खबर: शिवपुरी जिले के सरकारी छात्रावासों में व्यवस्थाओं और विद्यार्थियों की निगरानी को लेकर प्रशासन की सख्ती के बीच शिवपुरी जिले के भटनावर स्थित सीनियर बालक छात्रावास में मंगलवार को औचक निरीक्षण के दौरान कई गंभीर लापरवाहियां सामने आईं। कलेक्टर अर्पित वर्मा के निर्देश पर एसडीएम जेपी गुप्ता छात्रावास का निरीक्षण करने पहुंचे, लेकिन मौके पर छात्रावास के अधीक्षक हेमंत राजपूत ही मौजूद नहीं मिले।
निरीक्षण के दौरान छात्रावास में केवल चौकीदार राशिद खान मौजूद था। अधिकारियों के पहुंचने पर अधीक्षक की गैरमौजूदगी ने छात्रावास की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए। स्थिति यह रही कि छात्रावास की चाबियां भी अधीक्षक के पास होने के कारण अधिकारियों को मौके पर हाजिरी रजिस्टर और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड की तत्काल जांच करने में परेशानी हुई।
औचक निरीक्षण में खुली व्यवस्थाओं की पोल
मंगलवार को कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम जेपी गुप्ता अचानक भटनावर के सीनियर बालक छात्रावास पहुंचे। प्रशासनिक अधिकारी के अचानक पहुंचने से छात्रावास की वास्तविक स्थिति सामने आ गई।
अधिकारी जब छात्रावास पहुंचे तो वहां अधीक्षक मौजूद नहीं थे। उनकी जगह केवल चौकीदार राशिद खान मौजूद मिला। छात्रावास जैसी संस्था, जहां विद्यार्थियों के रहने, भोजन, सुरक्षा, उपस्थिति और दैनिक व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी अधीक्षक की होती है, वहां जिम्मेदार अधिकारी की अनुपस्थिति को प्रशासन ने गंभीरता से लिया।
निरीक्षण के दौरान यह भी जानकारी सामने आई कि अधीक्षक पिछले कई दिनों से छात्रावास में नहीं आ रहे हैं। हालांकि उनकी अनुपस्थिति को लेकर आधिकारिक तौर पर क्या कारण है, यह रिपोर्ट में स्पष्ट होना बाकी है।
चाबियां भी अधीक्षक के पास, रिकॉर्ड की जांच अटकी
मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब अधिकारियों को पता चला कि छात्रावास की चाबियां भी अधीक्षक के पास ही हैं। इसके कारण एसडीएम मौके पर हाजिरी रजिस्टर और अन्य रिकॉर्ड की तत्काल जांच नहीं कर सके।
छात्रावास में विद्यार्थियों की उपस्थिति, उनके आने-जाने और रहने से संबंधित रिकॉर्ड बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में रिकॉर्ड की उपलब्धता नहीं होने पर अधिकारियों ने व्यवस्थाओं को लेकर नाराजगी जताई।
अब प्रशासन अधीक्षक से रिकॉर्ड और अनुपस्थिति से संबंधित जानकारी लेने के साथ ही पूरे मामले की विस्तृत जांच कर सकता है।
हॉस्टल में सिर्फ 6 छात्र मिले
औचक निरीक्षण के दौरान छात्रावास में केवल छह छात्र मौजूद मिले। छात्रावास में निर्धारित संख्या में कितने छात्र दर्ज हैं और बाकी छात्र उस समय कहां थे, इसे लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आई कि बाकी छात्रों के आने-जाने अथवा उनकी अनुपस्थिति को लेकर मौके पर कोई स्पष्ट रिकॉर्ड अधिकारियों के सामने उपलब्ध नहीं हो सका। छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों की नियमित हाजिरी दर्ज करना और उनके आवागमन का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना आवश्यक होता है। इससे यह पता चलता है कि कौन सा विद्यार्थी छात्रावास में मौजूद है और कौन अनुपस्थित है।
