जनसुनवाई में फूटा ग्रामीणों का गुस्सा! पानी से लेकर भुगतान घोटाले तक गूंजे सवाल, पंचायत भ्रष्टाचार और फर्जी खातों पर कार्रवाई की मांग

Nikk Pandit
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बंटी शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी जिला मुख्यालय पर मंगलवार को हुई जनसुनवाई इस बार सिर्फ शिकायतों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह ग्रामीणों के आक्रोश का मंच बन गई।

जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से पहुंचे लोगों ने प्रशासन के सामने पानी संकट, पंचायतों में कथित भ्रष्टाचार, थैलासिमिया पीड़ित बच्चों की परेशानी और गेहूं भुगतान में फर्जीवाड़े जैसे गंभीर मुद्दे उठाए। कई शिकायतों में सीधा आरोप लगाया गया कि योजनाओं में पैसा खर्च दिखाया गया, लेकिन जमीन पर व्यवस्था नदारद है।

आदिवासी कॉलोनी में पानी के लिए भटक रहे परिवार, नल-जल योजना बंद होने का आरोप

ग्राम गढ़ीबरोद की आदिवासी कॉलोनी से पहुंचे ग्रामीणों ने जनसुनवाई में बताया कि गांव में वर्षों से नल-जल योजना बंद पड़ी हुई है। हालात ऐसे हैं कि महिलाओं और बच्चों को निजी बोरों से पैसे देकर पानी खरीदना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना था कि जब सरकारी योजनाएं हैं तो फिर गरीब परिवार पानी के लिए जेब क्यों ढीली करें?

ग्रामीणों ने पंचायत सचिव और सरपंच पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बोर और हैंडपंप के नाम पर फर्जी बिलों से राशि निकाली गई, लेकिन धरातल पर पानी की स्थायी व्यवस्था दिखाई नहीं देती। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।

थैलासिमिया बच्चों के इलाज पर संकट, परिजनों ने मांगा ट्रिपल ब्लड फिल्टर

जनसुनवाई में थैलासिमिया पीड़ित बच्चों के परिजन भी पहुंचे। उन्होंने बताया कि जिले में दर्जनों बच्चे नियमित रक्त चढ़ाने पर निर्भर हैं, लेकिन पिछले छह महीनों से ट्रिपल ब्लड फिल्टर नहीं मिलने से बच्चों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

परिजनों का कहना था कि पहले ट्रिपल फिल्टर से बेहतर परिणाम मिलते थे, लेकिन अब साधारण फिल्टर के कारण रिएक्शन की शिकायतें बढ़ रही हैं। उन्होंने प्रशासन से तत्काल व्यवस्था बहाल करने की मांग की।

103 पन्नों की शिकायत… फिर भी कार्रवाई नहीं? खोरघार पंचायत पर उठे सवाल

ग्राम पंचायत खोरघार से पहुंचे ग्रामीण बड़ी संख्या में जनसुनवाई में पहुंचे और पंचायत के कथित वित्तीय मामलों की उच्च स्तरीय जांच की मांग की। ग्रामीणों का दावा था कि वे पहले भी कई बार दस्तावेजों सहित शिकायत दे चुके हैं।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विकास कार्यों, योजनाओं और वित्तीय लेनदेन में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि शिकायतें पहले से लंबित थीं, तो कार्रवाई आखिर क्यों नहीं हुई?

गेहूं बेचा किसान ने… पैसा पहुंच गया फर्जी खाते में! महिला ने खोला बड़ा मामला

जनसुनवाई में उमरीखुर्द निवासी रानी तिवारी ने ऐसा मामला सामने रखा जिसने सभी को चौंका दिया। महिला का आरोप है कि सरकारी उपार्जन केंद्र पर बेचे गए गेहूं की राशि उनके खाते में आने के बजाय उनके नाम से खोले गए कथित फर्जी फिनो पेमेंट बैंक खाते में पहुंच गई।

महिला ने बताया कि उस खाते से यूपीआई के जरिए राशि भी निकाल ली गई। मामला तब सामने आया जब वह दूसरी योजना की राशि की जानकारी लेने पहुंचीं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है — यदि किसी के नाम से फर्जी खाता खुल सकता है और भुगतान उसमें जा सकता है, तो व्यवस्था कितनी सुरक्षित है?

जनसुनवाई बनी सवालों का मंच

इस बार की जनसुनवाई में सिर्फ आवेदन नहीं दिए गए, बल्कि कई गंभीर सवाल भी उठे—

❓ अगर नल-जल योजना बंद थी तो जिम्मेदार कौन?
❓ पंचायतों पर लगे आरोपों की जांच कब होगी?
❓ थैलासिमिया बच्चों के लिए आवश्यक संसाधन क्यों रुके?
❓ गेहूं भुगतान फर्जी खाते तक कैसे पहुंचा?

अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं कि ये शिकायतें भी फाइलों तक सीमित रहेंगी या जमीन पर जांच और कार्रवाई दिखाई देगी।
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