सोमवार को इन प्रभावित किसानों ने भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री और कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन सौंपा। वर्तमान में किसानों ने अपनी उपजाऊ जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया को स्पष्ट करने और बाजार दर के आधार पर दोगुना मुआवजा देने की मांग की है, साथ ही प्रशासन को 15 दिन में ठोस निर्णय न लेने पर भोपाल कूच की चेतावनी दी है।
किसानों का आरोप है कि उनकी उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया कानूनी रूप से बिल्कुल स्पष्ट नहीं है, फिर भी प्रशासन द्वारा निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारी की जा रही है। किसानों का कहना है कि प्रभावित लोगों को न तो इस पूरी प्रक्रिया की कोई जानकारी दी गई और न ही अब तक उनकी आपत्तियों का कोई समाधान किया गया है।
अधिग्रहण से खड़ा होगा रोजगार और आर्थिक संकट
प्रभावित किसानों ने प्रशासन को बताया कि खेती ही उनके परिवारों की आजीविका का एकमात्र साधन है। इस भूमि अधिग्रहण से उनके सामने रोजगार और भारी आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि अधिग्रहण से जुड़ी सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जाएं और किसानों की आपत्तियों पर विधिवत सुनवाई के बाद ही आगे की कोई भी कार्रवाई की जाए।
बाजार दर का दोगुना मुआवजा देने की मांग
ज्ञापन में किसानों ने प्रमुख रूप से यह मांग की है कि यदि तालाब के लिए यह भूमि अधिग्रहण आवश्यक है, तो उन्हें वर्तमान बाजार दर के आधार पर दोगुना मुआवजा दिया जाए। इससे वे अपने लिए वैकल्पिक कृषि भूमि खरीद सकेंगे। इसके साथ ही किसानों ने प्रशासन से अधिग्रहण से संबंधित सभी आदेशों और स्वीकृतियों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता रखने की भी मांग की है।
15 दिन में ठोस निर्णय नहीं लिया तो करेंगे पैदल मार्च
भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष बृजेश धाकड़ ने प्रशासन को खुली चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर इस मामले में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो शिवपुरी से सैकड़ों किसान भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास तक पैदल मार्च करेंगे। किसानों ने स्पष्ट किया है कि उनका यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन वे अपने अधिकारों के लिए अपना संघर्ष लगातार जारी रखेंगे।