लेह-लद्दाख में एक साल से थे तैनात, दिल्ली मुख्यालय में अचानक बिगड़ी तबीयत;परिवार पहुंचता:उससे पहले ही मिली निधन की खबर:16 वर्षीय बेटी और पत्नी के सिर से उठा पिता का साया

Nikk Pandit
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खुशबू शर्मा खबर:शिवपुरी जिले में शुक्रवार को शिवपुरी जिले के भौंती कस्बे का माहौल गमगीन हो गया। जिस रास्ते पर आम दिनों में चहल-पहल रहती है, उसी रास्ते से जब देश की सेवा करने वाले ITBP जवान नीरज शर्मा का पार्थिव शरीर पहुंचा तो हर आंख नम थी। भारत माता के जयकारों और देशभक्ति गीतों के बीच सैकड़ों लोगों ने अपने वीर जवान को अंतिम विदाई दी। तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर देखकर परिवार ही नहीं, बल्कि पूरा कस्बा भावुक हो उठा।

ITBP के दल के साथ नीरज शर्मा का पार्थिव शरीर भौंती पहुंचा। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़ पड़े। लोगों ने नम आंखों से जवान को श्रद्धांजलि दी। अंतिम यात्रा के दौरान लगातार ‘भारत माता की जय’ और देशभक्ति के नारों से पूरा कस्बा गूंजता रहा।

ITBP जवानों ने नीरज शर्मा को पूरे सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर दिया। सैन्य सम्मान के बाद उनके छोटे भाई प्रदीप शर्मा ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान परिवार का दर्द देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी भर आईं।

19 साल देश की सेवा में समर्पित कर दिए

भौंती निवासी नीरज शर्मा ने अपनी जिंदगी के करीब दो दशक देश सेवा को समर्पित कर दिए थे। वर्ष 2007 में वे ITBP में आरक्षक जीडी के पद पर भर्ती हुए थे। इसके बाद से लगातार अपनी जिम्मेदारी निभाते रहे। करीब 19 वर्षों तक ITBP में सेवाएं देने के बाद पिछले लगभग एक साल से उनकी तैनाती लेह-लद्दाख में थी।

कठिन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों वाले क्षेत्र में तैनाती के बावजूद नीरज लगातार अपनी ड्यूटी निभा रहे थे। परिवार के मुताबिक, छुट्टी खत्म होने के बाद 14 सितंबर को वे घर से ड्यूटी के लिए रवाना हुए थे। उस समय उनकी तबीयत कुछ खराब बताई जा रही थी।

उन्हें लेह-लद्दाख पहुंचना था, लेकिन उससे पहले दिल्ली स्थित ITBP मुख्यालय में रिपोर्ट करना जरूरी था।

बेटे को दिल्ली छोड़ने खुद साथ गए पिता

नीरज के पिता सुदामा प्रसाद शर्मा भी बेटे को दिल्ली तक छोड़ने के लिए उनके साथ गए थे। परिवार के लिए यह शायद एक सामान्य यात्रा थी। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही दिनों बाद यही सफर जिंदगी की सबसे दर्दनाक खबर में बदल जाएगा।

दिल्ली पहुंचने के बाद नीरज ITBP मुख्यालय में रुक गए, जबकि उनके पिता मथुरा दर्शन के लिए चले गए। परिवार अपनी सामान्य दिनचर्या में लौटने की तैयारी कर रहा था, लेकिन इसी बीच अचानक एक फोन ने सब कुछ बदल दिया।

‘तबीयत खराब है’… फोन आया और परिवार दिल्ली के लिए निकल पड़ा

नीरज के छोटे भाई प्रदीप शर्मा के अनुसार 16 सितंबर को दिल्ली स्थित ITBP मुख्यालय से परिवार के पास फोन आया। फोन पर नीरज की तबीयत खराब होने की जानकारी दी गई।

खबर मिलते ही परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। परिवार उसी शाम दिल्ली के लिए रवाना हो गया। रास्ते में मथुरा से पिता सुदामा प्रसाद शर्मा को भी अपने साथ लिया गया।

परिवार को उम्मीद थी कि दिल्ली पहुंचकर नीरज से मुलाकात होगी, उनकी तबीयत देखी जाएगी और जल्द ही वे ठीक हो जाएंगे। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

परिवार दिल्ली पहुंच पाता, उससे पहले ही नीरज के निधन की सूचना मिल गई।

एक पिता, जो कुछ दिन पहले बेटे को ड्यूटी तक छोड़ने गया था, अब उसी बेटे को अंतिम विदाई देने के लिए मजबूर था।

पीछे छूट गई पत्नी और 16 साल की बेटी

नीरज शर्मा अपने परिवार में दो भाइयों में बड़े थे। उनके परिवार में पत्नी और 16 वर्षीय बेटी है। बेटी अपनी मां के साथ भौंती में ही रहती है।

जिस पिता की वापसी का इंतजार बेटी कर रही होगी, वह पिता तिरंगे में लिपटकर घर लौटा। यह दृश्य पूरे भौंती के लिए बेहद भावुक कर देने वाला था।

परिवार के लिए यह सिर्फ एक सदस्य को खोना नहीं, बल्कि जिंदगी भर का ऐसा खालीपन है जिसे भर पाना आसान नहीं होगा।

अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा भौंती

जवान के निधन की खबर मिलते ही भौंती में शोक का माहौल था। शुक्रवार को जब उनका पार्थिव शरीर कस्बे में पहुंचा तो अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।

किसी ने हाथ जोड़कर श्रद्धांजलि दी तो किसी ने तिरंगे में लिपटे जवान को सलाम किया। अंतिम यात्रा में शामिल लोगों के चेहरे पर गम था, लेकिन साथ ही देश के लिए सेवा देने वाले जवान के प्रति सम्मान भी साफ दिखाई दे रहा था।

प्रशासनिक अधिकारी, पुलिसकर्मी, ITBP के जवान और स्थानीय लोग अंतिम संस्कार में मौजूद रहे।

तिरंगे में लिपटा बेटा, नम आंखों से विदा

अंतिम संस्कार के दौरान माहौल बेहद भावुक रहा। एक तरफ परिवार अपने बेटे, पति और पिता को खोने के दर्द में डूबा था, तो दूसरी तरफ पूरा कस्बा अपने उस जवान को अंतिम सलाम कर रहा था जिसने करीब 19 साल देश की सेवा में गुजार दिए।

नीरज शर्मा अब लौटकर कभी घर नहीं आएंगे, लेकिन भौंती की गलियों में उनकी यादें हमेशा रहेंगी। उनके परिवार के लिए उनका जाना अपूरणीय क्षति है और 16 वर्षीय बेटी के लिए पिता का जाना जिंदगी का ऐसा दर्द है, जिसकी भरपाई संभव नहीं।

भारत माता के जयकारों के बीच नीरज शर्मा पंचतत्व में विलीन हो गए। तिरंगे में लिपटा उनका पार्थिव शरीर विदा हुआ, लेकिन देश सेवा के लिए समर्पित उनके 19 वर्षों की कहानी हमेशा सम्मान के साथ याद की जाएगी।
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