सरकारी जमीन पर रातोंरात लगी महारानी अवंतीबाई की प्रतिमा:सुबह खुला राज

Nikk Pandit
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खुशबू शर्मा खबर:शिवपुरी जिले के पिछोर विधानसभा क्षेत्र में महापुरुषों और वीरांगनाओं की प्रतिमाएं स्थापित किए जाने को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। ताजा मामला ग्राम पंचायत खुरई के भितरगुआं और कालीपहाड़ी के बीच किचार खांद मंदिर के पास का है, जहां शुक्रवार रात अज्ञात लोगों द्वारा वीरांगना महारानी अवंतीबाई लोधी की अश्वारोही प्रतिमा स्थापित किए जाने की बात सामने आई है।

सुबह जब ग्रामीण खेतों की ओर पहुंचे तो सड़क किनारे प्रतिमा को हरे रंग के पर्दे से ढका हुआ और फूल-मालाओं से सजा देखा। कुछ ही देर में प्रतिमा स्थापित किए जाने की खबर आसपास के गांवों में फैल गई और मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जुटने लगी। सबसे बड़ा सवाल यही रहा कि आखिर रात के अंधेरे में प्रतिमा किसने स्थापित की और इसके लिए प्रशासन से अनुमति ली गई थी या नहीं?

स्थानीय स्तर पर यह दावा किया जा रहा है कि जिस स्थान पर प्रतिमा स्थापित की गई है, वह सरकारी जमीन है। हालांकि, जमीन के स्वामित्व और प्रतिमा स्थापना की अनुमति को लेकर प्रशासनिक स्तर से आधिकारिक स्थिति सामने आना अभी बाकी है। यदि जमीन सरकारी है और प्रतिमा बिना अनुमति स्थापित की गई है, तो मामला सीधे प्रशासनिक व्यवस्था और सार्वजनिक भूमि के उपयोग से जुड़ जाता है।

रातोंरात प्रतिमा, सुबह मचा हड़कंप

प्रतिमा स्थापित किए जाने का तरीका भी चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों के मुताबिक शुक्रवार रात तक यहां ऐसी कोई प्रतिमा दिखाई नहीं दे रही थी, लेकिन शनिवार सुबह अचानक अश्वारोही प्रतिमा स्थापित मिली।

प्रतिमा को हरे पर्दे से ढककर रखा गया था और उसके आसपास फूल-मालाएं भी नजर आईं। सुबह ग्रामीणों ने जब यह दृश्य देखा तो उन्होंने आसपास के लोगों को जानकारी दी। देखते ही देखते मौके पर लोगों की आवाजाही बढ़ गई।

अब ग्रामीणों के बीच यह चर्चा तेज है कि इतनी बड़ी प्रतिमा को रात के समय बिना किसी की जानकारी के किस तरह स्थापित कर दिया गया? क्या इसके लिए पंचायत, राजस्व विभाग या अन्य संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से अनुमति ली गई थी? यदि अनुमति नहीं ली गई, तो जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होगी?

पिछोर में पहले भी सामने आते रहे हैं ऐसे मामले
यह पहला मौका नहीं है जब पिछोर विधानसभा क्षेत्र में रातोंरात प्रतिमा स्थापित किए जाने का मामला सामने आया हो। करीब 20 से 25 दिन पहले भी क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर इसी तरह प्रतिमाएं स्थापित किए जाने की खबरें सामने आई थीं।

खोड़ चौकी क्षेत्र के बूधौन गांव में भी महारानी अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा लगाए जाने का मामला सामने आया था। वहीं मायापुर थाना क्षेत्र के पड़ौरा गांव में रानी अवंतीबाई का छायाचित्र लगाकर लोहे की फ्रेम और पक्के फाउंडेशन का निर्माण किए जाने की बात सामने आई थी।

उस समय भी प्रतिमा और निर्माण को लेकर अनुमति का सवाल चर्चा में रहा था। खास बात यह थी कि उस दौरान रानी अवंतीबाई लोधी की जयंती भी नजदीक थी। ऐसे में प्रतिमाओं की स्थापना को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया था।

प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल—किसकी अनुमति से लगी प्रतिमा?

महापुरुषों और ऐतिहासिक व्यक्तित्वों की प्रतिमा  स्थापित करना भावनाओं और सम्मान से जुड़ा विषय है, लेकिन सार्वजनिक अथवा सरकारी भूमि पर किसी स्थायी संरचना के निर्माण को लेकर प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन किया जाना भी जरूरी माना जाता है।

ऐसे में मौजूदा मामले में प्रशासन के सामने कई सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या प्रतिमा लगाने के लिए अनुमति ली गई थी? जमीन किस विभाग के नाम दर्ज है? प्रतिमा स्थापित करने वाले लोग कौन हैं? निर्माण के लिए किससे स्वीकृति ली गई?

इन सवालों के जवाब सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

अहिल्याबाई की प्रतिमा खंडित होने का मामला भी रहा चर्चा में

पिछोर विधानसभा क्षेत्र में प्रतिमा से जुड़ा विवाद इससे पहले भी सामने आ चुका है। खनियाधाना थाना क्षेत्र में सांदीपनि स्कूल के पास लगी लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा को नुकसान पहुंचाए जाने का मामला सामने आया था।

स्थानीय निवासी शोभाराम पाल के अनुसार, पाल समाज के लोगों ने करीब दो साल पहले चंदा एकत्रित कर प्रतिमा स्थापित की थी। इसके बाद 30 मई 2025 की रात प्रतिमा को नुकसान पहुंचाए जाने की बात सामने आई थी। बाद में प्रतिमा के हाथ में मौजूद शिवलिंग और तलवार भी टूटी हुई मिलने की जानकारी सामने आई थी।
इस घटना के बाद पाल समाज में नाराजगी देखने को मिली थी और प्रतिमा की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे थे।

अब प्रशासन की जांच पर टिकी नजर

महारानी अवंतीबाई की नई प्रतिमा सामने आने के बाद अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। यदि प्रतिमा बिना अनुमति लगाई गई है तो प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश कर सकता है कि इसे किसने स्थापित किया और जमीन की वास्तविक स्थिति क्या है।

वहीं, यदि प्रतिमा स्थापना के लिए नियमानुसार अनुमति ली गई है तो संबंधित दस्तावेज सामने आने के बाद विवाद की स्थिति भी साफ हो सकती है।

फिलहाल रातोंरात प्रतिमा स्थापित किए जाने का मामला पिछोर क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। एक ओर वीरांगना महारानी अवंतीबाई लोधी के प्रति लोगों की आस्था और सम्मान है, तो दूसरी ओर सरकारी अथवा सार्वजनिक जमीन पर बिना अनुमति निर्माण किए जाने के आरोप ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले की जांच कर जमीन, अनुमति और प्रतिमा स्थापना से जुड़े तथ्यों को कितनी जल्दी सार्वजनिक करता है और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई की जाती है।
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