शिवपुरी। शिवपुरी जिला मुख्यालय से करीब 85 किलोमीटर दूर, श्योपुर जिले की सीमा से सटा भिलोडी गांव अपनी भौगोलिक स्थिति के साथ-साथ सामाजिक परंपराओं के लिए भी अलग पहचान रखता है। ग्राम पंचायत भिलोडी में भिलोडी और उमरी गांव शामिल हैं और इसकी आबादी करीब 1,200 बताई जाती है। पोहरी विधानसभा क्षेत्र का यह सीमावर्ती गांव एक ओर कूनो नेशनल पार्क के नजदीक होने के कारण वन्यजीवों की आवाजाही का अनुभव करता है, तो दूसरी ओर यहां वर्षों से चली आ रही सामूहिक विवाह की परंपरा आसपास के करीब 40 गांवों के परिवारों को जोड़ती है।
40 गांवों के रिश्तों का केंद्र बना सामूहिक विवाह
भिलोडी में लंबे समय से सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित किए जाते हैं। आसपास के करीब 40 गांवों से परिवार इस आयोजन में पहुंचते हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्र के युवक-युवतियों के परिवारों को एक-दूसरे से परिचय और वैवाहिक संबंध तय करने का अवसर मिलता है।
गांव के लोगों के मुताबिक, यह आयोजन केवल विवाह तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के गांवों के बीच सामाजिक संपर्क का भी माध्यम बन गया है। इसी परंपरा को सुविधाजनक बनाने के लिए पंचायत स्तर पर विवाह स्थल तक पक्की सड़क और एक पक्का मंच तैयार कराया गया है।
कूनो के नजदीक होने से वन्यजीवों की आवाजाही
भिलोडी की एक अलग पहचान इसकी भौगोलिक स्थिति से भी जुड़ी है। गांव कूनो नेशनल पार्क क्षेत्र की सीमा के नजदीक है। ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में कई बार चीतों की आवाजाही दिखाई देती है और पालतू पशुओं के आसपास वन्यजीवों की मौजूदगी की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं।
इसी वजह से ग्रामीण विशेषकर सुबह के समय मवेशियों को जंगल की ओर ले जाने में सावधानी बरतते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वन्यजीवों की मौजूदगी के बावजूद अब तक गांव में किसी व्यक्ति पर हमले की घटना उनके संज्ञान में नहीं आई है।
मां दुर्गा का मंदिर गांव में विवाद सुलझाने का भी माध्यम
गांव के बीच स्थित मां दुर्गा का मंदिर स्थानीय लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। ग्रामीण बताते हैं कि पारिवारिक या आपसी विवाद होने पर कई बार लोग मंदिर में बैठकर अपनी बात रखते हैं।
ग्रामीणों के अनुसार मंदिर में दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाता है और आपसी सहमति से विवाद सुलझाने की कोशिश की जाती है। इसी वजह से मंदिर धार्मिक स्थल के साथ गांव के सामाजिक जीवन का भी महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
देशसेवा की परंपरा, सेना से रिटायर होकर बने सरपंच
भिलोडी में देशसेवा से जुड़े परिवारों की भी पहचान है। गांव के केशव सिंह यादव करीब 18 वर्ष पहले सेना में भर्ती हुए थे। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद ग्रामीणों ने उन्हें ग्राम पंचायत का सरपंच चुना।
सरपंच के रूप में उन्होंने गांव में सामुदायिक आयोजनों और ग्रामीण सुविधाओं से जुड़े कार्यों पर जोर दिया। उनका कहना है कि सामूहिक विवाह में आसपास के कई गांवों से लोग पहुंचते हैं, इसलिए आयोजन स्थल तक पहुंचने और कार्यक्रम के दौरान सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए पंचायत स्तर पर काम कराया गया।
गांव से निकले अधिकारी भी बने पहचान
भिलोडी से जुड़े परिवारों में प्रशासन और सरकारी सेवाओं में कार्य करने वाले लोग भी हैं। गांव से जुड़ी काव्या, सत्येंद्र सिंह की पुत्री, गुजरात कैडर में आईएएस अधिकारी के रूप में पदस्थ होने की जानकारी दी गई है। वहीं सीताराम यादव वीरपुर में एसडीएम रह चुके हैं और वर्तमान में मुरैना में पदस्थ बताए गए हैं। उनके भाई राम लखन यादव बिजली कंपनी में डीई के पद पर बिलासपुर में कार्यरत हैं।
ग्रामीण इन उपलब्धियों को गांव की नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा के रूप में देखते हैं।
2 किमी सड़क से जुड़ी है अगली उम्मीद
भिलोडी को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली करीब 2 किलोमीटर की एप्रोच रोड फिलहाल ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क के निर्माण का प्रस्ताव स्वीकृत हो चुका है और इसे वर्ष 2027 तक पूरा किए जाने की संभावना है।
सड़क बनने के बाद गांव तक आने-जाने वाले लोगों के साथ सामूहिक विवाह जैसे आयोजनों में पहुंचने वाले परिवारों को भी सुविधा मिलने की उम्मीद है।
26 जनवरी को गांव की प्रतिभाओं का होगा सम्मान
ग्राम पंचायत की ओर से आगामी 26 जनवरी को गांव से जुड़े प्रशासनिक अधिकारियों, सैन्यकर्मियों और विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धि हासिल करने वाली प्रतिभाओं के सम्मान की योजना बनाई गई है। पंचायत का उद्देश्य गांव से निकलकर अलग-अलग क्षेत्रों में पहचान बनाने वाले लोगों को स्थानीय स्तर पर सम्मानित करना और युवाओं को उनसे प्रेरणा दिलाना है।
सीमावर्ती इलाका, वन्यजीवों की मौजूदगी, सामाजिक परंपराएं और देशसेवा से जुड़े परिवार—इन सभी पहलुओं ने भिलोडी को शिवपुरी के दूसरे गांवों से अलग पहचान दी है। अब ग्रामीणों की नजर मुख्य मार्ग से गांव को जोड़ने वाली सड़क और आने वाले विकास कार्यों पर है।

