भौंती और मायापुर पुलिस ने तीन लोगों पर दर्ज की FIR:साइबर ठगी में इस्तेमाल सिम की जांच में खुलासा

Nikk Pandit
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खुशबू शर्मा खबर:शिवपुरी जिले में साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने और साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले फर्जी एवं संदिग्ध सिम कार्ड के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। ऑपरेशन फास्ट 2.0 के तहत राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय भोपाल के निर्देश पर शिवपुरी जिले में संदिग्ध मोबाइल नंबरों, सिम धारकों और सिम जारी करने वाले एजेंटों की जांच की जा रही है। इसी जांच के दौरान भौंती और मायापुर थाना पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ अलग-अलग प्रकरण दर्ज किए हैं।

पुलिस की जांच में सामने आया कि कुछ मोबाइल सिम ऐसे लोगों के नाम पर जारी किए गए थे, जिनका कथित तौर पर संबंधित सिम से कोई लेना-देना नहीं था। वहीं कुछ सिम का इस्तेमाल साइबर अपराधों में किए जाने की जानकारी सामने आई। जांच के आधार पर पुलिस ने सिम धारकों और सिम जारी करने की प्रक्रिया में कथित अनियमितता सामने आने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है।

पुलिस अधिकारी बनकर 12,520 रुपए की ठगी
भौंती थाना पुलिस को साइबर पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन ठगी की शिकायत प्राप्त हुई थी। राजस्थान के डीडवाना-कुचामन सिटी निवासी किशनलाल पुत्र मदनलाल ने शिकायत में बताया कि उन्हें दो अलग-अलग मोबाइल नंबरों से फोन आया था।

शिकायत के अनुसार, कॉल करने वाले व्यक्तियों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया और किशनलाल को एफआईआर दर्ज होने का डर दिखाया। कथित तौर पर इसी दबाव में लेकर उनसे 12,520 रुपए एक फीनो पेमेंट्स बैंक खाते में ट्रांसफर करा लिए गए।

ठगी का अहसास होने के बाद पीड़ित ने साइबर
 हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने शिकायत में सामने आए मोबाइल नंबरों की तकनीकी जांच शुरू की।

जांच में सामने आए दो सिम धारकों के नाम

पुलिस जांच में ठगी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर 7067915249 और 6267266154 के सिम धारकों के रूप में ग्राम महोबा डामरौन निवासी राहुल जाटव पुत्र तुलाराम जाटव और भानुप्रताप जाटव पुत्र प्रभुदयाल जाटव के नाम सामने आए।

इसके बाद भौंती थाना पुलिस ने दोनों के खिलाफ अलग-अलग प्रकरण दर्ज किए। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 318(4), 319(2) बीएनएस तथा धारा 66(D) आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि संबंधित सिम कार्ड किस परिस्थिति में जारी हुए, इनका वास्तविक उपयोग किसने किया और साइबर ठगी की घटना में इन मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किस तरह किया गया।
मायापुर में सिम जारी करने वाले एजेंट पर कार्रवाई
इसी अभियान के तहत मायापुर थाना पुलिस ने सिम जारी करने की प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के मामले में एयरटेल स्टोर मायापुर के एजेंट पवन कुमार लोधी के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है।

पुलिस को जांच के दौरान एक एक्सेल शीट प्राप्त हुई थी, जिसमें POS कोड 8085309715 के तहत पवन कुमार लोधी द्वारा जारी की गई एक सिम साइबर फ्रॉड से जुड़ी मिली।

जांच में संबंधित सिम नंबर 7898219481 ग्राम पड़ोरा निवासी रेखा पत्नी हल्के आदिवासी के नाम पर दर्ज पाया गया। पुलिस ने जब रेखा से पूछताछ की तो उनके द्वारा बताया गया कि उन्होंने यह सिम कभी खरीदी ही नहीं थी। परिवार के किसी सदस्य द्वारा भी उक्त सिम का इस्तेमाल किए जाने से उन्होंने इनकार किया।

दस्तावेज लेकर दूसरे व्यक्ति को सिम देने का आरोप
मायापुर पुलिस ने सिम जारी करने की प्रक्रिया और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच की। पुलिस के अनुसार, प्रथम दृष्टया जांच में यह बात सामने आई कि एजेंट पवन कुमार लोधी ने ग्राहक के दस्तावेज लेकर उसके नाम से सिम एक्टिवेट की और कथित तौर पर उसे किसी दूसरे व्यक्ति को दे दिया।

बाद में इसी सिम का इस्तेमाल साइबर अपराध में किए जाने की बात जांच में सामने आई। पुलिस के मुताबिक संबंधित सिम से कुल 13,040 रुपए की धोखाधड़ी सामने आई है।

इस मामले में मायापुर थाना पुलिस ने पवन कुमार लोधी के खिलाफ धारा 318(4) बीएनएस, धारा 66(C) आईटी एक्ट तथा दूरसंचार अधिनियम 2023 की धारा 42(3)(E) और 42(6) के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।

फर्जी सिम साइबर अपराधियों के लिए बड़ा हथियार
साइबर ठगी के मामलों में मोबाइल नंबर और सिम कार्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अपराधी अक्सर फर्जी दस्तावेजों, दूसरे लोगों के नाम पर जारी सिम या गलत तरीके से एक्टिवेट किए गए मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कर ठगी की घटनाओं को अंजाम देते हैं।

ऐसे मामलों में असली सिम धारक को कई बार यह
जानकारी तक नहीं होती कि उसके नाम से कोई मोबाइल नंबर एक्टिवेट है और उसका इस्तेमाल किसी अपराध में किया जा रहा है। यही वजह है कि पुलिस अब साइबर ठगी के मामलों की जांच के साथ-साथ सिम जारी करने की पूरी प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेजों की भी जांच कर रही है।

ऑपरेशन फास्ट 2.0 से बढ़ी निगरानी

ऑपरेशन फास्ट 2.0 के तहत की जा रही कार्रवाई का उद्देश्य साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले संदिग्ध मोबाइल नंबरों और फर्जी सिम नेटवर्क तक पहुंचना है। शिवपुरी जिले में हुई ताजा कार्रवाई में तीन लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज होने के बाद पुलिस अब आगे की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

भौंती और मायापुर पुलिस द्वारा दर्ज किए गए मामलों में यह भी जांच का विषय रहेगा कि संबंधित सिम का वास्तविक इस्तेमाल किसने किया और इसके पीछे कोई संगठित साइबर ठगी का नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है।

फिलहाल पुलिस ने दोनों थाना क्षेत्रों में प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। जांच आगे बढ़ने के साथ साइबर ठगी में इस्तेमाल मोबाइल नंबरों, सिम कार्ड, बैंक खातों और उनसे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आने की संभावना है।
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