सागर शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी जिले के जिला अस्पताल जैसे स्थान पर अत्यावश्यक सेवाओं में प्रबंधन की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। यहां पर बिजली न होने की दशा में जो 11 जनरेटर 24 घंटे बिजली आपूर्ति के लिए लगाए गए है। उनमें से आज की स्थिति में 8 जनरेटर बंद है और महज 3 बड़े जनरेटर है, जिनके सहारे स्वास्थ्य सेवाएं चल रही है। जो तीन बड़े जनरेटर हैं, वह भी बिजली जाने ही अपने आप चालू नहीं होते, उनको चालू करने के लिए किसी कर्मचारी को भेजना पड़ता है। इस दौरान इन जनरेटरी को चालू करने में 5 से 10. मिनिट का समय लग जाता है। ऐसे में उतने समय बिजली बंद हो जाती है। ऐसे में जो गंभीर मरीज मशीनों के सहारे होते हैं, उनकी जान को हमेशा खतरा बना रहता है।
जानकारी के मुताबिक अस्पताल प्रबंधन इन पुराने जनरेटरों को कई महीनों से मरम्मत कराकर जैसे-तैसे काम ले रहा है, लेकिन अब 11 में से 8 ने पूरी तरह से काम करना बंद कर दिया है और शोपीस बनकर जिला अस्पताल परिसर में रखे हुए है। अस्पताल प्रबंधन भी इस संबंध में वरिष्ठ कार्यालय से कई बार पत्राचार कर चुका है, लेकिन अभी तक कोई ठोस जवाब भोपाल स्तर से नहीं मिला है।
इन यूनिटों में 24 घंटे बिजली जरूरी अस्पताल के आईसीयू, इमरजेंसी, ऑपरेशन थिएटर और प्रसूति वार्ड जैसी संवेदनशील यूनिटों में बिजली की निर्बाध आपूर्ति बेहद जरूरी होती है। आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों की जान पूरी तरह मशीनों और बिजली पर निर्भर रहती है। ऐसे में जनरेटर के ठीक से काम न करने पर हमेशा खतरा बना रहता है। वेंटिलेटर, मॉनिटर और अन्य जीवनरक्षक उपकरण बंद होने की आशंका से मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती है। इसके अलावा अस्पताल में जो लिफ्ट है, वह भी बिजली से संचालित होती है और जनरेटर काम करना बंद कर दें तो मरीज या अंटेडर से लेकर अस्पताल का स्टॉफ लिफ्ट में ही फंसा रह सकता है।
16 साल पुराने जनरेटर में यह आ रही परेशानी
दरअसल वर्ष 2010 में खरीदे गए जनरेटर अभी भी जिला अस्पताल परिसर में सेवाएं दे रहे हैं। लगभग 16 साल पुराने इन जनरेटरों में बार-बार खराबी आ रही है। इनके स्टार्ट होने में देरी होती है, कभी यह पर्याप्त लोड नहीं उठा पा रहे हैं। पुराने होने के कारण यह जनरेटर भी डीजल की खपत अधिक कर रहे है। वहीं वोल्टेज में उतार-चढ़ाव बना रहता है। इमरजेंसी के समय इनके अचानक बंद होने का खतरा बना रहता है। इतना ही नहीं पुराने होने के कारण यह जनरेटर जहां धुंआ दे रहे है, वहीं अब तेज आवाज भी करने लगे है। इससे भी मरीजों को दिक्कत आती है।
बजट के फेर में नहीं आ पा रहे नए जनरेटर
सूत्रों की मानें तो जिला अस्पताल में जो पुराने 11 जनरेटर हैं, उनके बदले नए जनरेटर लाने के लिए विभाग वरिष्ठ कार्यालय में प्रस्ताव भेज चुका है। यह जनरेटर करीब एक करोड़ रुपए से अधिक राशि के आने हैं। इसी फेर में प्रस्ताव भेजने के महीनों बाद भी नए जनरेटर के लिए स्वीकृति नहीं आ पाई है। हालांकि अब प्रबंधन का कहना है कि वरिष्ठ कार्यालय से ऐसे संकेत मिले है कि नए जनरेटरों के लिए जल्द ही स्वीकृति मिल सकती है।
यह बोले जिम्मेदार
जिला अस्पताल में लगे 11 जनरेटर अब काफी पुराने हो गए है। इनमें से 8 तो बंद है। हम तीन जनरेटर से ही काम चला रहा हैं। वैसे भी कोई भी मशीन 10 साल के बाद अनुपयोगी हो जाती है। नए जनरेटर के लिए हमने भोपाल में अपने वरिष्ठ कार्यालय को काफी पहले ही प्रस्ताव भेज दिया है। उम्मीद है जल्द वहां से स्वीकृति मिलते ही यह समस्या खत्म हो जाएगी।
डॉ बीएल यादव, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल, शिवपुरी।