3 स्थानों पर दबंगों के कब्जे से भूमि मुक्त, किसानों को दिलाया हक और शासकीय रास्ता कराया अतिक्रमण मुक्त

Nikk Pandit
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बंटी शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी जिले में अवैध कब्जों के खिलाफ प्रशासन का अभियान लगातार जारी है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री अर्पित वर्मा के निर्देश पर पोहरी एसडीएम जेपी गुप्ता के नेतृत्व में राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम ने पोहरी अनुभाग में तीन अलग-अलग स्थानों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए दबंगों के कब्जे से भूमि मुक्त कराई। कार्रवाई के दौरान भूमि स्वामियों को उनकी जमीन का कब्जा दिलाया गया और शासकीय मार्ग से अतिक्रमण हटाकर आमजन के लिए रास्ता बहाल कराया गया।

5 बीघा जमीन पर वर्षों से था अवैध कब्जा, प्रशासन ने दिलाया मालिक को हक

छर्च क्षेत्र के ग्राम गढ़ला में भूमिस्वामी करन जाटव की करीब 5 बीघा जमीन पर कई वर्षों से लालजी सरदार द्वारा अवैध कब्जा किया गया था। एसडीएम जेपी गुप्ता के निर्देश पर राजस्व एवं पुलिस की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर कब्जा हटाया, खेत की जुताई करवाई और जमीन का कब्जा भूमिस्वामी को सौंप दिया।

एसडीएम जेपी गुप्ता ने स्पष्ट कहा कि गरीब, दलित और आदिवासी वर्ग की भूमि पर किसी भी दबंग का अवैध कब्जा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
हाईवे किनारे बेशकीमती शासकीय भूमि भी कराई मुक्त
ग्राम पंचायत उपसिल क्षेत्र में हाईवे किनारे स्थित बेशकीमती शासकीय भूमि पर कुछ लोगों द्वारा आदिवासियों के नाम पर अवैध कब्जा किए जाने की सूचना मिलने पर प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई की। राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर कब्जा हटाया और शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया।

जनसुनवाई की शिकायत पर खुलवाया शासकीय रास्ता
ग्राम नगरा के ग्रामीणों ने 23 जून की जनसुनवाई में शासकीय मार्ग से अतिक्रमण हटाने की मांग की थी। शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए एसडीएम जेपी गुप्ता ने तहसीलदार, आरआई, पटवारी और पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर सर्वे क्रमांक 792 एवं 814 स्थित शासकीय मार्ग से अवैध अतिक्रमण हटवाया।

प्रशासन ने अतिक्रमणकारियों के खिलाफ बाउंड ओवर की कार्रवाई करते हुए भविष्य में दोबारा अतिक्रमण नहीं करने की सख्त चेतावनी भी दी।

प्रशासन का संदेश

जिला प्रशासन ने साफ किया है कि सरकारी भूमि या किसी भी व्यक्ति की निजी भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। गरीब, दलित और आदिवासी वर्ग के भूमि अधिकारों की रक्षा प्रशासन की प्राथमिकता रहेगी
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