ग्वालियर-चंबल संभाग के प्रभारी संयुक्त संचालक अमरसत्य गुप्ता से जुड़ा मामला, लोकायुक्त में 54 पन्नों की शिकायत के बाद 4 सदस्यीय कमेटी करेगी जांच
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग में ग्वालियर-चंबल संभाग के प्रभारी संयुक्त संचालक अमरसत्य गुप्ता के निलंबन के बाद जारी किए गए कथित आदेशों और भुगतान को लेकर शिकायत सामने आई है। आरटीआई कार्यकर्ता एवं राष्ट्रीय भ्रष्टाचार उन्मूलन समिति के जिला अध्यक्ष माखन सिंह धाकड़ ने 54 पन्नों के शपथ-पत्र के साथ लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में 57 नगरीय निकायों से जुड़े बिलों, पदोन्नति, समयमान वेतनमान और अन्य आदेशों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इन आरोपों की अब विभागीय जांच होगी।
नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने 29 सितंबर 2026 को आदेश क्रमांक 28713 के जरिए चार सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति को शिकायत में लगाए गए बिंदुओं की तथ्यात्मक जांच कर 15 दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है।
चार सदस्यीय समिति करेगी जांच
जांच समिति के अध्यक्ष उप संचालक देवेंद्र कुमार व्यास होंगे। वित्तीय प्रबंधक अभिषेक रघुवंशी, कार्यपालन यंत्री अभिषेक भदौरिया और सहायक संचालक जबर सिंह कुशवाहा को सदस्य बनाया गया है।
शिकायत में कई नियुक्ति और प्रमोशन पर सवाल
शिकायतकर्ता ने फूप नगर परिषद में एससी आरक्षित पद पर नीतेश भारद्वाज की नियुक्ति, दतिया के मृत कर्मचारी के बेटे अंश ठाकुर को इंदरगढ़ में अनुकंपा नियुक्ति दिए जाने और गोरमी में सेवानिवृत्त उपयंत्री सुरेंद्र श्रीवास्तव को संविदा पर रखने सहित कई मामलों पर आपत्ति जताई है।
सबलगढ़ और चाचौड़ा में आरक्षित पदों पर पदोन्नति, भितरवार नगर पालिका में बिना टेंडर पुराने भवन के डिस्मेंटल और अधिकारियों को एनओसी व समयमान वेतनमान दिए जाने को लेकर भी शिकायत में आरोप लगाए गए हैं।
शिवपुरी विकास प्राधिकरण से जुड़े एक पुराने मामले में राघवेंद्र श्रीवास्तव को तदर्थ लिपिक से नियमित लेखापाल बनाए जाने के प्रस्ताव पर भी सवाल उठाया गया है।
निलंबन के बाद आदेश जारी करने का आरोप
विभाग के अनुसार गुप्ता को 7 सितंबर 2026 को विभागीय जांचों में लापरवाही और समय पर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं करने सहित अन्य मामलों के चलते निलंबित किया गया था। विभागीय आदेश के मुताबिक उनके खिलाफ छह विभागीय जांचों, 15 लोकायुक्त प्रकरणों और हाईकोर्ट की अवमानना याचिकाओं से जुड़े मामलों में कार्रवाई लंबित थी। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय भोपाल निर्धारित किया गया था।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि निलंबन के बाद भी बैकडेट में कुछ आदेश जारी किए गए और विभिन्न निकायों से संबंधित भुगतान हुए। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
7600 पे-ग्रेड का प्रभार देने पर भी सवाल
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि गुप्ता को 16 जून 2026 को 7600 पे-ग्रेड वाले संयुक्त संचालक का प्रभार दिया गया, जबकि उनकी मूल श्रेणी 5400 पे-ग्रेड बताई गई है। शिकायतकर्ता ने इस व्यवस्था को स्थानांतरण नीति के प्रावधानों के विपरीत बताते हुए पूर्व से लंबित वित्तीय जांचों का भी उल्लेख किया है।
अब चार सदस्यीय समिति दस्तावेजों और संबंधित नगरीय निकायों के रिकॉर्ड की जांच करेगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही लगाए गए आरोपों में से कौन से तथ्यात्मक रूप से सही पाए जाते हैं, यह स्पष्ट होगा।

