शिवपुरी में एक ही दिन सांप और मगरमच्छ का रेस्क्यू:दोनों ने मचाई दहशत

Nikk Pandit
0
खुशबू शर्मा:खबर शिवपुरी जिले में सोमवार का दिन वन्यजीवों की दस्तक के नाम रहा। जिले के दो अलग-अलग इलाकों में उस समय हड़कंप मच गया, जब कहीं ऑफिस के अंदर अचानक सांप दिखाई दिया तो कहीं रात के अंधेरे में गांव के बीच मगरमच्छ घूमता नजर आया। कोलारस कृषि उपज मंडी के ऑफिस में करीब पांच फीट लंबा सांप घुस गया, जबकि पिछोर थाना क्षेत्र के खुरई गांव में करीब छह फीट लंबा मगरमच्छ आबादी के बीच पहुंच गया।

दोनों घटनाओं ने कुछ देर के लिए लोगों की सांसें थाम दीं। सांप को देखते ही मंडी कर्मचारी ऑफिस से बाहर निकल आए, वहीं खुरई में मगरमच्छ दिखाई देने के बाद ग्रामीणों में भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया। दोनों मामलों में समय रहते रेस्क्यू टीमों को सूचना दी गई। टीमों ने काफी सावधानी से दोनों वन्यजीवों को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और बाद में जंगल में छोड़ दिया।

ऑफिस में अचानक दिखा पांच फीट का सांप

पहली घटना कोलारस कृषि उपज मंडी में सामने आई। सोमवार को मंडी के ऑफिस में कर्मचारी अपने नियमित काम में व्यस्त थे। इसी दौरान अचानक उनकी नजर एक सांप पर पड़ी। ऑफिस के अंदर करीब पांच फीट लंबा सांप देखकर कर्मचारियों के होश उड़ गए।

सांप के दिखाई देते ही कर्मचारियों ने तत्काल ऑफिस से बाहर निकलना ही बेहतर समझा। कुछ ही देर में वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई। किसी ने सांप को पकड़ने या उसके करीब जाने की कोशिश नहीं की और मामले की सूचना सर्प मित्रों को दी गई।

जानकारी मिलने के बाद बदरवास से सर्प मित्रों की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने स्थिति का जायजा लिया और सावधानी के साथ सांप को रेस्क्यू करने की प्रक्रिया शुरू की।

सर्प मित्रों ने सुरक्षित किया रेस्क्यू

ऑफिस के अंदर मौजूद सांप को पकड़ना आसान नहीं था। टीम ने सावधानी बरतते हुए उसे सुरक्षित तरीके से काबू में किया और ऑफिस परिसर से बाहर निकाला।
सांप के पकड़े जाने के बाद मंडी कर्मचारियों और आसपास मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली। इसके बाद सर्प मित्रों की टीम ने सांप को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर जंगल में छोड़ दिया।

इस दौरान लोगों से वन्यजीवों को नुकसान न पहुंचाने और ऐसे मामलों में खुद पकड़ने की कोशिश करने के बजाय प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम या संबंधित विभाग को सूचना देने की अपील भी की गई।

इधर गांव में रात के अंधेरे में घूमता मिला मगरमच्छ
एक तरफ कोलारस मंडी में सांप को लेकर हड़कंप मचा था, तो दूसरी तरफ पिछोर थाना क्षेत्र के खुरई गांव में रात के समय मगरमच्छ दिखाई देने से ग्रामीणों में दहशत फैल गई।

सोमवार रात ग्रामीणों की नजर करीब छह फीट लंबे मगरमच्छ पर पड़ी। गांव के बीच मगरमच्छ को देखकर लोग हैरान रह गए। देखते ही देखते इसकी खबर पूरे इलाके में फैल गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण उसे देखने के लिए जुट गए। मगरमच्छ आबादी वाले क्षेत्र में आगे न बढ़े, इसके लिए कुछ ग्रामीणों ने उसे रस्सी से बांध दिया। इसके बाद वन विभाग को सूचना दी गई।

वन विभाग की टीम ने संभाला मोर्चा

मगरमच्छ मिलने की सूचना के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने स्थिति का जायजा लेने के बाद मगरमच्छ को सुरक्षित तरीके से पकड़ने की कार्रवाई शुरू की।

काफी सावधानी के साथ मगरमच्छ को काबू में लिया गया। इसके बाद उसे आबादी वाले क्षेत्र से दूर ले जाया गया और सुरक्षित रूप से जंगल में छोड़ दिया गया।
मगरमच्छ के रेस्क्यू के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। सबसे बड़ी चिंता इस बात की थी कि यदि मगरमच्छ रात के समय गांव में आगे बढ़ता तो किसी व्यक्ति या पशु के सामने भी खतरा पैदा हो सकता था।

बारिश के मौसम में क्यों बढ़ती है वन्यजीवों की दस्तक?

बारिश के मौसम में जंगल और जलभराव वाले क्षेत्रों में रहने वाले वन्यजीवों के स्थान बदलने की घटनाएं अक्सर देखने को मिलती हैं। पानी भरने या तेज बहाव के कारण सांप और अन्य जीव सुरक्षित स्थान की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच सकते हैं।

इसी तरह जलस्रोतों के आसपास रहने वाले मगरमच्छ भी कभी-कभी पानी के बहाव या भोजन की तलाश में मानव बस्तियों के नजदीक पहुंच जाते हैं। ऐसे मामलों में ग्रामीणों और आम लोगों के लिए सबसे जरूरी सावधानी यही है कि वन्यजीव को घेरने, छेड़ने या खुद पकड़ने का प्रयास न किया जाए।

एक दिन, दो रेस्क्यू और दो बार थमी लोगों की सांसें
सोमवार को शिवपुरी जिले में हुई दोनों घटनाएं भले ही अलग-अलग स्थानों की थीं, लेकिन दोनों में एक बात समान रही—वन्यजीव अचानक इंसानी आबादी के बीच पहुंच गए और लोगों में दहशत फैल गई।

कोलारस में जहां पांच फीट का सांप ऑफिस के अंदर पहुंच गया, वहीं खुरई में छह फीट का मगरमच्छ रात में गांव के बीच घूमता मिला। गनीमत रही कि दोनों मामलों में समय रहते सूचना मिल गई और रेस्क्यू टीमों ने मौके पर पहुंचकर दोनों वन्यजीवों को सुरक्षित पकड़ लिया।

दोनों को जंगल में छोड़े जाने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली। घटनाओं ने यह भी संदेश दिया कि वन्यजीवों के साथ छेड़छाड़ करने के बजाय प्रशिक्षित टीम को सूचना देना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।
Tags

एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)