मंडी में तौल के नाम पर किसानों से कटौती का आरोप“42 किलो तौल, लेकिन भुगतान सिर्फ 40 किलो का”, किसान ने कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार

Nikk Pandit
0
सागर शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी कृषि उपज मंडी में किसानों के साथ तौल के नाम पर कथित गड़बड़ी और अवैध कटौती का मामला सामने आया है। ग्राम पिपरसमां के किसान दीपक धाकड़ ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर मंडी व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए हैं। किसान का कहना है कि मंडी में तौल के दौरान किसानों से ज्यादा माल लिया जा रहा है, लेकिन भुगतान कम वजन का किया जा रहा है। मामले ने अब किसानों के बीच भी नाराजगी बढ़ा दी है।

किसान दीपक धाकड़ के अनुसार मंडी में प्याज और लहसुन की फसल बेचने आने वाले किसानों के माल की वास्तविक तौल 42 किलो तक होती है, लेकिन भुगतान केवल 40 किलो के हिसाब से दिया जाता है। किसान का आरोप है कि यह खेल लंबे समय से चल रहा है और हर ट्रॉली पर किसानों की जेब से हजारों रुपए काटे जा रहे हैं।

दीपक धाकड़ का कहना है कि इन दिनों मंडी में प्रतिदिन करीब दो हजार ट्रॉली प्याज और लहसुन की आवक हो रही है। ऐसे में यदि हर ट्रॉली से 1 हजार से 2 हजार रुपए तक की कटौती की जा रही है, तो किसानों को प्रतिदिन लाखों रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसान का आरोप है कि यह पूरा खेल तौल और भुगतान की प्रक्रिया में गड़बड़ी कर किया जा रहा है।

किसान ने यह भी सवाल उठाया कि आखिर कटौती किए जा रहे इन पैसों का हिसाब कहां जा रहा है? उनका कहना है कि न तो व्यापारियों के पास इसका कोई स्पष्ट रिकॉर्ड है और न ही मंडी प्रशासन के पास कोई जवाब। ऐसे में किसानों को समझ नहीं आ रहा कि उनकी मेहनत की कमाई आखिर किसकी जेब में जा रही है।

कलेक्ट्रेट पहुंचे किसान दीपक धाकड़ ने कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मंडी में तौल प्रक्रिया की निगरानी कराई जाए और दोषी व्यापारियों या कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई हो। साथ ही किसानों को उनके माल का पूरा और सही भुगतान दिलाया जाए।

मंडी में तौल को लेकर उठे इस विवाद के बाद अब अन्य किसान भी खुलकर सामने आने लगे हैं। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते इस तरह की कथित गड़बड़ियों पर रोक नहीं लगी, तो छोटे और मध्यम किसान आर्थिक रूप से बुरी तरह प्रभावित हो जाएंगे। किसानों ने मंडी प्रशासन से पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग की है।

फिलहाल इस मामले को लेकर मंडी प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन किसानों की शिकायत के बाद अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर मंडी में हो रही तौल प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है और किसानों की मेहनत की फसल का पूरा हक उन्हें मिल भी रहा है या नहीं?
Tags

एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)