प्रताड़ना से परेशान युवक ने बनाया वीडियो, सुसाइड नोट में लिखे 5 नाम
सागर शर्मा शिवपुरी:खबर जिले के दिनारा थाना क्षेत्र से एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां आईपीएल सट्टे के जाल में फंसे एक युवक ने कथित प्रताड़ना से तंग आकर जहर खाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान संघर्ष उर्फ अमन भार्गव के रूप में हुई है। मामले में पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सभी आरोपी फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, दिनारा निवासी हेमंत भार्गव के बेटे अमन भार्गव ने 3 मई को जहरीला पदार्थ खा लिया था। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे इलाज के लिए झांसी मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, लेकिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। झांसी अस्पताल से सूचना मिलने के बाद दिनारा थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर पूरे मामले की जांच शुरू की।
जांच के दौरान सामने आया कि अमन आईपीएल मैचों में सट्टा खेल रहा था और इसी दौरान वह करीब 5 लाख रुपये हार गया था। इसके बाद सट्टे से जुड़े कुछ लोग लगातार उससे पैसों की मांग कर रहे थे। परिजनों के अनुसार युवक को बार-बार धमकाया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था, जिससे वह काफी तनाव में रहने लगा था।
पुलिस को जांच के दौरान मृतक के आईफोन से एक अहम वीडियो भी मिला है। बताया जा रहा है कि मौत से पहले अमन ने खुद वीडियो रिकॉर्ड कर अपनी पूरी आपबीती बताई थी। वीडियो में उसने सट्टे में पैसे हारने और कुछ लोगों द्वारा लगातार दबाव बनाने की बात कही है। इस वीडियो को पुलिस ने जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना है।
इतना ही नहीं, मौके से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है। सुसाइड नोट में अमन ने उन लोगों के नाम लिखे हैं, जिन पर उसे प्रताड़ित करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने वीडियो, सुसाइड नोट और परिजनों के बयान के आधार पर पांच आरोपियों की पहचान की है।
दिनारा थाना पुलिस ने राहुल राजपूत, शिवम यादव, चंदू यादव, सत्यम शर्मा और झांसी निवासी जीतू के खिलाफ बीएनएस की धारा 108 और 3(5) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपी फरार हैं और उनकी तलाश लगातार की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस हर पहलू से जांच में जुटी हुई है।
यह घटना एक बार फिर सवाल खड़े कर रही है कि आखिर आईपीएल सट्टे का अवैध कारोबार युवाओं को किस दिशा में धकेल रहा है? क्या प्रशासन ऐसे नेटवर्क पर पूरी तरह अंकुश लगा पाएगा? और आखिर कब तक युवा कर्ज और दबाव के कारण अपनी जिंदगी खत्म करने को मजबूर होते रहेंगे?