खुशबू शर्मा खबर:शिवपुरी जिला मुख्यालय पर मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से बड़ी संख्या में फरियादी अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। किसी ने गांव में स्कूल भवन नहीं होने की समस्या उठाई, तो किसी ने प्रधानमंत्री आवास योजना और कुटीर योजना में नाम जोड़ने के नाम पर कथित रूप से पैसे लेने के आरोप लगाए। वहीं बीमा राशि नहीं मिलने और मूंगफली की बिक्री के बाद लाखों रुपए की बकाया राशि नहीं मिलने की शिकायत भी प्रशासन के सामने पहुंची।
जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर अर्पित वर्मा ने
फरियादियों की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को शिकायतों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए। इसी दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष जसवंत जाटव भी कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर से मुलाकात की।
कलेक्टर ने भाजपा जिलाध्यक्ष को केबिन में बुलाया
जनसुनवाई के दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष जसवंत जाटव कलेक्टर अर्पित वर्मा के पास पहुंचे। बताया गया कि कलेक्टर अपनी कुर्सी से उठे और भाजपा जिलाध्यक्ष को अपने साथ केबिन में ले गए। दोनों के बीच कुछ देर तक बातचीत हुई।
कुछ समय बाद कलेक्टर केबिन से बाहर आए और दोबारा जनसुनवाई में लोगों की समस्याएं सुनने लगे। इस दौरान अन्य अधिकारी भी अपने-अपने स्तर पर फरियादियों की शिकायतें सुनते रहे।
हालांकि कलेक्टर और भाजपा जिलाध्यक्ष के बीच केबिन में किन मुद्दों पर बातचीत हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में यह मुलाकात जनसुनवाई के दौरान चर्चा का विषय बनी रही।
चक्क गांव में स्कूल भवन नहीं, चौपाल में पढ़ रहे बच्चे
जनसुनवाई में ग्राम पंचायत दौरानी के चक्क गांव से पहुंचे ग्रामीणों ने सरकारी स्कूल भवन नहीं होने की समस्या उठाई। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में बच्चों की पढ़ाई पंचायत की चौपाल में कराई जा रही है।
ग्रामीणों के मुताबिक बारिश के मौसम में चौपाल में बच्चों और शिक्षकों को पढ़ाई कराने में परेशानी होती है। स्कूल के लिए पर्याप्त और सुरक्षित भवन नहीं होने के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की बात भी ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने रखी।
ग्रामीणों ने मांग की कि गांव की स्थिति का निरीक्षण कराकर जल्द से जल्द सरकारी स्कूल भवन का निर्माण कराया जाए, ताकि बच्चों को पढ़ाई के लिए उचित और सुरक्षित स्थान मिल सके।
आवास योजना में 1 से 2 हजार रुपए लेने का आरोप
ग्राम पंचायत इन्दर से आए ग्रामीणों ने जनसुनवाई में कुटीर और प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़ी शिकायत रखी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि योजनाओं में नाम जोड़ने के नाम पर कथित तौर पर 1 से 2 हजार रुपए तक की राशि मांगी जाती है।
ग्रामीणों ने इसके अलावा मनरेगा के काम में भी
अनियमितता का आरोप लगाया। उनका कहना था कि गांव में मनरेगा के काम मशीनों के माध्यम से कराए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि उनके जॉब कार्ड अपने पास रखे जा रहे हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने और यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। अब संबंधित विभाग की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
पति की मौत के बाद भी नहीं मिली बीमा राशि
पिछोर क्षेत्र से पहुंची रानी नाम की महिला ने प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना से जुड़ी शिकायत कलेक्टर के सामने रखी। महिला ने बताया कि उसके पति की मृत्यु के बाद उसे बीमा योजना के तहत मिलने वाली राशि अब तक प्राप्त नहीं हुई है।
रानी के अनुसार, बीमा पॉलिसी में उसे नॉमिनी बनाए जाने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में उसका नाम नॉमिनी के रूप में दर्ज होने से इनकार किया गया। महिला ने प्रशासन से मामले की जांच कराने और पात्रता होने पर उसे बीमा की राशि दिलाने की मांग की।
महिला का कहना था कि पति की मृत्यु के बाद परिवार आर्थिक परेशानी से गुजर रहा है। ऐसे में यदि वह योजना की पात्र है तो उसे नियमानुसार बीमा राशि दिलाई जाए।
मूंगफली बेचने के बाद 1.94 लाख रुपए बकाया
जनसुनवाई में हिम्मतपुर निवासी कृष्णा लोधी भी अपनी शिकायत लेकर पहुंचीं। उन्होंने मूंगफली की बिक्री के बाद बकाया 1 लाख 94 हजार 433 रुपए दिलाने की मांग की।
महिला का आरोप है कि मूंगफली बेचने के बाद संबंधित राशि का भुगतान नहीं किया गया। जब उसने अपने पैसे मांगे तो कथित तौर पर उसे धमकाया गया। महिला के मुताबिक, वह इस मामले को लेकर कई बार शिकायत कर चुकी है, लेकिन अभी तक उसे राहत नहीं मिली।
कृष्णा लोधी ने प्रशासन से मांग की कि मामले की जांच कर उसकी बकाया राशि दिलाई जाए और यदि धमकी देने के आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए।
शिकायतों पर जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई
मंगलवार की जनसुनवाई में सामने आई शिकायतों से यह स्पष्ट है कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, सरकारी योजनाओं, बीमा और भुगतान से जुड़े कई मामले अभी भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं।
हालांकि जनसुनवाई में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। प्रशासन के सामने अब चुनौती यह है कि शिकायतों को केवल आवेदन तक सीमित न रखते हुए संबंधित विभागों से उनकी निष्पक्ष जांच कराई जाए और पात्र लोगों को समय पर राहत मिले।
जनसुनवाई का उद्देश्य भी यही है कि आम लोगों की समस्याएं सीधे प्रशासन तक पहुंचें और उनका नियमानुसार समाधान हो। अब देखना होगा कि मंगलवार को मिली इन शिकायतों पर प्रशासन की जांच कितनी तेजी से आगे बढ़ती है और फरियादियों को कब तक राहत मिलती है।