खुशबू शर्मा खबर:शिवपुरी जिले में अवैध शराब के निर्माण, परिवहन, भंडारण और बिक्री पर शिकंजा कसने के लिए प्रशासन ने अब निगरानी का दायरा और बढ़ा दिया है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री अर्पित वर्मा के निर्देश पर आबकारी विभाग द्वारा अभियान चलाकर कार्रवाई की जा रही है। वहीं अवैध मदिरा के खिलाफ प्रभावी सूचना तंत्र तैयार करने के लिए आबकारी विभाग ने नियंत्रण कक्ष गठित करते हुए अलग-अलग क्षेत्रों के अधिकारियों के मोबाइल नंबर भी सार्वजनिक किए हैं।
प्रशासन का फोकस अब केवल आबकारी विभाग तक सीमित नहीं रहेगा। जिले में तैनात विभिन्न विभागों के मैदानी कर्मचारियों को भी संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और अवैध शराब से संबंधित जानकारी तत्काल संबंधित पुलिस थाना या प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। इससे गांवों और कस्बों में अवैध शराब के निर्माण और बिक्री पर निगरानी मजबूत होने की उम्मीद है
कलेक्टर के निर्देश पर बढ़ाई गई निगरानी
मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 के तहत अवैध रूप से मदिरा का निर्माण, परिवहन, कब्जा अथवा विक्रय करना दंडनीय अपराध है। इसी को देखते हुए कलेक्टर अर्पित वर्मा के निर्देशानुसार आबकारी विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है। प्रशासन की कोशिश है कि अवैध शराब से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी कार्रवाई के बाद नहीं, बल्कि समय रहते अधिकारियों तक पहुंचे। इसके लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सरकारी अमले को सूचना तंत्र का हिस्सा बनाया जा रहा है।
पटवारी और राजस्व निरीक्षक भी रखेंगे नजर
प्रशासन द्वारा पटवारी और राजस्व निरीक्षकों को विशेष रूप से निर्देशित किया गया है कि यदि उनके क्षेत्र में अवैध मदिरा के निर्माण, भंडारण या बिक्री की जानकारी सामने आती है तो वे बिना देरी किए संबंधित पुलिस थाने के थाना प्रभारी को सूचना दें।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि किसी गांव या क्षेत्र में अवैध शराब से जुड़ी गतिविधि की जानकारी सामने आने के बाद कार्रवाई में अनावश्यक देरी न हो। सूचना मिलने पर संबंधित विभाग और पुलिस अपने स्तर पर आवश्यक कार्रवाई कर सकेंगे।
आंगनवाड़ी-आशा कार्यकर्ताओं से लेकर नगर पालिका अमला भी अलर्ट
अवैध शराब के खिलाफ निगरानी व्यवस्था को गांव से लेकर शहर तक मजबूत करने के लिए स्थानीय स्तर पर तैनात अन्य शासकीय सेवकों को भी निर्देशित किया गया है।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता, नगरीय निकाय के कर्मचारी और वार्ड प्रभारी अपने-अपने कार्यक्षेत्र में अवैध शराब के निर्माण, परिवहन, कब्जे या बिक्री से संबंधित जानकारी मिलने पर उसे संबंधित मजिस्ट्रेट या थाना प्रभारी तक पहुंचाएंगे।
इस व्यवस्था से उन इलाकों में भी सूचना तंत्र मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है जहां आबकारी विभाग का अमला हर समय मौजूद नहीं रहता। स्थानीय स्तर पर काम करने वाले कर्मचारी अपने क्षेत्र से जुड़े होने के कारण संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी प्रशासन तक तेजी से पहुंचा सकते हैं।
अप्रिय स्थिति रोकने पर भी जोर
प्रशासन का उद्देश्य केवल अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई करना ही नहीं, बल्कि समय रहते ऐसी गतिविधियों की जानकारी प्राप्त कर किसी भी संभावित अप्रिय स्थिति को रोकना भी है।
अवैध शराब का निर्माण और बिक्री कई बार कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों का कारण बन सकती है। ऐसे में प्रशासन द्वारा सूचना तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना संबंधित अधिकारियों तक तत्काल पहुंचे और समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
आबकारी विभाग ने बनाया कंट्रोल रूम
आमजन को अवैध शराब के संबंध में शिकायत या सूचना देने के लिए आबकारी विभाग द्वारा नियंत्रण कक्ष और वृत्तवार अधिकारियों के मोबाइल नंबर जारी किए गए हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि यदि उनके क्षेत्र में अवैध शराब का निर्माण, परिवहन, भंडारण या बिक्री हो रही है तो इसकी सूचना संबंधित नंबरों पर दी जा सकती है।
📞 इन नंबरों पर दें अवैध शराब की सूचना
आबकारी नियंत्रण कक्ष प्रभारी: 9993963103
आबकारी वृत्त शिवपुरी/पिछोर: 9993963103
आबकारी वृत्त करैरा: 9300809126
आबकारी वृत्त पोहरी: 7879278698
आबकारी वृत्त कोलारस: 8435675150
आमजन इन नंबरों पर अवैध शराब से जुड़ी जानकारी या शिकायत प्रशासन तक पहुंचा सकते हैं।
सूचना छिपाने के बजाय प्रशासन तक पहुंचाने की अपील
प्रशासन की इस नई व्यवस्था में आमजन की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि किसी क्षेत्र में खुले तौर पर अवैध शराब बेची जा रही है, शराब का अवैध निर्माण किया जा रहा है अथवा उसका परिवहन किया जा रहा है तो लोग इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को दे सकते हैं।
जिला आबकारी अधिकारी द्वारा विभिन्न विभागों के अधिकारियों को पत्र लिखकर अपने-अपने मैदानी अमले को इस संबंध में निर्देशित करने के लिए कहा गया है।
कुल मिलाकर कलेक्टर अर्पित वर्मा के निर्देश पर शिवपुरी जिले में अवैध शराब के खिलाफ निगरानी का दायरा अब आबकारी विभाग से निकलकर गांव-गांव और वार्ड-वार्ड तक पहुंचाने की तैयारी है।
प्रशासन की इस व्यवस्था में मैदानी कर्मचारियों के साथ आमजन भी महत्वपूर्ण कड़ी होंगे। अब सूचना मिलते ही पुलिस और आबकारी विभाग तक मामला पहुंचाने और समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर रहेगा।