सागर शर्मा शिवपुरी:शिवपुरी जिले के कोलारस जनपद के पचावला गांव में एक शर्मनाक स्थिति सामने आई, जहां मुक्तिधाम पर अतिक्रमण के कारण एक बुजुर्ग का अंतिम संस्कार घंटों तक नहीं हो सका। मजबूर होकर परिजनों को शव सड़क पर रखकर इंतजार करना पड़ा, जिसके बाद ग्रामीणों की मदद से नदी किनारे अंतिम संस्कार किया गया।
बेटी के घर रह रहे थे बुजुर्ग
जानकारी के अनुसार कोरवास निवासी बुजुर्ग श्यामलाल जाटव का निधन सजाई गांव में हुआ था। उनका कोई बेटा नहीं था और वे अपनी बेटी की ससुराल में रह रहे थे। शुक्रवार शाम उनके दामाद शव को लेकर नदी पार पचावला गांव के मुक्तिधाम पहुंचे थे।
मुक्तिधाम पर रोक, खड़ा हुआ विवाद
जब परिजन मुक्तिधाम पहुंचे तो वहां पास की जमीन पर खेती कर रहे एक ग्रामीण ने अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। उसका कहना था कि पास खड़ी गेहूं की फसल में आग लग सकती है। इस बात को लेकर विवाद की स्थिति बन गई।
मजबूर होकर परिजनों ने शव सड़क पर रख दिया और वहीं बैठ गए। इस दौरान गुस्साए परिजनों ने शव को रास्ते में ही छोड़कर जाने तक की बात कह दी।
नदी किनारे हुआ अंतिम संस्कार
मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने स्थिति संभाली और मुक्तिधाम के पास बह रही नदी किनारे अंतिम संस्कार करने का सुझाव दिया। इसके बाद शव यात्रा खाई के रास्ते से होकर नदी तक पहुंची, जहां बुजुर्ग का अंतिम संस्कार कराया गया।
फसल कटने के बाद हटेगा कब्जा
पचावला पंचायत सचिव ब्रजमोहन जाटव ने बताया कि मुक्तिधाम के आसपास की जमीन पर कुछ लोगों ने कब्जा कर खेती कर रखी है। फसल लगभग तैयार है, इसलिए कटाई के बाद अतिक्रमण हटवाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार को किसने रोका, इसकी जांच की जाएगी।
वहीं सजाई पंचायत सचिव महेश रघुवंशी का कहना है कि सजाई गांव में भी मुक्तिधाम है, इसके बावजूद शव को दूसरे गांव क्यों लाया गया, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।