सीएमएचओ डॉ. संजय ऋषीश्वर की कार्रवाई; करैरा, कोलारस और खनियाधाना के बीएमओ को भी अपने ब्लॉक में संभालना होगा काम, ग्रामीण अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं सुधारने की कोशिश
शिवपुरी। जिले के स्वास्थ्य विभाग में वर्षों से जिला मुख्यालय और अन्य शहरी कार्यालयों में अटैच होकर काम कर रहे डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और कर्मचारियों को अब उनके मूल पदस्थापना स्थल पर लौटाया जा रहा है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. संजय ऋषीश्वर ने अलग-अलग आदेश जारी कर कुल 68 अधिकारियों-कर्मचारियों की अटैचमेंट व्यवस्था समाप्त करने की कार्रवाई की है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों और उप स्वास्थ्य केंद्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना है, ताकि संबंधित पदों पर तैनात कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
जानकारी के अनुसार, 19 से 21 अक्टूबर के बीच कलेक्टर की अनुमति से जारी आदेशों के तहत यह कार्रवाई की गई। इनमें डॉक्टर, नर्सिंग ऑफिसर, फार्मासिस्ट, एएनएम, डाटा एंट्री ऑपरेटर, नेत्र सहायक और बहुउद्देश्यीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता (एमपीडब्ल्यू) सहित विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारी शामिल हैं।
तीन ब्लॉक के बीएमओ को मूल पद पर लौटाया -
कार्रवाई में करैरा, कोलारस और खनियाधाना के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) भी शामिल हैं। करैरा बीएमओ डॉ. प्रदीप शर्मा जिला कार्यालय में डीटीओ और डीएचओ-2 का काम देख रहे थे। कोलारस बीएमओ डॉ. सुनील खंडोलिया डीएचओ-1, डीएचओ-3 और डीएमओ का काम संभाल रहे थे। वहीं, खनियाधाना बीएमओ डॉ. रोहित भदकारिया जिला मुख्यालय पर डीआईओ के पद पर कार्य कर रहे थे।
आदेशों के जरिए तीनों को अपनी मूल पदस्थापना यानी संबंधित ब्लॉक में बीएमओ के रूप में काम संभालने के निर्देश दिए गए हैं। इससे ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और संचालन में उनकी उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है।
संविदा कर्मचारियों को भी मूल स्थान पर भेजा -
19 अक्टूबर को जारी आदेश क्रमांक 16505 के तहत 14 संविदा डॉक्टरों, नर्सिंग ऑफिसर, फार्मासिस्ट, एएनएम और डाटा एंट्री ऑपरेटरों को मूल पदस्थापना स्थल पर लौटाने के निर्देश दिए गए। इनमें बैराड़ और झिरी में पदस्थ डॉक्टरों के अलावा जिला अस्पताल तथा टीबी अस्पताल में अटैच होकर काम कर रहे कर्मचारी भी शामिल हैं।
इसके अलावा आदेश क्रमांक 16503 और 16504 के जरिए नेत्र सहायकों, सहायक ग्रेड-2 के कर्मचारियों और 33 एमपीडब्ल्यू सहित अन्य कर्मचारियों को जिला अस्पताल, विभिन्न कार्यालयों, कलेक्टर कार्यालय और कोल्ड चेन से जुड़े कार्यों से हटाकर उनके मूल उप स्वास्थ्य केंद्रों पर भेजने की कार्रवाई की गई है। नर्सिंग ऑफिसर, एएनएम और डाटा एंट्री ऑपरेटर भी इस कार्रवाई के दायरे में आए हैं।
पिछोर में भी दोहरा प्रभार समाप्त -
विभाग ने दोहरे प्रभार की व्यवस्था पर भी कार्रवाई की है। डॉ. दीपा दुबे और डॉ. ब्रह्मतीर्थ चतुर्वेदी मूल रूप से करैरा में पदस्थ थे, लेकिन पिछोर में सीबीएमओ का प्रभार संभाल रहे थे। इसी तरह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर पदस्थ डॉ. नारायण सिंह कुशवाह और डॉ. महेंद्र सिंह कुशवाह करैरा और नरवर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सीबीएमओ का अतिरिक्त प्रभार देख रहे थे। इन अतिरिक्त प्रभारों को समाप्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
पोहरी में नियमित डॉक्टर को सौंपा प्रभार -
आदेश क्रमांक 16692 के तहत पोहरी में प्रभारी प्रमुख खंड चिकित्सा अधिकारी का प्रभार संविदा चिकित्सक डॉ. द्वारिका प्रसाद वर्मा से लेकर नियमित चिकित्सा अधिकारी डॉ. रजत साहू को सौंपा गया है। यह बदलाव ब्लॉक स्तर पर नियमित अधिकारियों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में उपचार उपलब्ध कराना प्राथमिकता: सीएमएचओ -
सीएमएचओ डॉ. संजय ऋषीश्वर ने कहा कि शासन की मंशा ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनके क्षेत्र में ही उचित उपचार उपलब्ध कराने की है। इसके लिए जरूरी है कि डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य कर्मचारी जहां पदस्थ हैं, वहीं रहकर काम करें। इसी उद्देश्य से अटैचमेंट समाप्त करने की कार्रवाई की गई है।
उन्होंने बताया कि जिले की संपूर्ण स्थिति से भोपाल में वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा। इसके बाद रिक्त पदों और अन्य व्यवस्थागत जरूरतों के संबंध में राज्य स्तर से निर्णय लिया जाएगा।