ऐसे में केवल छह छात्रों का मौके पर मिलना और अन्य छात्रों की स्थिति का स्पष्ट रिकॉर्ड तत्काल उपलब्ध न होना प्रशासन के लिए गंभीर विषय बन गया।
चौकीदार के भरोसे छात्रावास संचालन पर सवाल
निरीक्षण के दौरान अधीक्षक की गैरमौजूदगी में छात्रावास में केवल चौकीदार का मौजूद होना भी चर्चा का विषय बना।
छात्रावास का संचालन केवल भवन की सुरक्षा तक सीमित नहीं होता। विद्यार्थियों की उपस्थिति, भोजन, अनुशासन, स्वास्थ्य, साफ-सफाई, सुरक्षा और रिकॉर्ड सहित कई जिम्मेदारियां होती हैं। ऐसे में अधीक्षक की अनुपस्थिति में व्यवस्थाएं किस तरह संचालित हो रही थीं, यह जांच का विषय बन गया है। प्रशासन अब यह भी देख सकता है कि अधीक्षक की गैरमौजूदगी कितने दिनों से थी और इस दौरान छात्रावास की दैनिक व्यवस्थाएं किसके जिम्मे थीं।
एसडीएम ने जताई नाराजगी
निरीक्षण के दौरान सामने आई स्थिति पर एसडीएम जेपी गुप्ता ने नाराजगी जताई। उन्होंने छात्रावास की व्यवस्थाओं, विद्यार्थियों की उपस्थिति और रिकॉर्ड की स्थिति को गंभीरता से लिया। बताया गया है कि अधीक्षक की गैरमौजूदगी और रिकॉर्ड की तत्काल जांच नहीं हो पाने के संबंध में कलेक्टर शिवपुरी को रिपोर्ट भेजी जाएगी। अब इस रिपोर्ट के आधार पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर नजर रहेगी।
पोहरी जनपद सीईओ भी रहे मौजूद
निरीक्षण के दौरान पोहरी जनपद पंचायत के सीईओ ऑफिसर सिंह गुर्जर भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने छात्रावास की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और वहां मौजूद विद्यार्थियों से भी स्थिति की जानकारी लेने का प्रयास किया।
निरीक्षण में मुख्य रूप से छात्रों की उपस्थिति, छात्रावास संचालन और रिकॉर्ड की स्थिति पर ध्यान दिया गया।
अब होगी जिम्मेदारी तय?
औचक निरीक्षण के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि छात्रावास में अधीक्षक की गैरमौजूदगी के दौरान व्यवस्था किस तरह चल रही थी और यदि कई दिनों से अधीक्षक नहीं आ रहे थे तो इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को क्यों नहीं दी गई?
दूसरा बड़ा सवाल छात्रों की उपस्थिति और आवागमन के रिकॉर्ड को लेकर है। छात्रावास में केवल छह छात्रों का मिलना अपने आप में जांच का विषय है। प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश करेगा कि बाकी छात्र छुट्टी पर हैं, घर गए हैं या किसी अन्य कारण से छात्रावास में मौजूद नहीं थे।
वहीं चाबियां अधीक्षक के पास होने के कारण रिकॉर्ड की तत्काल जांच नहीं हो पाना भी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
कलेक्टर की रिपोर्ट के बाद तस्वीर होगी साफ
फिलहाल एसडीएम के निरीक्षण के बाद पूरे मामले की रिपोर्ट कलेक्टर अर्पित वर्मा को भेजे जाने की बात सामने आई है। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अधीक्षक की अनुपस्थिति को लेकर क्या कार्रवाई की जाती है और छात्रावास में विद्यार्थियों की उपस्थिति एवं रिकॉर्ड की जांच किस स्तर पर होगी।
भटनावर के इस छात्रावास में हुए औचक निरीक्षण ने सरकारी छात्रावासों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन की रिपोर्ट के बाद जिम्मेदारी तय होती है या नहीं और छात्रावास की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।