पितृपक्ष शुरू होते ही बाणगंगा-भदैयाकुंड पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़:पूर्वजों की आत्मशांति के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान का दौर शुरू; सुबह 7 बजे से घाटों पर पहुंचने लगे लोग

Nikk Pandit
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खुशबू शर्मा खबर शिवपुरी;पितृपक्ष की शुरुआत के साथ ही शनिवार को शिवपुरी शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों बाणगंगा और भदैयाकुंड पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। पितरों के प्रति श्रद्धा और उनकी आत्मशांति की कामना लेकर शहर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग दोनों घाटों पर पहुंचे। सुबह करीब 7 बजे से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई थी, जो दिन चढ़ने के साथ लगातार बढ़ती रही।

पितृपक्ष के पहले दिन लोगों ने अपने पूर्वजों के निमित्त विधि-विधान से तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान किया। परिवार के सदस्य पूजा सामग्री लेकर घाटों पर पहुंचे और पंडितों की मौजूदगी में धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए।

इस दौरान घाटों पर धार्मिक वातावरण दिखाई दिया। कई परिवारों ने अपने दिवंगत परिजनों को याद करते हुए परंपरा के अनुसार कर्मकांड किए और पूर्वजों की आत्मा की शांति एवं परिवार में सुख-समृद्धि की कामना की।

सुबह से ही घाटों पर शुरू हो गई थी चहल-पहल

पितृपक्ष के पहले दिन बाणगंगा और भदैयाकुंड पर सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। लोग अपने साथ पूजा सामग्री, फूल, जल और अन्य आवश्यक सामग्री लेकर घाटों पर पहुंचे। परिवारों के सदस्य एक साथ घाटों पर पहुंचे और पंडितों के मार्गदर्शन में अपने-अपने पूर्वजों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान कराए।

सुबह के समय घाटों पर विशेष रूप से अधिक चहल-पहल रही। एक ओर जहां श्रद्धालु तर्पण और पूजा-अर्चना में जुटे रहे, वहीं दूसरी ओर पंडितों द्वारा लोगों को उनकी परंपरा और निर्धारित तिथि के अनुसार श्राद्ध कर्म की विधि बताई गई।

जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, दोनों स्थानों पर श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ती गई। शहर के अलग-अलग क्षेत्रों से परिवार पितरों के निमित्त कर्मकांड कराने के लिए बाणगंगा और भदैयाकुंड पहुंचे।

पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध की विशेष मान्यता
पंडित शिव नारायण शर्मा के अनुसार पितृपक्ष हिंदू परंपरा में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का विशेष समय माना जाता है। इस दौरान लोग अपनी पारिवारिक परंपरा और पूर्वजों की तिथि के अनुसार श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं।

उन्होंने बताया कि पितृपक्ष के दौरान श्रद्धालु अपने पितरों का स्मरण करते हुए उनके निमित्त धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। मान्यता के अनुसार इस अवधि में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और तर्पण करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। अलग-अलग परिवार अपनी मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार इन कर्मकांडों को संपन्न करते हैं।

26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक चलेगा पितृपक्ष

इस वर्ष पितृपक्ष की शुरुआत 26 सितंबर से हुई है और यह क्रम 10 अक्टूबर तक चलेगा। इस दौरान अलग-अलग तिथियों पर श्रद्धालु अपने दिवंगत परिजनों और पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध कर्म करेंगे।

पितृपक्ष के दौरान निर्धारित तिथियों पर लोग अपने परिवार में दिवंगत हुए सदस्यों के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करते हैं। जिन परिवारों में पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात होती है, वे उसी तिथि के अनुसार कर्मकांड करने की परंपरा का पालन करते हैं।

इसके चलते आने वाले दिनों में भी शिवपुरी के प्रमुख धार्मिक स्थलों और घाटों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहने की संभावना है।

परिवार के साथ पहुंचे श्रद्धालु

शनिवार को बाणगंगा और भदैयाकुंड पर कई परिवार सामूहिक रूप से पहुंचे। परिवार के बुजुर्गों से लेकर युवा सदस्य तक धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हुए। कई लोगों ने घाट पर बैठकर पंडितों के निर्देशन में तर्पण किया और अपने पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद किया।

घाटों पर मौजूद लोगों का कहना था कि पितृपक्ष के दौरान अपने पूर्वजों को याद करना उनके लिए धार्मिक आस्था के साथ-साथ भावनात्मक जुड़ाव का भी अवसर है। परिवार के दिवंगत सदस्यों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए वे हर वर्ष निर्धारित तिथि पर श्राद्ध कर्म करते हैं।

घाटों पर नजर आया धार्मिक माहौल

पितृपक्ष के पहले दिन बाणगंगा और भदैयाकुंड का वातावरण पूरी तरह धार्मिक नजर आया। सुबह से ही पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के कारण घाटों पर चहल-पहल बनी रही। श्रद्धालु शांतिपूर्वक अपने-अपने कर्मकांड में जुटे रहे।

पंडितों की मौजूदगी में विधि-विधान से तर्पण और पिंडदान कराया गया। कई परिवारों ने अनुष्ठान पूरा करने के बाद अपने पूर्वजों की आत्मशांति के लिए प्रार्थना की।

पितृपक्ष की शुरुआत के साथ ही शिवपुरी में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और स्मरण का यह सिलसिला शुरू हो गया है। आने वाले दिनों में भी बाणगंगा और भदैयाकुंड सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं के पहुंचने का क्रम जारी रहेगा।
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