बाल विवाह मुक्त भारत अभियान पर प्रशासन सख्त, जिला से गांव तक तैनात हुए अधिकारी; अब हर स्तर पर होगी निगरानी

Nikk Pandit
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बंटी शर्मा शिवपुरी:शिवपुरी जिले में “बाल विवाह मुक्त भारत अभियान” को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारत सरकार के अभियान के तहत वर्ष 2030 तक देश को बाल विवाह मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। इसी दिशा में अब जिला स्तर से लेकर गांव स्तर तक अधिकारियों की नियुक्ति कर निगरानी व्यवस्था मजबूत की गई है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नियुक्त अधिकारियों को विशेष अधिकार दिए गए हैं, ताकि किसी भी सूचना पर तत्काल कार्रवाई की जा सके। पहले यह जिम्मेदारी सीमित स्तर तक थी, लेकिन अब जवाबदेही का दायरा बढ़ाकर हर प्रशासनिक स्तर को जोड़ा गया है।

जिला से गांव तक तय हुई जिम्मेदारी

जिला स्तर पर कलेक्टर, अपर कलेक्टर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी बनाया गया है। वहीं अनुभाग स्तर पर एसडीएम, तहसील स्तर पर तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

ब्लॉक स्तर पर जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी जिम्मेदारी संभालेंगे। नगरीय क्षेत्रों में मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ), राजस्व निरीक्षक, उप राजस्व निरीक्षक, मुख्य स्वच्छता निरीक्षक एवं स्वच्छता निरीक्षक भी इस अभियान का हिस्सा बनाए गए हैं।

इसके अलावा सेक्टर स्तर पर राजस्व निरीक्षक और महिला एवं बाल विकास विभाग के पर्यवेक्षक, जबकि ग्राम स्तर पर पटवारियों को नियुक्त कर निगरानी तंत्र को और मजबूत किया गया है।

कलेक्टर ने दिए सख्ती और संवेदनशी
लता से काम करने के निर्देश

कलेक्टर अर्पित वर्मा ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में मामलों में कमी आई है, लेकिन अभी भी कई क्षेत्रों में यह सामाजिक कुप्रथा बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि कम उम्र में विवाह होने से बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और मानसिक विकास प्रभावित होता है।

बाल विवाह केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि समाज के भविष्य के साथ अन्याय भी है।

जागरूकता अभियान भी चलेगा

प्रशासन द्वारा स्कूलों, ग्राम पंचायतों, आंगनवाड़ी केंद्रों और सामुदायिक स्तर पर जागरूकता गतिविधियां चलाई जाएंगी। बाल विवाह की सूचना मिलने पर तत्काल हस्तक्षेप और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
प्रशासन का लक्ष्य केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि जनजागरूकता के माध्यम से समाज को इस कुप्रथा से मुक्त करना है।
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