झंडा उठाकर चले पुरुष, महिलाओं ने बरसाईं लाठियां
परंपरा के अनुसार समाज के एक बुजुर्ग को ‘झंडा’ (देवता) बनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मैदान में गुलाल बिखेरकर की गई, इसके बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना हुई और लोगों को ठंडाई का प्रसाद वितरित किया गया।
पूजा के बाद पुरुष झंडा को अपनी पीठ पर उठाकर आगे बढ़ते हैं, जबकि महिलाएं परंपरा के अनुसार लाठियों से प्रतीकात्मक प्रहार करती हैं। ढोल-नगाड़ों की गूंज और रंगों की बौछार के बीच पूरा माहौल होली के रंग में डूब गया।
नए कपड़े और गहनों में सजी महिलाएं
लट्ठमार होली में समाज की महिलाएं और पुरुष पारंपरिक नए वस्त्र और गहने पहनकर पहुंचे। सभी ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर पर्व की खुशियां बांटी और होली गीतों पर झूमते नजर आए।
सड़क पर उमड़ा उत्सव का रंग
कार्यक्रम आम रास्ते पर होने के कारण आयोजन से पहले कुछ समय के लिए सड़क का आवागमन रोक दिया गया। इसके बाद सड़क पर गुलाल बिखेरकर उत्सव का माहौल बना दिया गया।
ढोल-नगाड़ों की धुन पर महिलाएं लाठियां बरसाती रहीं और पुरुष झंडा लेकर आगे बढ़ते रहे। इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंचे।