दरअसल, शाख्यासागर तालाब (चांदपाठा) में लगातार शहर का प्रदूषित सीवेज पानी छोड़ा जा रहा है। इससे तालाब का पानी जहरीला होता जा रहा है और यहां रहने वाले मगरमच्छ, मछलियां और अन्य जलीय जीवों के साथ-साथ टाइगर सहित वन्यजीवों के लिए भी बड़ा खतरा पैदा हो गया है।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख ने अधिकारियों को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। पत्र में साफ कहा गया है कि कई वर्षों से शिवपुरी शहर का गंदा सीवेज पानी बिना उपचार के तालाब में छोड़ा जा रहा है, जिससे जलकुंभी तेजी से फैल रही है और जलीय पारिस्थितिकी पर बुरा असर पड़ रहा है।
दो साल पहले भी मिला था गंभीर प्रदूषण
वन विभाग के अनुसार जुलाई 2024 में निरीक्षण के दौरान भी तालाब में गंभीर प्रदूषण पाया गया था। इसके बाद नगर पालिका शिवपुरी को प्रदूषण रोकने के निर्देश दिए गए थे।
बताया गया है कि यह स्थिति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 35 (6) और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 का भी उल्लंघन मानी जा सकती है।
बैठकें हुईं, लेकिन कार्रवाई नहीं
पूर्व वन बल प्रमुख वी.एन. अंबाड़े ने अपने रिटायरमेंट से पहले संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर बताया था कि 29 अगस्त 2024 को आयोजित बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी और प्रदूषण रोकने के निर्देश दिए गए थे।
लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। फिलहाल केवल दो मशीनों से जलकुंभी हटाने का काम किया जा रहा है, जिससे समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है।
रामसर साइट होने के बावजूद लापरवाही
वन विभाग ने बताया कि शाख्यासागर तालाब को 2021 में रामसर साइट का दर्जा मिला है। ऐसे में इसका संरक्षण और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि यह तालाब माधव टाइगर रिजर्व के टाइगर, मगरमच्छ, मछलियों और अन्य जलीय जीवों का प्रमुख जलस्रोत है।
वन बल प्रमुख ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रदूषण नहीं रोका गया तो भविष्य में स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है।