खबर: शिवपुरी जिला मुख्यालय पर मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में इस बार केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के शिवपुरी दौरे की छाया साफ नजर आई। सिंधिया के कार्यक्रमों में अधिकारियों की ड्यूटी लगाए जाने के चलते जनसुनवाई कक्ष में कई कुर्सियां खाली दिखाई दीं। आम दिनों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों से अपनी शिकायतें लेकर पहुंचने वाले आवेदकों की संख्या भी कम रही।
हालांकि, जो फरियादी जनसुनवाई में पहुंचे, वे अपने साथ ऐसी समस्याएं लेकर आए, जिनमें फसल बर्बादी, जमीन पर कब्जा, बीमारी में महिला को घर से निकालने और बुजुर्ग माता-पिता से कथित दुर्व्यवहार जैसे गंभीर मामले शामिल रहे।
जनसुनवाई में संयुक्त कलेक्टर यूनिस खान और डिप्टी कलेक्टर अनूप श्रीवास्तव ने आवेदकों की समस्याएं सुनीं और संबंधित विभागों को मामलों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए।
सिंधिया का दौरा भारी या जनसुनवाई की प्राथमिकता हल्की?
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के शिवपुरी दौरे के दौरान प्रशासनिक अमले की व्यस्तता स्वाभाविक रही, लेकिन मंगलवार की जनसुनवाई में खाली पड़ी कुर्सियों ने व्यवस्था को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए।
जनसुनवाई वह मंच है जहां जिले के दूरदराज इलाकों से लोग अपनी शिकायत लेकर सीधे प्रशासन के सामने पहुंचते हैं। ऐसे में फरियादियों की शिकायत सुनने के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों की मौजूदगी बेहद जरूरी होती है।
मंगलवार को कई विभागों के अधिकारियों की गैरमौजूदगी के बीच जनसुनवाई संचालित हुई। ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि क्या वीआईपी दौरे के दौरान आम आदमी की फरियाद के लिए प्रशासनिक व्यवस्था को वैकल्पिक तरीके से मजबूत नहीं किया जा सकता था? हालांकि मौजूद अधिकारियों ने आवेदकों की शिकायतें सुनीं और संबंधित विभागों को कार्रवाई के निर्देश दिए।
जंगली सुअरों का खेत पर हमला, मूंगफली-मूंग की फसल चौपट
जनसुनवाई में राजा की मुढेरी गांव के प्रतापसिंह जाटव अपनी फसल से जुड़ी शिकायत लेकर पहुंचे। किसान के मुताबिक 30 अगस्त को जंगली सुअरों का झुंड उनके खेत में घुस गया और मूंगफली तथा मूंग की खड़ी फसल को नुकसान पहुंचा दिया। किसान का कहना है कि फसल खराब होने के बाद उन्होंने पटवारी से सर्वे कराने के लिए संपर्क किया, लेकिन समय पर सर्वे नहीं हो सका।
अब किसान ने प्रशासन से राजस्व और वन विभाग की संयुक्त टीम भेजकर खेत का सर्वे और पंचनामा कराने की मांग की है। आवेदन में किसान ने खसरा नंबर 1445, 1454 और 1830 का उल्लेख करते हुए आरबीसी 6-4 के तहत मुआवजा दिलाने की मांग की है। किसान की शिकायत सीधे उस समस्या की ओर इशारा करती है, जिससे ग्रामीण इलाकों में खेती करने वाले किसानों को जंगली जानवरों के कारण नुकसान उठाना पड़ता है।
पट्टे की जमीन पर कब्जे का आरोप, महिला पहुंची प्रशासन के दरबार
पिछोर तहसील के ककरौआ गांव की रामबेटी आदिवासी भी अपनी जमीन बचाने की फरियाद लेकर जनसुनवाई में पहुंचीं। महिला के आवेदन के अनुसार उनकी पट्टे की जमीन सर्वे नंबर 1865, 1894, 1895 और 1897 में दर्ज है।रामबेटी ने आरोप लगाया कि गलत सीमांकन के बाद गांव के माधो पाल ने उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया।
