12वीं के रिजल्ट ने उजाड़ दिया परिवारपोते ने सप्ली आने पर लगाई फांसी, सदमे में दादी ने भी तोड़ा दम

Nikk Pandit
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सागर शर्मा शिवपुरी:शिवपुरी शहर के छोटे लुहारपुरा क्षेत्र में दो दिनों के भीतर हुई दो मौतों ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है। पहले 12वीं के छात्र ने परीक्षा परिणाम के तनाव में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली, और फिर पोते की मौत का सदमा दादी सहन नहीं कर सकीं। गुरुवार रात इलाज के दौरान उन्हें हार्ट अटैक आया और उन्होंने भी दम तोड़ दिया। एक ही घर से लगातार उठीं दो अर्थियों ने पूरे मोहल्ले को झकझोर कर रख दिया।

जानकारी के अनुसार 18 वर्षीय आर्यभान सिंह सिसौदिया ने इस वर्ष सीबीएसई बोर्ड से 12वीं की परीक्षा दी थी। हाल ही में घोषित हुए रिजल्ट में उसे दो विषयों में सप्लीमेंट्री आई थी। परिजनों का कहना है कि रिजल्ट आने के बाद से वह काफी तनाव में रहने लगा था। बुधवार शाम उसने अपने घर की तीसरी मंजिल पर बने कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया था। सबसे ज्यादा सदमे में उसकी 75 वर्षीय दादी कमला देवी थीं, जो आर्यभान से बेहद लगाव रखती थीं। बताया जा रहा है कि पोते की मौत के बाद से उन्होंने खाना-पीना तक छोड़ दिया था और लगातार उसकी बातें कर रो रही थीं।

गुरुवार को अचानक उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई, जिसके बाद परिजन उन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया, लेकिन इसी दौरान उन्हें हार्ट अटैक आ गया। काफी कोशिशों के बावजूद डॉक्टर उनकी जान नहीं बचा सके। देर रात कमला देवी ने भी दम तोड़ दिया।

छोटे लुहारपुरा क्षेत्र में इस घटना के बाद मातम पसरा हुआ है। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि परिवार बेहद सामान्य और शांत स्वभाव का था। किसी ने सोचा भी नहीं था कि एक परीक्षा परिणाम पूरे घर की खुशियां छीन लेगा। लोग अब सवाल उठा रहे हैं कि आखिर बच्चों पर पढ़ाई और रिजल्ट का दबाव कितना भारी पड़ रहा है?

परिवार के करीबी लोगों का कहना है कि आर्यभान पढ़ाई में सामान्य छात्र था, लेकिन सप्ली आने के बाद वह खुद को टूटता हुआ महसूस कर रहा था। किसी ने यह अंदाजा नहीं लगाया कि वह इतना बड़ा कदम उठा लेगा। अब घर में सिर्फ सन्नाटा बचा है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

यह दर्दनाक घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर रही है कि परीक्षा का रिजल्ट जिंदगी से बड़ा नहीं होता। बच्चों पर बढ़ते मानसिक दबाव और परिवारों की भावनात्मक स्थिति को लेकर समाज को गंभीरता से सोचने की जरूरत है।
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