शिवपुरी में अवैध शराब के खिलाफ महिलाओं का फूटा गुस्सा:थाना स्तर पर सुनवाई नहीं होने का आरोप एसपी कार्यालय पहुंचकर दिया धरना;बोलीं- शिकायतों पर कार्रवाई होती तो सड़क पर उतरने की नौबत नहीं आती

Nikk Pandit
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खुशबू शर्मा खबर:शिवपुरी अवैध शराब और नशे के कारोबार को लेकर शिवपुरी में एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए हैं। ग्राम कोटा और देहात थाना क्षेत्र की आदिवासी महिलाओं ने गुरुवार को सहरिया क्रांति के बैनर तले एसपी कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। हाथों में तख्तियां लेकर रैली के रूप में पहुंचीं महिलाओं ने कार्यालय के बाहर धरना दिया और क्षेत्र में कथित तौर पर चल रहे अवैध शराब एवं नशे के कारोबार पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान महिलाओं का सबसे बड़ा
सवाल स्थानीय थाना स्तर पर शिकायतों की सुनवाई और कार्रवाई को लेकर रहा। महिलाओं का आरोप है कि यदि उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुना जाता और समय रहते कार्रवाई होती तो उन्हें अपनी समस्या लेकर एसपी कार्यालय तक पहुंचकर प्रदर्शन करने की जरूरत नहीं पड़ती।

महिलाओं ने पुलिस अधीक्षक और प्रशासन से साफ कहा कि यह केवल शराब बेचने का मामला नहीं है, बल्कि इसका असर सीधे गरीब और आदिवासी परिवारों की जिंदगी पर पड़ रहा है।

थाना स्तर पर सुनवाई नहीं हुई तो एसपी कार्यालय पहुंचीं महिलाएं

ग्राम कोटा की महिलाओं ने आरोप लगाया कि उनके क्षेत्र में लंबे समय से अवैध शराब बिक्री की शिकायतें सामने आ रही हैं। महिलाओं के मुताबिक, उन्होंने स्थानीय स्तर पर समस्या को लेकर आवाज उठाई, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण मामला लगातार बढ़ता गया। इसके बाद महिलाओं ने संगठित होकर एसपी कार्यालय का रुख किया।

यह सवाल अब पुलिस अधिकारियों के सामने भी है कि यदि किसी क्षेत्र के लोग लगातार अवैध शराब और नशे की बिक्री की शिकायत कर रहे हैं तो स्थानीय थाना स्तर पर इन शिकायतों का निपटारा क्यों नहीं हो पा रहा है?

महिलाओं का कहना है कि पुलिस की जिम्मेदारी केवल शिकायत दर्ज करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि शिकायत की सत्यता की जांच कर अवैध गतिविधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई भी दिखाई देनी चाहिए।

बोलीं महिलाएं- कोटा में ठेका नहीं, फिर कहां से आ रही शराब?

प्रदर्शनकारी महिलाओं ने दावा किया कि ग्राम कोटा में कोई स्वीकृत शराब ठेका नहीं है, इसके बावजूद गांव और आसपास के क्षेत्र में शराब बिक्री के ठिकाने संचालित होने की शिकायत है।

महिलाओं का आरोप है कि यहां कथित तौर पर कच्ची शराब के साथ ठेके की शराब भी उपलब्ध कराई जा रही है। यदि यह शिकायत सही पाई जाती है तो यह जांच का गंभीर विषय है कि शराब आखिर कहां से आ रही है और इसे कौन लोग क्षेत्र में पहुंचा रहे हैं।

महिलाओं ने पुलिस से मांग की कि केवल छोटे स्तर पर शराब बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय शराब की सप्लाई चेन और मुख्य स्रोत तक पहुंचकर कार्रवाई की जाए।

शराब के साथ गांजा बिक्री का भी आरोप

प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने क्षेत्र में कथित तौर पर गांजा बिक्री का भी आरोप लगाया। रश्मी आदिवासी ने दावा किया कि कुछ स्थानों पर कच्ची शराब के साथ गांजा भी उपलब्ध कराया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग नशे का सामान उधार तक उपलब्ध कराते हैं और मजदूरी मिलने के बाद उसके पैसे वसूल किए जाते हैं। महिलाओं का कहना है कि यदि इस तरह की गतिविधियां चल रही हैं तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान गरीब और आदिवासी परिवारों को उठाना पड़ रहा है।

हालांकि गांजा बिक्री और अन्य आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। महिलाओं ने प्रशासन से इन शिकायतों की मौके पर जांच कराने की मांग की है।

मजदूरी की कमाई नशे में जा रही, परिवार हो रहे परेशान
महिलाओं ने अपनी शिकायत को केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं बताया, बल्कि इसे परिवारों की आर्थिक स्थिति से भी जोड़कर देखा।

