बंटी शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी जिले की बदरवास तहसील में राजस्व अभिलेखों में कथित हेराफेरी कर किसानों की करीब 200 बीघा भूमि के रिकॉर्ड में बदलाव करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मामले में तहसीलदार की शिकायत पर पुलिस ने तहसील कार्यालय के बाबू वैभव सक्सेना, मांगरौल हल्का के पटवारी श्याम कोरकू तथा खजूरी हल्का की पटवारी कल्पना परिहार के खिलाफ विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, बदरवास तहसीलदार सचिन भार्गव को किसानों द्वारा शिकायतें प्राप्त हुई थीं कि उनकी निजी भूमि का रिकॉर्ड राजस्व अभिलेखों में बदल गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि वेब जीआईएस पोर्टल पर लॉगिन आईडी का उपयोग कर कई किसानों की जमीनों के रिकॉर्ड में संशोधन किया गया। कुछ किसानों की निजी भूमि को सरकारी भूमि के रूप में दर्ज कर दिया गया, जबकि कुछ जमीनों का रिकॉर्ड अन्य व्यक्तियों के नाम पर चढ़ा दिया गया।
खाद बुकिंग के दौरान खुला मामला
बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले का खुलासा उस समय हुआ जब किसान खाद बुकिंग कराने पहुंचे। रिकॉर्ड में अपनी भूमि की स्थिति बदली हुई देखकर किसानों ने आपत्ति दर्ज कराई और इसकी शिकायत राजस्व अधिकारियों से की। शिकायतों के बाद तहसील स्तर पर विस्तृत जांच शुरू की गई।
व्हाट्सएप पर भेजे गए थे आदेश
जांच के दौरान मांगरौल हल्का की तत्कालीन पटवारी पूजा रघुवंशी ने नोटिस के जवाब में बताया कि उन्हें राजस्व रिकॉर्ड में अमल करने के लिए आदेश तहसील कार्यालय के बाबू वैभव सक्सेना द्वारा व्हाट्सएप के माध्यम से भेजे गए थे। उन्होंने अपने जवाब में कहा कि संबंधित आदेशों का मिलान मूल फाइल से भी किया गया था और फाइल में आदेश मौजूद होने के कारण उन्होंने रिकॉर्ड में अमल किया। बाद में फाइल में निरस्तीकरण आदेश लगाए जाने की जानकारी उन्हें नहीं थी।
आईडी के दुरुपयोग का आरोप
वर्तमान पटवारी कल्पना परिहार ने जांच में दावा किया कि उनकी वेब जीआईएस आईडी का उपयोग उन्होंने स्वयं नहीं किया था, बल्कि बाबू वैभव सक्सेना द्वारा किया गया था। जांच अधिकारियों के अनुसार जब बाबू वैभव सक्सेना से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया तो वे संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं कर सके।
जांच रिपोर्ट में सामने आई गंभीर अनियमितताएं
तहसीलदार सचिन भार्गव द्वारा तैयार की गई जांच रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया राजस्व रिकॉर्ड में गंभीर अनियमितताओं तथा लॉगिन आईडी के कथित दुरुपयोग के तथ्य सामने आए। इसके बाद पुलिस को विस्तृत शिकायत भेजी गई, जिसके आधार पर आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
किसानों में आक्रोश
मामले के सामने आने के बाद प्रभावित किसानों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते यह गड़बड़ी पकड़ में नहीं आती तो उनकी पुश्तैनी जमीनें सरकारी रिकॉर्ड में स्थायी रूप से बदल सकती थीं, जिससे उन्हें बड़ा नुकसान उठाना पड़ता।
जांच का दायरा बढ़ा
पुलिस और राजस्व विभाग अब पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं। यह भी पता लगाया जा रहा है कि रिकॉर्ड में किए गए इन बदलावों से किसे लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई और इस कथित हेराफेरी में अन्य लोगों की भूमिका तो नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर आगे और कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल, 200 बीघा भूमि से जुड़े इस कथित घोटाले ने बदरवास तहसील की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और पूरे मामले पर किसानों तथा प्रशासन की नजर बनी हुई है।