सागर शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी के देहात थाना क्षेत्र में सोमवार को प्रशासन ने शासकीय भूमि पर कब्जा जमाए लोगों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। माधव राव सिंधिया खेल परिसर की पार्किंग के पीछे अमन गार्डन इलाके में जेसीबी की मदद से करीब 30 झोपड़ियों को हटाया गया। इस कार्रवाई के दौरान एक पक्का निर्माण भी तोड़ा गया, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
कार्रवाई तहसीलदार सिद्धार्थ शर्मा और सीएमओ इशांक धाकड़ की मौजूदगी में की गई। अधिकारियों के मुताबिक, इस इलाके में बाहरी लोगों द्वारा धीरे-धीरे झोपड़ियां बनाकर कब्जा किया जा रहा था और देखते ही देखते करीब 30 परिवार यहां बस गए थे। हल्का पटवारी की सूचना के बाद प्रशासन हरकत में आया और मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की गई।
बुलडोजर चलते ही झोपड़ियों में रहने वाले परिवारों में अफरा-तफरी मच गई। लोग अपने सामान को बचाने की कोशिश करते नजर आए। कई परिवारों के सामने अचानक सिर छुपाने का संकट खड़ा हो गया—एक तरफ प्रशासन की कार्रवाई, दूसरी तरफ गरीबों की बेबसी का मंजर साफ दिखाई दिया।
इसी बीच अपनी झोपड़ी टूटने से परेशान सुनीता परिहार ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि अमन गार्डन क्षेत्र में कई प्रभावशाली लोगों के पक्के कब्जे बने हुए हैं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। गरीब मजदूरों की झोपड़ियां ही निशाना बनती हैं—क्या यह कार्रवाई सबके लिए बराबर है या सिर्फ कमजोरों पर?
सुनीता का दर्द यहीं खत्म नहीं होता, उन्होंने कहा कि रोज मेहनत-मजदूरी कर परिवार चलाने वाले लोगों के सामने अब रहने और खाने का संकट खड़ा हो गया है। क्या प्रशासन इन परिवारों के पुनर्वास की भी कोई व्यवस्था करेगा, या उन्हें यूं ही खुले आसमान के नीचे छोड़ दिया जाएगा?
वहीं, तहसीलदार सिद्धार्थ शर्मा ने साफ कहा कि शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई पूरी तरह नियमानुसार की गई है और आगे भी ऐसे कब्जों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
❓ बड़ा सवाल — क्या कानून सबके लिए बराबर है? या फिर कार्रवाई सिर्फ गरीबों तक सीमित रह जाती है? क्या प्रशासन प्रभावशाली लोगों के कब्जों पर भी उतनी ही सख्ती दिखाएगा?