पोहरी में समाजसेवी की प्रतिमा काले कपड़े से ढकी:जयंती से एक दिन पहले मचा हड़कंप

Nikk Pandit
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खुशबू शर्मा खबर:शिवपुरी जिले के पोहरी शहर में आदर्श सेवा संघ के संस्थापक एवं समाजसेवी स्व. गोपालकृष्ण पौराणिक की प्रतिमा को उनकी जयंती से ठीक एक दिन पहले काले कपड़े से ढक दिए जाने का मामला सामने आया है। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिली। मामले को लेकर वकील एवं जनपद संघ पोहरी के अध्यक्ष अरविंद वर्मा ने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ बीएनएस की धारा 298 और 352 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि प्रतिमा को काले कपड़े से ढकने के पीछे किसका हाथ है और इस घटना को अंजाम देने का उद्देश्य क्या था।

जयंती से ठीक एक दिन पहले सामने आई घटना
बताया गया है कि स्व. गोपालकृष्ण पौराणिक की जयंती शुक्रवार को मनाई जानी है। इससे एक दिन पहले ही उनकी प्रतिमा को अज्ञात लोगों द्वारा काले कपड़े से ढक दिया गया। जब स्थानीय लोगों की नजर इस पर पड़ी तो घटना की जानकारी क्षेत्र में तेजी से फैल गई।

प्रतिमा के साथ हुई इस घटना को लेकर लोगों में आक्रोश देखने को मिला। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्व. गोपालकृष्ण पौराणिक ने सामाजिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया था और लंबे समय तक समाजसेवा से जुड़े रहे। ऐसे में उनकी जयंती से ठीक पहले प्रतिमा के साथ इस तरह की घटना सामने आना गंभीर विषय है।

घटना की जानकारी मिलने के बाद मामले को लेकर पुलिस से शिकायत की गई और जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई।
आदर्श सेवा संघ के संस्थापक थे पौराणिक
शिकायतकर्ता अरविंद वर्मा के मुताबिक, स्व. गोपालकृष्ण पौराणिक पोहरी के जाने-माने समाजसेवी और सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्ति थे। उन्होंने आदर्श सेवा संघ की स्थापना कर सामाजिक गतिविधियों में अपनी भूमिका निभाई थी।

स्थानीय स्तर पर उनके सामाजिक योगदान के चलते लोगों के बीच उनका सम्मान रहा है। यही वजह है कि उनकी जयंती के मौके पर प्रतिमा को काले कपड़े से ढके जाने की घटना ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है।
अरविंद वर्मा ने पुलिस को दी शिकायत में घटना को गंभीर बताते हुए कहा है कि प्रतिमा के साथ हुई इस घटना से समाजसेवी के सम्मान को ठेस पहुंची है। उन्होंने पुलिस से घटना की पूरी जांच कर आरोपियों का पता लगाने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज

शिकायत मिलने के बाद पोहरी पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और घटना से जुड़े तथ्यों को जुटाया जा रहा है।

अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रतिमा को काले कपड़े से ढकने वाले लोग कौन थे और उन्होंने ऐसा क्यों किया। पुलिस घटना के संभावित कारणों और इसमें शामिल लोगों की पहचान के लिए जांच आगे बढ़ा रही है।

यदि घटनास्थल के आसपास सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं तो उनके फुटेज भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकते हैं। इसके अलावा पुलिस स्थानीय लोगों से पूछताछ कर घटना के संबंध में जानकारी जुटा सकती है।

सामाजिक माहौल बिगड़ने की जताई गई आशंका
शिकायत में यह भी आशंका जताई गई है कि घटना की जानकारी अधिक लोगों तक पहुंचने के बाद स्थानीय लोगों और स्व. गोपालकृष्ण पौराणिक के समर्थकों में नाराजगी बढ़ सकती है। शिकायतकर्ता ने पुलिस से मामले में समय रहते कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि किसी तरह का विवाद या सामाजिक तनाव पैदा न हो।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं को लेकर प्रशासन को गंभीरता से जांच करनी चाहिए और यदि किसी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर प्रतिमा को ढका गया है तो उसकी पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

पुलिस जांच के बाद सामने आएगा पूरा सच

फिलहाल पुलिस ने शिकायत के आधार पर अज्ञात लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घटना के पीछे किसी व्यक्तिगत विवाद, शरारत या अन्य कारण की पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही घटना की वास्तविक वजह और जिम्मेदार लोगों के बारे में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

जयंती से ठीक पहले सामने आई इस घटना को लेकर पोहरी में चर्चा का माहौल है। स्थानीय लोगों की मांग है कि पुलिस जल्द से जल्द आरोपियों की पहचान करे और घटना की पूरी सच्चाई सामने लाए।

वहीं, शुक्रवार को स्व. गोपालकृष्ण पौराणिक की जयंती के अवसर पर होने वाले कार्यक्रमों को लेकर भी लोगों की नजर प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई पर बनी हुई है। लोगों का कहना है कि जयंती कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो और प्रतिमा की गरिमा बनी रहे, इसके लिए प्रशासन को आवश्यक सुरक्षा एवं व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी चाहिए।

Shivpuri First के लिए यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एक सम्मानित समाजसेवी की प्रतिमा के साथ जयंती से ठीक पहले हुई इस घटना ने स्थानीय स्तर पर सवाल खड़े किए हैं। अब देखना होगा कि पुलिस की जांच में आरोपियों की पहचान कब तक होती है और घटना के पीछे की वास्तविक वजह क्या सामने आती है।
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