शिवपुरी में शराब दुकान पर बवाल:तोड़फोड़-आगजनी के आरोप में सरपंच समेत 21 गिरफ्तार

Nikk Pandit
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खुशबू शर्मा खबर:शिवपुरी जिले में शराब दुकानों को लेकर चल रहे विरोध के बीच अमोला थाना क्षेत्र से बड़ी कार्रवाई सामने आई है। ग्राम गणेशखेड़ा की लाइसेंसी शराब दुकान में तोड़फोड़ और आगजनी के मामले में पुलिस ने सरपंच समेत कुल 21 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में ग्राम गणेशखेड़ा के सरपंच छोटेराजा गुर्जर (42) और ग्राम अमोलपठा के जनपद सदस्य दुष्यंत परमार (35) भी शामिल हैं।

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों पर शराब दुकान में
घुसकर तोड़फोड़ करने, शराब की बोतलों में आग लगाने, दुकान के कर्मचारी के साथ मारपीट और गाली-गलौज करने के आरोप हैं। इतना ही नहीं, मामले में आबकारी विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मारपीट तथा शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने के आरोप भी लगाए गए हैं।

मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया। कोर्ट से सभी आरोपियों को जेल भेज दिया गया।

शराब दुकान में घुसा हुजूम, फिर मच गया हंगामा
पुलिस के अनुसार अमोला थाना क्षेत्र के गणेशखेड़ा में स्थित लाइसेंसी शराब दुकान को लेकर विवाद सामने आया। आरोप है कि बड़ी संख्या में लोग दुकान में पहुंचे और वहां तोड़फोड़ शुरू कर दी।

स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब दुकान में रखी शराब की बोतलों को आग लगाने का आरोप सामने आया। दुकान के कर्मचारी के साथ कथित तौर पर मारपीट और गाली-गलौज भी की गई।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और संबंधित विभाग के अधिकारी सक्रिय हुए। मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी की कार्रवाई शुरू की गई।

सरपंच और जनपद सदस्य भी आरोपी बनाए गए
इस मामले में कार्रवाई की सबसे बड़ी बात यह रही कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में गणेशखेड़ा के सरपंच छोटेराजा गुर्जर और अमोलपठा के जनपद सदस्य दुष्यंत परमार के नाम भी शामिल हैं।

जनप्रतिनिधियों की गिरफ्तारी के बाद मामला और चर्चा में आ गया है। हालांकि आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और मामले की जांच के आधार पर ही होगी।
पुलिस ने सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।

अधिकारियों से मारपीट और सरकारी काम में बाधा का भी आरोप

मामला सिर्फ शराब दुकान में तोड़फोड़ और आगजनी तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, घटनाक्रम के दौरान आबकारी विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ मारपीट और उनके सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप भी सामने आए हैं।

यदि सरकारी अमले के साथ मारपीट और शासकीय कार्य में बाधा के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो मामला और गंभीर हो सकता है। फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों और आरोपों की जांच कर रही है।

पचावली में भी शराब दुकान बनी निशाना

शराब दुकानों को लेकर सामने आए विवादों की कड़ी में रन्नौद थाना क्षेत्र के पचावली का मामला भी सामने आया है। यहां शराब दुकान में आगजनी और तोड़फोड़ के मामले में पुलिस ने लखन उर्फ किन्ना आदिवासी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

पुलिस के मुताबिक, इस मामले में पहले ही 18 महिलाओं और 3 पुरुषों समेत 21 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। अब लखन उर्फ किन्ना आदिवासी की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या और बढ़ गई है।

इससे साफ है कि जिले में शराब दुकानों को लेकर हो रहे विरोध-प्रदर्शनों पर पुलिस की नजर बनी हुई है और तोड़फोड़ या आगजनी की घटनाओं में पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है।

विरोध की आड़ में कानून हाथ में लेने पर पुलिस सख्त
शराब दुकान को लेकर किसी व्यक्ति या ग्रामीण समूह को आपत्ति है तो अपनी मांग प्रशासन और संबंधित विभाग के सामने रखने का अधिकार है। लेकिन पुलिस का कहना है कि विरोध के नाम पर सरकारी या निजी संपत्ति में तोड़फोड़, आगजनी, मारपीट अथवा सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालना कानूनन गंभीर मामला हो सकता है।

अमोला की घटना में पुलिस ने जिस तरह सरपंच और जनपद सदस्य समेत 21 लोगों को गिरफ्तार किया है, उससे यह संदेश भी गया है कि जनप्रतिनिधि होने के बावजूद कानून से ऊपर कोई नहीं है।

हालांकि दूसरी ओर, आरोपियों के पक्ष और घटना के पीछे शराब दुकान को लेकर ग्रामीणों की वास्तविक शिकायत क्या थी, यह भी जांच का विषय है। पुलिस की जांच में सामने आने वाले तथ्यों से ही स्पष्ट होगा कि घटना के दौरान वास्तव में क्या-क्या हुआ था।

एक के बाद एक कार्रवाई से शराब दुकान विवाद गर्माया
अमोला और पचावली की घटनाओं ने जिले में शराब दुकानों को लेकर चल रहे विवाद को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। एक तरफ स्थानीय स्तर पर शराब दुकानों को लेकर विरोध की आवाजें उठ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ पुलिस ने आगजनी, तोड़फोड़ और मारपीट के आरोपों पर सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है।

अमोला में 21 गिरफ्तारियां और पचावली में भी लगातार गिरफ्तारी इस बात का संकेत है कि पुलिस ऐसे मामलों में अब किसी भी तरह की हिंसक गतिविधि को लेकर सख्त रुख अपना रही है।

फिलहाल अमोला मामले में सरपंच, जनपद सदस्य समेत सभी 21 आरोपी जेल पहुंच चुके हैं। वहीं पचावली मामले में भी पुलिस की कार्रवाई जारी है। अब निगाह इस बात पर है कि जांच के दौरान कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं और इन घटनाओं के पीछे शराब दुकानों को लेकर ग्रामीणों की नाराजगी की वास्तविक वजह क्या थी।
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