बंटी शर्मा ECG:शिवपुरी मेडिकल कॉलेज के पूर्व डीन डॉ. केवी वर्मा पर लगे गंभीर आरोपों की जांच अब सवालों के घेरे में आ गई है। दिसंबर 2025 में भोपाल संचालनालय चिकित्सा शिक्षा द्वारा चार सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी, लेकिन 6 महीने बीत जाने के बाद भी जांच टीम शिवपुरी नहीं पहुंच सकी। ऐसे में पूरा मामला अब मेडिकल कॉलेज से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक चर्चा का विषय बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार डॉ. वर्मा के खिलाफ अगस्त 2024 में कई शिकायतें स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा आयुक्त कार्यालय तक पहुंची थीं। शिकायतों में वित्तीय अनियमितताओं, प्रशासनिक नियमों के उल्लंघन और पद के दुरुपयोग जैसे आरोप शामिल बताए गए थे। प्रारंभिक जांच के बाद नोटिस जारी हुए और फिर भोपाल से जांच समिति बनाई गई थी।
संचालनालय चिकित्सा शिक्षा द्वारा जारी आदेश में जांच टीम को 15 दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए थे। समिति में अपर संचालक वित्त महक सिंह को अध्यक्ष बनाया गया था, जबकि ग्वालियर मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ डॉक्टरों और अधिकारियों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया था। इसके बावजूद टीम का अब तक शिवपुरी नहीं पहुंचना कई सवाल खड़े कर रहा है।
मेडिकल कॉलेज के वर्तमान डीन डॉ. डीएस परमहंस ने भी स्वीकार किया है कि जांच टीम अब तक कॉलेज नहीं आई। उन्होंने बताया कि इस संबंध में भोपाल संचालनालय को दो से तीन बार पत्राचार किया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
डॉ. वर्मा पर सबसे गंभीर आरोप एक स्टॉफ नर्स को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने को लेकर लगे थे। आरोप था कि लगातार परेशान किए जाने के बाद नर्स ने आत्महत्या का प्रयास किया था। मामला उस समय काफी चर्चाओं में रहा था और कॉलेज प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे थे।
इसके अलावा शिकायतों में यह भी आरोप लगाया गया था कि मेडिकल कॉलेज में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश दिलाया गया। अधिष्ठाता के स्टेनो और वाहन चालक को नियम विरुद्ध तरीके से कोर्स में एडमिशन दिए जाने की बात सामने आई थी, जिस पर भी सवाल उठे थे।
डॉ. वर्मा पर अपनी पत्नी की नियुक्ति को लेकर भी आरोप लगे थे। शिकायतकर्ताओं का कहना था कि नियुक्ति प्रक्रिया में आवश्यक अनुमति और पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया। वहीं गर्ल्स हॉस्टल में पुरुष सहायक वार्डन की नियुक्ति और बिना वैध लाइसेंस चालक से वाहन चलवाने के आरोप भी जांच का हिस्सा बताए गए थे।
अब बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि जब इतने गंभीर आरोपों के बाद जांच समिति बनाई गई थी, तो आखिर छह महीने में जांच शुरू तक क्यों नहीं हो सकी। मेडिकल कॉलेज से जुड़े लोगों का कहना है कि मामले को जानबूझकर लंबित रखा जा रहा है। वहीं अब सभी की नजरें भोपाल संचालनालय पर टिकी हैं कि जांच कब शुरू होगी और आरोपों की सच्चाई आखिर सामने आएगी या नहीं।