नगर पालिका ने जारी किया अंतिम नोटिस;कब्जा नहीं हटाया तो बलपूर्वक बेदखली और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

Nikk Pandit
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खुशबू शर्मा शिवपुरी:आगरा-बॉम्बे रोड स्थित बेशकीमती सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराने के मामले में शिवपुरी नगर पालिका परिषद ने अब सख्त रुख अपनाया है। नगर पालिका ने मैसर्स जय भारत ऑटोमोबाइल्स, भागीदार राजेंद्र कुमार सांखला व अन्य को अंतिम नोटिस जारी करते हुए 10 दिन के भीतर जमीन खाली कर शांतिपूर्ण कब्जा नगर पालिका को सौंपने के निर्देश दिए हैं।

नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि निर्धारित अवधि में जमीन खाली नहीं की गई तो नगर पालिका प्रशासन बिना किसी पूर्व सूचना के बलपूर्वक बेदखली की कार्रवाई कर सकता है। इसके साथ ही नियमानुसार कानूनी कार्रवाई, हर्जाना और कार्रवाई में होने वाले खर्च की वसूली की बात भी कही गई है।

1960 की लीज से शुरू हुआ विवाद

यह मामला करीब 66 साल पुराने लीज विवाद से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक नगर पालिका परिषद ने 23 जुलाई 1960 को चार ब्लॉक की जमीन 25 वर्ष की लीज पर दी थी। लीज अवधि समाप्त होने के बाद भी संबंधित भूमि पर कब्जा बने रहने को लेकर विवाद चला आ रहा था।

समय बीतने के साथ यह जमीन शहर की प्रमुख और बेशकीमती सरकारी जमीनों में शामिल हो गई। नगर पालिका की ओर से जमीन को वापस लेने की कवायद समय-समय पर की जाती रही, लेकिन मामला न्यायालय तक पहुंचने के कारण कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी।

हाई कोर्ट में फर्म का दावा खारिज

मामले में कानूनी लड़ाई भी लंबे समय तक चली।
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने 1 सितंबर 2026 को द्वितीय अपील क्रमांक 18/2003 में फर्म के दावे खारिज कर दिए।

अदालती निर्णय के बाद नगर पालिका के लिए जमीन का कब्जा वापस लेने की कार्रवाई का रास्ता साफ हुआ। इसके बाद मुख्य नगर पालिका अधिकारी की ओर से संबंधित पक्ष को अंतिम सूचना जारी की गई।

नोटिस में निर्धारित समय के भीतर जमीन खाली कर उसका शांतिपूर्ण कब्जा नगर पालिका को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

10 दिन बाद क्या होगा?

अब इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि 10 दिन की नोटिस अवधि पूरी होने के बाद जमीन का वास्तविक कब्जा नगर पालिका कैसे लेती है।

नगर पालिका ने अपने नोटिस में साफ किया है कि यदि संबंधित पक्ष निर्धारित अवधि में जमीन खाली नहीं करता है तो प्रशासन को बलपूर्वक बेदखली की कार्रवाई करनी पड़ सकती है। साथ ही कानूनी कार्रवाई और अन्य खर्च की वसूली की चेतावनी भी दी गई है।

यानी अब मामला केवल नोटिस जारी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि नगर पालिका के सामने अगली चुनौती जमीन को वास्तविक रूप से अपने कब्जे में लेने की है।
गांधी पेट्रोल पंप मामले के बाद तेज हुई कार्रवाई
इस जमीन से जुड़े मामले को लेकर शिवपुरी फर्स्ट ने 16 सितंबर को गांधी पेट्रोल पंप हटाने संबंधी हाई कोर्ट के आदेश से जुड़ी खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी।
 

इसके बाद नगर पालिका की कार्रवाई एक बार फिर चर्चा में आई है।

नगर पालिका की ओर से जारी अंतिम नोटिस को सरकारी जमीनों पर लंबे समय से चले आ रहे कब्जों के खिलाफ सख्त रुख के तौर पर देखा जा रहा है।

कीमती सरकारी जमीनों से कब्जे हटाने के निर्देश
प्रशासनिक स्तर पर जिले की बेशकीमती सरकारी जमीनों से कब्जे हटाने की कवायद भी तेज होने की बात सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की दिशा में आयोजित बैठक में जिले की कीमती सरकारी जमीनों से कब्जे हटाने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए थे।

इसी पृष्ठभूमि में आगरा-बॉम्बे रोड की इस जमीन को लेकर नगर पालिका की कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

सीएमओ की कार्रवाई पर अब नजर

नगर पालिका द्वारा जारी नोटिस में 10 दिन की समयसीमा तय की गई है। इस अवधि में संबंधित पक्ष जमीन खाली करता है या कानूनी स्तर पर कोई अन्य कदम उठाता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

यदि नोटिस की अवधि समाप्त होने के बाद भी जमीन खाली नहीं की जाती है, तो नगर पालिका प्रशासन को आगे की कार्रवाई करनी होगी। ऐसे में अब नजर इस बात पर है कि 66 साल पुराने लीज विवाद के बाद करोड़ों की बताई जा रही इस सरकारी जमीन का कब्जा नगर पालिका वास्तव में कब और किस प्रक्रिया से अपने हाथ में लेती है।
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