ठग की तलाश में छत के रास्ते घर में घुसी पुलिसकरेरा में दबिश का CCTV वायरल, पुलिस बोली — “विभाग को बदनाम करने की साजिश”

Nikk Pandit
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सागर शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी जिले के करेरा कस्बे में साइबर ठगी के फरार आरोपी की तलाश में पहुंची पुलिस की कार्रवाई अब चर्चा का बड़ा विषय बन गई है। पिछोर थाना पुलिस का एक सीसीटीवी वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें पुलिसकर्मी सीढ़ी लगाकर मकान की छत के रास्ते अंदर जाने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आते ही इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं, वहीं पुलिस ने इसे विभाग को बदनाम करने की कोशिश बताया है।

शुक्रवार को पिछोर एसडीओपी प्रशांत शर्मा ने पूरे मामले पर सफाई देते हुए बताया कि वायरल वीडियो करेरा क्षेत्र का है। पुलिस साइबर ठगी के एक फरार आरोपी दशरथ लोधी की तलाश में दबिश देने पहुंची थी। पुलिस को सूचना मिली थी कि आरोपी देवेंद्र लोधी के मकान में छिपा हुआ है। इसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और काफी देर तक मकान का गेट खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन अंदर से दरवाजा नहीं खोला गया।

पुलिस के अनुसार जब काफी देर तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तब आम लोगों की मदद से सीढ़ी लगाकर पुलिस मकान की छत तक पहुंची। वीडियो में कुछ पुलिसकर्मी छत के रास्ते अंदर जाने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि पुलिस का दावा है कि कार्रवाई के दौरान किसी के साथ अभद्रता, मारपीट या तोड़फोड़ नहीं की गई। लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही आरोपी वहां से फरार हो चुका था।

इस पूरे घटनाक्रम का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अब पुलिस और मकान मालिक आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। एसडीओपी प्रशांत शर्मा ने आरोप लगाया कि मकान मालिक देवेंद्र लोधी ने जानबूझकर फुटेज वायरल कर पुलिस विभाग की छवि खराब करने का प्रयास किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दबिश पूरी तरह कानून के दायरे में दी गई थी।

दरअसल यह मामला किसी साधारण अपराध का नहीं, बल्कि “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर चल रही साइबर ठगी से जुड़ा बताया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक पिछोर थाना क्षेत्र में सक्रिय एक गिरोह लोगों को फोन कर खुद को पुलिस अधिकारी बताता था और नकली अरेस्ट वारंट दिखाकर लोगों को डराता था। इसके बाद “डिजिटल अरेस्ट” का भय दिखाकर उनसे मोटी रकम ठगी जाती थी।

पुलिस ने इसी मामले में 15 मार्च को कछौआ के जंगल से चंद्रशेखर लोधी, ठाकुर लोधी और भोला लोधी नामक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया कि गिरोह फर्जी मोबाइल सिम, नकली दस्तावेज और फर्जी पुलिस पहचान का इस्तेमाल कर लोगों को अपना शिकार बनाता था। इसी मामले में दशरथ लोधी का नाम भी सामने आया था, जो तब से फरार चल रहा है।

सूत्रों के मुताबिक पुलिस को शक है कि आरोपी को लगातार कहीं न कहीं संरक्षण मिल रहा है। यही वजह है कि पुलिस लगातार उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। चर्चा यह भी है कि जिस मकान में पुलिस दबिश देने पहुंची, उसके मालिक देवेंद्र लोधी की आर्थिक स्थिति कुछ साल पहले तक सामान्य थी, लेकिन कम समय में उसने मकान और अन्य संपत्तियां खड़ी कर लीं। हालांकि इस संबंध में पुलिस ने आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा है।

फिलहाल वायरल वीडियो के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। एक तरफ पुलिस खुद को सही कार्रवाई करने वाला बता रही है, तो दूसरी ओर लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर फरार आरोपी पुलिस की पकड़ से बार-बार कैसे बच रहा है? अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि साइबर ठगी के इस नेटवर्क का अगला खुलासा कब और कैसे होता है।
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