सागर शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी जिले से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जिसने कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नरवर वार्ड क्रमांक 3 निवासी रानी कुशवाह (पत्नी गिर्राज कुशवाह) और सुखवती कुशवाह (पत्नी बृजेश कुशवाह) ने पुलिस अधीक्षक को दिए आवेदन में बताया कि 19 अप्रैल 2026 की रात करीब 12 बजे आरोपी हमजन पुत्र धनीराम कुशवाह जबरन उनके घर में घुस आया और महिलाओं के साथ गलत हरकत व छेड़छाड़ करने लगा।
विरोध करने पर स्थिति तुरंत हिंसक हो गई और आरोपी ने घर में मौजूद पुरुषों पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि जब उन्होंने शोर मचाया और अन्य परिजन मौके पर पहुंचे, तब आरोपियों ने अपने और साथियों को बुलाकर हमला और तेज कर दिया। लाठी-डंडों से की गई इस मारपीट में कई लोग घायल हो गए और पूरा परिवार लहूलुहान हो गया।
इतना ही नहीं, आरोप है कि आरोपियों ने UP93CK0021 नंबर की गाड़ी से और लोगों को बुलाया, जिससे यह हमला सुनियोजित प्रतीत होता है। घटना के दौरान किसी ने मोबाइल से वीडियो रिकॉर्डिंग की, लेकिन आरोपियों ने वह मोबाइल छीन लिया और पीड़िता का मंगलसूत्र भी लूट लिया गया।
घटना के बाद गंभीर रूप से घायल लोगों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं हुआ—बल्कि यहीं से पुलिस पर सबसे बड़े आरोप सामने आए। पीड़ितों का कहना है कि जब वे अस्पताल से लौटे, तो उन्हें पता चला कि थाना स्तर पर उनकी शिकायत को कमजोर बनाकर दर्ज किया गया। आवेदन में साफ आरोप है कि छेड़छाड़, लूट और गंभीर हमले जैसे आरोपों को सही तरीके से दर्ज नहीं किया गया, बल्कि केवल मामूली घटना दिखाकर मामला हल्का कर दिया गया।
यही नहीं, पीड़ितों का यह भी कहना है कि एफआईआर में पूरी सच्चाई शामिल नहीं की गई, जिससे आरोपियों को फायदा मिल सकता है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या पुलिस ने जानबूझकर गंभीर धाराओं को नजरअंदाज किया? क्या किसी दबाव या प्रभाव में आकर मामला कमजोर किया गया? और अगर घटना का वीडियो बनाया गया था, तो उसे छीनने की जांच क्यों नहीं की जा रही?
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पीड़ित परिवार दहशत में है और खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। उन्होंने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर सही FIR दर्ज की जाए, आरोपियों पर सख्त कार्रवाई हो और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। अब नजरें प्रशासन पर टिकी हैं—क्या पीड़ितों को न्याय मिलेगा या फिर यह मामला भी कागजों में दबकर रह जाएगा?