति को देखते हुए उसे उसी दिन ग्वालियर रेफर कर दिया।

इसके बाद परिजन उसे लेकर ग्वालियर पहुंचे, जहां कई दिनों तक उसका उपचार चला। परिवार को उम्मीद थी कि सौरभ इस भीषण हादसे को मात देकर वापस घर लौटेगा, लेकिन इलाज के दौरान उसकी हालत बिगड़ती चली गई और आखिरकार उसकी मौत हो गई।

कई दिनों तक जिंदगी से लड़ता रहा सौरभ, फिर हार गया

सौरभ की मौत की खबर जैसे ही परिवार तक पहुंची, घर में मातम पसर गया। जिस बच्चे के हाथ में कुछ दिन पहले तक कबाड़ा उठाने का ठेला था, उसी बच्चे का शव परिवार को पोस्टमार्टम के बाद सौंपा गया।

सोमवार को ग्वालियर पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। अब मामले में शिवपुरी की कोतवाली पुलिस द्वारा आगे की जांच की जाएगी।

बहन ने बताई हादसे के बाद की पूरी कहानी

सौरभ की बहन काजल शाक्य के अनुसार, 6 जुलाई को सौरभ अपने दोस्त सुमित के साथ हाथ ठेला लेकर कबाड़ा लेने निकला था। दोनों हनुमान कॉलोनी के एक मकान पर पहुंचे थे। वहां से सौरभ को पहली मंजिल पर रखा कबाड़ा नीचे लाने के लिए कहा गया था।

काजल के मुताबिक, सौरभ जैसे ही छत पर पहुंचा, वह बिजली के तार की चपेट में आ गया। करंट लगने के बाद उसके शरीर में आग लग गई और वह नीचे गिर गया।
परिवार का कहना है कि घटना इतनी अचानक हुई कि किसी को कुछ समझने का मौका तक नहीं मिला।

हादसे के बाद मदद के बजाय चोरी के आरोप का दावा
परिजनों ने घटना के बाद संबंधित मकान पर पहुंचे जाने का भी आरोप लगाया है। मृतक की बहन काजल के मुताबिक, परिवार जब मौके पर पहुंचा तो वहां मौजूद महिला ने मदद करने के बजाय उन पर चोरी का आरोप लगाया और कथित तौर पर धमकाया।

परिजनों का कहना है कि उन्होंने मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर कोतवाली थाने का रुख किया था।परिवार ने पुलिस पर शुरुआती स्तर पर सुनवाई नहीं करने का आरोप भी लगाया था।

हालांकि, महिला की ओर से लगाए गए आरोप अथवा परिजनों के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। ऐसे में पूरे मामले में पुलिस जांच के बाद ही तस्वीर साफ हो सकेगी।

पिता पहले ही दुनिया छोड़ चुके, तीन भाई मजदूरी कर चलाते थे घर

सौरभ के परिवार की आर्थिक स्थिति भी बेहद कमजोर बताई जा रही है। परिजनों के अनुसार सौरभ के पिता की पहले ही मौत हो चुकी है। परिवार फिजिकल थाना क्षेत्र में कोलियों के मंदिर के पास किराए के मकान में रहता है। परिवार के तीन भाई मेहनत-मजदूरी कर घर का खर्च चलाते थे। ऐसे में सौरभ की मौत ने परिवार के सामने भावनात्मक संकट के साथ-साथ आर्थिक मुश्किलें भी खड़ी कर दी हैं।

अब सवाल—हादसा कैसे हुआ और जिम्मेदार कौन?

सौरभ की मौत के बाद परिवार की सबसे बड़ी मांग यही है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो। आखिर पहली मंजिल की छत पर बिजली के तार किस स्थिति में थे? क्या वहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे? सौरभ को छत पर कबाड़ा लेने भेजा गया था तो क्या उसे किसी संभावित खतरे के बारे में बताया गया था? हादसे के बाद परिवार के साथ क्या हुआ?

इन तमाम सवालों के जवाब पुलिस जांच के बाद ही सामने आएंगे।

फिलहाल एक परिवार ने अपना 17 वर्षीय बेटा खो दिया है। कबाड़ा उठाकर परिवार का हाथ बंटाने निकला सौरभ खुद कभी घर वापस नहीं लौट सका। ग्वालियर में कई दिनों तक जिंदगी के लिए जूझने के बाद उसकी मौत ने इस दर्दनाक हादसे को और भी गहरा कर दिया है। परिजन अब सिर्फ इंसाफ की उम्मीद लगाए बैठे हैं और मांग कर रहे हैं कि हादसे की वास्तविक वजह सामने लाई जाए तथा यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
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