खुशबू शर्मा खबर:शिवपुरी/नरवर/देश की सेवा में अपना जीवन समर्पित करने वाले शिवपुरी जिले के नरवर क्षेत्र के सड़खड़पुर गांव निवासी आर्मी हवलदार राजेश यादव को सोमवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।
बेंगलुरु आर्मी बेस में ड्यूटी के दौरान बिजली के टूटे हुए तार की चपेट में आने से शनिवार सुबह उनकी दर्दनाक मौत हो गई थी। सोमवार को जब उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर पैतृक गांव पहुंचा तो माहौल गमगीन हो गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण, परिजन और आसपास के लोग अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े।
राजेश यादव की अंतिम यात्रा में देशभक्ति का जज्बा भी देखने को मिला। बड़ी संख्या में लोग हाथों में तिरंगा लेकर अंतिम यात्रा में शामिल हुए। गांव की गलियों से जब तिरंगे में लिपटा जवान का पार्थिव शरीर निकला तो हर तरफ भारत माता के जयकारे और नम आंखों से जवान को श्रद्धांजलि देने का सिलसिला चलता रहा।
दिल्ली से ग्वालियर और फिर गांव पहुंचा पार्थिव शरीर
ड्यूटी के दौरान हादसे में जान गंवाने वाले हवलदार राजेश यादव का पार्थिव शरीर सबसे पहले फ्लाइट के जरिए दिल्ली लाया गया। इसके बाद सेना की व्यवस्था के तहत पार्थिव शरीर को एंबुलेंस से ग्वालियर आर्मी बेस पहुंचाया गया। ग्वालियर से सेना के वाहनों के जरिए पार्थिव शरीर मगरौनी लाया गया।
मगरौनी से सड़खड़पुर गांव तक करीब 10 किलोमीटर की अंतिम यात्रा निकाली गई। इस दौरान रास्ते में बड़ी संख्या में ग्रामीण और क्षेत्र के लोग अंतिम यात्रा में शामिल होते गए। तिरंगे में लिपटे अपने गांव के लाल को विदाई देने के लिए लोग सड़क के दोनों ओर खड़े नजर आए।
सेना के जवानों ने दिया गार्ड ऑफ ऑनर
सड़खड़पुर गांव पहुंचने के बाद राजेश यादव के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। परिजनों और ग्रामीणों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। इसके बाद सेना के जवानों ने पूरे सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर दिया।
राजकीय सम्मान के बीच अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई। इस दौरान माहौल बेहद भावुक हो गया। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल था। अपने पिता को अंतिम विदाई देते हुए उनके बेटे आयुष यादव ने मुखाग्नि दी। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
जिस बेटे को पिता के साथ आगे की जिंदगी के सपने देखने थे, उसी बेटे को इतनी कम उम्र में अपने पिता को मुखाग्नि देनी पड़ी। गांव में मौजूद हर व्यक्ति के लिए यह पल बेहद भावुक कर देने वाला था।
आंधी के बाद टूटकर गिरा था बिजली का तार
परिजनों के मुताबिक, 33 वर्षीय हवलदार राजेश यादव पिछले करीब एक वर्ष से बेंगलुरु आर्मी बेस में पदस्थ थे। शुक्रवार रात बेंगलुरु में तेज आंधी आई थी। इसी दौरान आर्मी एरिया में बिजली का तार टूटकर गिर गया था।
बताया गया कि शनिवार सुबह करीब 4 बजे राजेश यादव ड्यूटी के लिए निकले थे। इसी दौरान वह टूटे हुए बिजली के तार की चपेट में आ गए। करंट लगने से वह मौके पर ही बेहोश होकर गिर पड़े।
हादसे के बाद आसपास मौजूद अन्य जवानों ने उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया और इलाज कराने का प्रयास किया, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। हादसे की खबर सेना के माध्यम से परिजनों तक पहुंची तो परिवार में कोहराम मच गया।
2008 में सेना में भर्ती हुए थे राजेश
हवलदार राजेश यादव वर्ष 2008 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। सेना में करीब 18 वर्षों की सेवा के दौरान उन्होंने अलग-अलग स्थानों पर देश की सेवा की। बेंगलुरु में पदस्थ होने से पहले उन्होंने कश्मीर में भी अपनी सेवाएं दी थीं।
राजेश यादव दो भाइयों में से एक थे। उनके परिवार में पत्नी के अलावा 7 साल की बेटी और 12 साल का बेटा है। दोनों बच्चे अपनी मां और दादा-दादी के साथ गांव में रहते हैं।
परिवार के लिए राजेश केवल सेना के जवान नहीं, बल्कि घर की जिम्मेदारियों को संभालने वाले मजबूत सहारे थे। उनकी अचानक हुई मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।
गांव में पसरा मातम, हर आंख हुई नम
राजेश यादव की मौत की खबर सामने आने के बाद से ही सड़खड़पुर गांव और आसपास के क्षेत्र में शोक का माहौल है। सोमवार को अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में लोग गांव पहुंचे और वीर जवान को श्रद्धांजलि दी।
अंतिम यात्रा में शामिल लोगों के हाथों में तिरंगा था और चेहरों पर गम साफ नजर आ रहा था। एक ओर देश की सेवा करते हुए जान गंवाने वाले जवान के प्रति सम्मान था, तो दूसरी ओर परिवार से हमेशा के लिए बिछड़ने का दर्द।
सड़खड़पुर ने अपने उस बेटे को नम आंखों से विदाई दी, जिसने करीब 18 वर्षों तक वर्दी पहनकर देश की सेवा की। बेंगलुरु में एक हादसे ने परिवार का सहारा छीन लिया, लेकिन गांव के लोगों के लिए राजेश यादव की पहचान हमेशा एक ऐसे जवान के रूप में रहेगी, जिसने अपना जीवन देश की सेवा के नाम किया।