खुशबू शर्मा खबर:शिवपुरी नेशनल लोक अदालत के अवसर पर ‘उल्लास—एक अभिनव प्रयोग’ कार्यक्रम के अंतर्गत शनिवार को जिला न्यायालय परिसर शिवपुरी में स्वास्थ्य परीक्षण एवं रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का आयोजन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री राजेन्द्र प्रसाद सोनी के निर्देशन में किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य न्यायिक सेवा से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों और अधिवक्ताओं के स्वास्थ्य की नियमित देखभाल के साथ उन्हें स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना रहा।
शिविर के दौरान जिला न्यायालय परिसर में न्यायिक अधिकारियों, न्यायालयीन कर्मचारियों और अधिवक्ताओं ने स्वास्थ्य परीक्षण कराया। विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने उपस्थित लोगों की जांच कर आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श दिया। जरूरत के अनुसार निशुल्क दवाइयों का वितरण भी किया गया। वहीं रक्तदान शिविर के माध्यम से लोगों को रक्तदान के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया।
प्रधान जिला न्यायाधीश ने फीता काटकर किया शुभारंभ
स्वास्थ्य परीक्षण एवं रक्तदान शिविर का औपचारिक शुभारंभ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री राजेन्द्र प्रसाद सोनी ने फीता काटकर किया। शुभारंभ के बाद उन्होंने शिविर में उपलब्ध चिकित्सा व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और चिकित्सकों से जांच एवं परामर्श की प्रक्रिया की जानकारी ली।
इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती रंजना चतुर्वेदी तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय ऋषिश्वर की अगवानी में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम मौजूद रही। टीम ने न्यायिक अधिकारियों, न्यायालयीन कर्मचारियों और अधिवक्ताओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया। जांच के दौरान चिकित्सकों ने आवश्यकतानुसार स्वास्थ्य संबंधी सलाह दी। जिन लोगों को दवाइयों की आवश्यकता थी, उन्हें निशुल्क दवाइयां उपलब्ध कराई गईं।
‘स्वास्थ्य ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी’
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री राजेन्द्र प्रसाद सोनी ने स्वास्थ्य के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि न्यायालयीन कार्यों की व्यस्तता के कारण कई बार अधिकारी, कर्मचारी और अधिवक्ता अपने स्वास्थ्य पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाते हैं। ऐसे में समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। व्यक्ति स्वस्थ रहेगा तभी वह अपने कार्य को पूरी ऊर्जा और बेहतर मनोयोग के साथ कर सकेगा।
प्रधान जिला न्यायाधीश ने बताया कि उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप न्यायालयीन कर्मचारियों और अधिवक्ताओं के ब्लड सैंपल लिए गए तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में उनकी जांच और स्वास्थ्य संबंधी परामर्श की व्यवस्था की गई।
उन्होंने कहा कि न्यायिक व्यवस्था से जुड़े लोगों पर कार्य का महत्वपूर्ण दायित्व होता है। लगातार न्यायालयीन कार्यों में व्यस्त रहने के कारण स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। इस तरह के शिविर लोगों को अपने स्वास्थ्य की नियमित जांच कराने के लिए प्रेरित करते हैं।
लोक अदालत बनी मामलों के निराकरण का सशक्त माध्यम
कार्यक्रम के दौरान प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने नेशनल लोक अदालत के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि लोक अदालत नागरिकों के लंबित मामलों के आपसी सहमति और सौहार्दपूर्ण वातावरण में निराकरण का प्रभावी माध्यम बन रही है।
उन्होंने कहा कि अब नागरिक कई प्रकार के विवादों के समाधान के लिए लोक अदालत का इंतजार करते हैं। इनमें चेक बाउंस, मोटर दुर्घटना, बिजली विभाग और फैमिली कोर्ट से जुड़े मामले भी शामिल हैं।
लोक अदालत की विशेषता यह है कि इसमें दोनों पक्षों की सहमति से विवाद का समाधान करने का प्रयास किया जाता है। इससे पक्षकारों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मनमुटाव को समाप्त करने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत में किसी एक पक्ष की हार या जीत नहीं होती, बल्कि आपसी सहमति से विवाद का समाधान किया जाता है।
विभिन्न विभागों ने लगाए स्टॉल
नेशनल लोक अदालत के अवसर पर जिला न्यायालय परिसर में विभिन्न विभागों की ओर से स्टॉल लगाए गए। इन स्टॉल के माध्यम से आमजन और पक्षकारों को संबंधित विभागों की सेवाओं एवं प्रकरणों के संबंध में जानकारी उपलब्ध कराई गई।
पक्षकारों की समस्याओं को सुनते हुए उनके मामलों के समाधान का प्रयास किया गया। लोक अदालत में लंबित मामलों के निराकरण के साथ-साथ लोगों को विवादों को आपसी सहमति से सुलझाने के लिए भी प्रेरित किया गया।
न्यायालय परिसर में विभिन्न विभागों के स्टॉल होने से लोगों को संबंधित अधिकारियों से सीधे बातचीत करने और अपनी समस्याएं रखने का अवसर मिला।
बड़ी संख्या में अधिवक्ता और कर्मचारी हुए शामिल
स्वास्थ्य शिविर में जिला न्यायालय के न्यायिक अधिकारीगण, न्यायालयीन कर्मचारी और बड़ी संख्या में अधिवक्ता शामिल हुए। अभिभाषक संघ के अध्यक्ष श्री विजय तिवारी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
इसके अलावा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय ऋषिश्वर, विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से जुड़े अधिकारी एवं कर्मचारी भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान प्रधान जिला न्यायाधीश ने स्वास्थ्य परीक्षण और चिकित्सा व्यवस्थाओं के लिए सीएमएचओ एवं चिकित्सकों की टीम का आभार व्यक्त किया।
न्याय और स्वास्थ्य—दोनों को लेकर संदेश
जिला न्यायालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में एक ओर जहां नेशनल लोक अदालत के माध्यम से लोगों के विवादों के निराकरण का प्रयास किया गया, वहीं दूसरी ओर न्यायिक व्यवस्था से जुड़े लोगों के स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता दी गई।
कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट रहा कि न्यायिक कार्यों की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी, कर्मचारी और अधिवक्ता स्वयं स्वस्थ रहेंगे, तभी वे बेहतर तरीके से अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे।
नेशनल लोक अदालत और ‘उल्लास—एक अभिनव प्रयोग’ के तहत आयोजित स्वास्थ्य परीक्षण एवं रक्तदान शिविर ने न्यायिक सेवा, स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया। वहीं विभिन्न विभागों के स्टॉल के माध्यम से आमजन और पक्षकारों को अपनी समस्याओं के समाधान का अवसर भी मिला।