जेल में बंद हैं:अधिकारों से वंचित नहीं:बंदियों को कानून की बारीकियां समझाईं

Nikk Pandit
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सर्किल जेल शिवपुरी में विधिक साक्षरता शिविर आयोजित, निःशुल्क कानूनी सहायता से लेकर अपील प्रक्रिया तक दी गई जानकारी

खुशबू शर्मा खबर:शिवपुरी जेल की चारदीवारी के भीतर रह रहे बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों और न्याय पाने के उपलब्ध रास्तों की जानकारी देने के उद्देश्य से गुरुवार को सर्किल जेल शिवपुरी में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में बंदियों को स्पष्ट रूप से बताया गया कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने या कानूनी जानकारी के अभाव में कोई भी व्यक्ति न्याय से वंचित नहीं रहना चाहिए। बंदियों को निःशुल्क विधिक सहायता, कानूनी सलाह और विभिन्न विधिक योजनाओं की जानकारी दी गई।

यह विधिक साक्षरता शिविर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के आदेशानुसार तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण शिवपुरी श्री राजेन्द्र प्रसाद सोनी के निर्देश पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण शिवपुरी की सचिव श्रीमती रंजना चतुर्वेदी ने की।

बंदियों को बताए उनके कानूनी अधिकार

शिविर के दौरान बंदियों को उनके संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। उन्हें समझाया गया कि यदि किसी बंदी को अपने मुकदमे की पैरवी के लिए अधिवक्ता उपलब्ध नहीं है अथवा वह अधिवक्ता का खर्च वहन करने की स्थिति में नहीं है, तो वह निःशुल्क विधिक सहायता प्राप्त कर सकता है।

इसके साथ ही बंदियों को विधिक सलाह प्राप्त करने की प्रक्रिया और जेल के अंदर संचालित जेल लीगल एड क्लीनिक की कार्यप्रणाली के बारे में भी बताया गया। अधिकारियों ने बंदियों को यह जानकारी दी कि कानूनी समस्या होने पर वे विधिक सहायता तंत्र के माध्यम से अपनी समस्या संबंधित अधिकारियों तक पहुंचा सकते हैं।

जेल अपील प्रक्रिया की भी दी जानकारी

शिविर में बंदियों को जेल अपील प्रक्रिया के संबंध में भी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि न्यायालय के निर्णय के बाद कानून में उपलब्ध प्रावधानों के अनुसार अपील की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। बंदियों को यह भी समझाया गया कि किसी भी कानूनी प्रक्रिया को लेकर भ्रम या जानकारी का अभाव हो तो वे विधिक सेवा प्राधिकरण से सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

इसके अलावा यूटीआरसी तथा नालसा की स्पृहा योजना के संबंध में भी बंदियों को विस्तार से जानकारी प्रदान की गई। इन योजनाओं और व्यवस्थाओं का उद्देश्य जरूरतमंद बंदियों को उचित कानूनी सहायता उपलब्ध कराना और उनके मामलों में विधिक प्रक्रिया को समझने में मदद करना है।

‘कानून की जानकारी के अभाव में न्याय से वंचित न रहें’

विधिक साक्षरता शिविर का मुख्य उद्देश्य यही रहा कि जेल में निरुद्ध कोई भी व्यक्ति केवल कानूनी जानकारी के अभाव में अपने अधिकारों से वंचित न रहे। शिविर के दौरान बंदियों को सरल भाषा में उनकी समस्याओं और उनसे जुड़े कानूनी विकल्पों की जानकारी दी गई।

विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से यह संदेश भी दिया गया कि कानून सभी के लिए है और जरूरतमंद व्यक्ति को कानून के तहत उपलब्ध सहायता प्राप्त करने का अधिकार है। बंदियों को अपनी कानूनी समस्याओं के संबंध में विधिक सहायता तंत्र का उपयोग करने के लिए जागरूक किया गया।

शिविर के बाद जेल का किया गहन निरीक्षण

विधिक साक्षरता शिविर समाप्त होने के बाद जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती रंजना चतुर्वेदी ने सर्किल जेल शिवपुरी का गहन निरीक्षण भी किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने जेल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और वहां निरुद्ध बंदियों से सीधे बातचीत की।

उन्होंने बंदियों से उनकी व्यक्तिगत एवं विधिक समस्याओं के बारे में जानकारी ली। कई बंदियों ने अपनी समस्याएं और आवश्यकताएं उनके सामने रखीं। सचिव ने बंदियों की बातों को गंभीरता से सुना और संबंधित मामलों में आवश्यक कार्रवाई के लिए मौके पर मौजूद जेल प्रशासन को दिशा-निर्देश दिए।

समस्याओं के त्वरित निराकरण के निर्देश

निरीक्षण के दौरान बंदियों द्वारा बताई गई समस्याओं के समयबद्ध और त्वरित निराकरण पर विशेष जोर दिया गया। श्रीमती रंजना चतुर्वेदी ने मौके पर उपस्थित जेलर श्री सिरोमणि पाण्डेय को बंदियों की समस्याओं पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि बंदियों को उपलब्ध कानूनी सहायता एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं का लाभ नियमानुसार प्राप्त हो और उनकी विधिक समस्याओं के समाधान के लिए उचित प्रक्रिया अपनाई जाए।

जेल प्रशासन और पैरालीगल वालंटियर रहे मौजूद

कार्यक्रम के दौरान सर्किल जेल शिवपुरी के जेलर श्री सिरोमणि पाण्डेय, जेल कर्मचारी, पैरालीगल वालंटियर श्री नीरू रावत सहित बड़ी संख्या में बंदी उपस्थित रहे।

विधिक साक्षरता शिविर के माध्यम से बंदियों को कानून, न्याय और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई। कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट रहा कि जेल में निरुद्ध होना किसी व्यक्ति को उसके कानूनी अधिकारों से वंचित नहीं करता। प्रत्येक जरूरतमंद बंदी को कानून के दायरे में उपलब्ध विधिक सहायता और न्यायिक प्रक्रिया की जानकारी मिलना जरूरी है।

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