उनका कहना है कि गरीब परिवारों में पुरुषों द्वारा शराब और अन्य नशीले पदार्थों पर मजदूरी की कमाई खर्च किए जाने से घर का खर्च प्रभावित होता है। इसके चलते परिवारों में आर्थिक संकट और विवाद की स्थिति पैदा होती है।

महिलाओं का कहना है कि शराब और नशा आसानी से उपलब्ध रहेगा तो इसे रोकना मुश्किल होगा। इसलिए प्रशासन को केवल कार्रवाई का दिखावा करने के बजाय अवैध शराब के ठिकानों की नियमित निगरानी और सप्लाई करने वालों पर कार्रवाई करनी चाहिए।

सवाल थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली पर भी

प्रदर्शन के दौरान महिलाओं की नाराजगी का एक बड़ा कारण स्थानीय थाना स्तर पर सुनवाई नहीं होने का आरोप रहा। महिलाओं के आरोपों ने थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं।

हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि थाना प्रभारी के खिलाफ लगाए गए आरोप फिलहाल प्रदर्शनकारी महिलाओं के आरोप हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

लेकिन एसपी और कलेक्टर के लिए यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जब ग्रामीण महिलाएं स्थानीय स्तर की शिकायत लेकर सीधे जिला मुख्यालय पहुंचकर धरना देने लगें, तो यह संकेत है कि नीचे के स्तर पर शिकायत निवारण व्यवस्था को लेकर लोगों में असंतोष है।

एसपी-कलेक्टर को समझना होगा जनता सड़क पर क्यों उतरती है

यह घटना पुलिस और प्रशासन के लिए एक बड़ा संदेश भी है। जनता आमतौर पर अपनी समस्या लेकर पहले स्थानीय स्तर पर ही जाती है। जब वहां उसे समाधान नहीं मिलता या कार्रवाई दिखाई नहीं देती, तभी मामला वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचता है।

ऐसे में एसपी और कलेक्टर को यह भी देखना होगा कि शिकायतकर्ता को जिला मुख्यालय तक आने की नौबत क्यों आई। अगर थाना स्तर पर समय पर शिकायत सुनी जाए, मौके पर जांच हो और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई हो, तो महिलाओं को धरना और प्रदर्शन करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। महिलाओं का प्रदर्शन इसी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता नजर आया।

शराब के स्रोत की जांच की मांग

महिलाओं ने पुलिस, आबकारी और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम बनाकर क्षेत्र में जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अवैध शराब के ठिकानों को चिह्नित कर बंद कराया जाए और संदिग्ध शराब के नमूने लेकर उनकी गुणवत्ता की जांच कराई जाए।

साथ ही महिलाओं ने मांग की कि शराब बेचने वालों के अलावा शराब की सप्लाई करने वाले लोगों और इसके पीछे के नेटवर्क की भी जांच की जाए। उन्होंने शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा और कार्रवाई के बाद क्षेत्र में नियमित निगरानी की मांग भी रखी।

एडिशनल एसपी ने लिया ज्ञापन

प्रदर्शन के बाद एडिशनल एसपी ने महिलाओं से ज्ञापन लिया और उनकी शिकायतों की जांच कर उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया। इसके बाद महिलाओं ने अपनी बात अधिकारियों के सामने रखी।

महिलाओं ने कहा कि वे कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहतीं। उनका कहना है कि वे चाहती हैं कि पुलिस और प्रशासन ही अवैध शराब एवं नशे के कारोबार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करे।

बड़ा सवाल यही है...

अगर शिकायतें पहले ही सुन ली जातीं, अवैध शराब के ठिकानों पर कार्रवाई होती और थाना स्तर पर महिलाओं को भरोसा मिलता, तो क्या उन्हें एसपी कार्यालय के सामने धरने पर बैठना पड़ता?

अब गेंद पुलिस और प्रशासन के पाले में है। एसपी और कलेक्टर को केवल ज्ञापन लेकर मामला खत्म करने के बजाय यह भी जांचना होगा कि स्थानीय स्तर पर शिकायतों पर पहले क्या कार्रवाई हुई, किस स्तर पर लापरवाही रही और कोटा क्षेत्र में कथित अवैध शराब एवं नशे की बिक्री की शिकायतों की वास्तविकता क्या है।

यदि शिकायत सही मिलती है तो कार्रवाई केवल छोटे विक्रेताओं तक सीमित न रहकर पूरे नेटवर्क और सप्लाई चैन तक पहुंचनी चाहिए। यही कार्रवाई उन महिलाओं के आरोपों और उनके आंदोलन का वास्तविक जवाब होगी।
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