खेल का मैदान खोद डाला, श्मशान भी नहीं छोड़ा:खेरपुरा में सरकारी जमीन पर मुरम माफिया का कहर, कलेक्टर से गुहार लगाने पहुंचे ग्रामीण

Nikk Pandit
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सागर शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी जिले के पोहरी विकासखंड के ग्राम खेरपुरा से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां ग्रामीणों ने शासकीय खेल मैदान और शमशान भूमि पर अवैध मुरम उत्खनन किए जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। गांव वालों का कहना है कि सरकारी जमीन को रात-दिन मशीनों से खोदा जा रहा है और प्रशासन अब तक आंखें मूंदे बैठा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के बच्चों के खेलने के लिए जो एकमात्र खेल मैदान था, वह अब बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो चुका है। कभी जहां बच्चे क्रिकेट और कबड्डी खेलते थे, वहां अब जेसीबी के निशान और मौत जैसे गहरे खड्ड दिखाई दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि आखिर बच्चों के भविष्य से यह खिलवाड़ क्यों किया जा रहा है?

ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में बताया कि ग्राम पंचायत खेरपुरा के सर्वे नंबर 472, 473, 474 और 475 की शासकीय भूमि पर लगातार मुरम निकाली जा रही है। आरोप है कि उत्खनन का यह खेल लंबे समय से चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करने की बजाय चुप्पी साधे हुए हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी खुदाई बिना किसी संरक्षण के कैसे चलती रही?

सरपंच पुत्र अमर सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा कि बारिश का मौसम आते ही ये गहरे गड्ढे गांव के बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। उनका कहना है कि अगर इन खड्डों में पानी भर गया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीण पूछ रहे हैं कि क्या प्रशासन किसी मासूम की जान जाने के बाद जागेगा?

मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उत्खनन सिर्फ खेल मैदान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गांव की शमशान भूमि भी इसकी चपेट में आ गई है। जहां लोगों के अंतिम संस्कार होते हैं, वहां भी खुदाई किए जाने की बात सामने आने से गांव में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि “अब क्या गांव में मृतकों को सम्मान से विदाई देने की जगह भी नहीं बचेगी?”

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि राजस्व और खनिज विभाग की संयुक्त टीम बनाकर मौके का सीमांकन कराया जाए और अवैध उत्खनन तुरंत बंद कराया जाए। साथ ही दोषियों पर सख्त कार्रवाई करते हुए यह भी जांच की जाए कि आखिर किसके संरक्षण में सरकारी जमीन का सीना छलनी किया जा रहा है।

अब बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन इस मामले में सिर्फ जांच का आश्वासन देगा, या फिर सच में मुरम माफियाओं पर शिकंजा कसेगा? क्योंकि गांव वालों का गुस्सा साफ बता रहा है कि इस बार मामला सिर्फ मिट्टी का नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य और गांव की अस्मिता का है।
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