महिला ने यह भी आरोप लगाया कि पटवारी से मिलीभगत कर जमीन को अपने नाम कराने का प्रयास किया गया। रामबेटी ने प्रशासन से जमीन का दोबारा सीमांकन कराकर कथित कब्जा हटाने की मांग की है। अब इस मामले में राजस्व विभाग की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी कि जमीन की वास्तविक स्थिति क्या है और सीमांकन में कोई गड़बड़ी हुई या नहीं।
बीमारी में घर से निकालने का आरोप, भरण-पोषण की गुहार
कोलारस क्षेत्र की चंदनिया यादव ने भी जनसुनवाई में पहुंचकर अपने पति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। महिला ने आरोप लगाया कि बीमारी के दौरान उसके पति चिरौजी यादव ने उसे करीब एक साल पहले घर से निकाल दिया। महिला के मुताबिक वह लंबे समय से बीमार है और इलाज के लिए आर्थिक सहायता की जरूरत है। उसने यह भी आरोप लगाया कि उसके जेवर पति ने अपने पास रख लिए हैं। महिला ने प्रशासन से इलाज के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने और पति से भरण-पोषण दिलाने की मांग की है।
70 साल की प्रेमवती बोलीं—बेटा-बहू से बचाओ
जनसुनवाई में सबसे भावुक शिकायतों में से एक 70 वर्षीय प्रेमवती बाई की रही। सुभाष कॉलोनी निवासी प्रेमवती बाई ने अपने बड़े बेटे जगदीश राठौर और बहू कमलेश राठौर के खिलाफ शिकायत दी।
महिला ने अभद्र व्यवहार, खर्च के लिए पैसे नहीं देने और गाली-गलौज करने के आरोप लगाए। शिकायत में उन्होंने जान से खत्म करने की धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया है।
प्रेमवती बाई ने प्रशासन से बेटे और बहू को बुलाकर उचित कानूनी कार्रवाई करने तथा स्वयं और अपने पति की सुरक्षा सुनिश्चित कराने की मांग की।
सिंधिया के दौरे के बीच आम आदमी की आवाज कितनी पहुंची?
मंगलवार की जनसुनवाई की तस्वीर कई सवाल छोड़ गई। एक तरफ जिले में केंद्रीय मंत्री का बड़ा दौरा था और प्रशासनिक अधिकारी उनके कार्यक्रमों की व्यवस्थाओं में जुटे थे, वहीं दूसरी तरफ जनसुनवाई में पहुंचे लोगों के पास अपनी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी गंभीर समस्याएं थीं।
खाली कुर्सियां सिर्फ कुर्सियां नहीं थीं, बल्कि यह सवाल भी छोड़ गईं कि जब जिले का बड़ा वीआईपी दौरा हो, तब आम आदमी की शिकायत सुनने वाली प्रशासनिक व्यवस्था कितनी मजबूत रहती है?
सिंधिया का दौरा प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन जनसुनवाई भी शासन की जवाबदेही का अहम हिस्सा है। किसान की फसल, आदिवासी महिला की जमीन, बीमार महिला का भरण-पोषण और बुजुर्ग दंपती की सुरक्षा जैसे मामले किसी भी वीआईपी कार्यक्रम से कम महत्वपूर्ण नहीं माने जा सकते।
फिलहाल मौजूद अधिकारियों ने सभी शिकायतों को सुना और संबंधित विभागों को जांच एवं कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
अब असली परीक्षा आदेश देने की नहीं, बल्कि इन फरियादियों की शिकायतों पर जमीन पर कार्रवाई होने की है। किसान को मुआवजा मिलता है या नहीं, जमीन का सीमांकन निष्पक्ष तरीके से होता है या नहीं और बुजुर्ग दंपती को सुरक्षा मिलती है या नहीं—यही तय करेगा कि मंगलवार की जनसुनवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रही या फरियादियों को वास्तव में राहत भी मिली।