बंटी शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी जिले खाद से भरे ट्रक की जब्ती के मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। ट्रक जब्त होने और एफआईआर दर्ज होने के बाद भी पूरे मामले का खुलासा नहीं होने पर कांग्रेस ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को ब्लॉक कांग्रेस कमेटी कोलारस ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच और मुख्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
कांग्रेस का आरोप है कि प्रशासन ने मां कैला देवी वेयरहाउस परिसर से खाद से भरा ट्रक जब्त किया, लेकिन कार्रवाई केवल चालक और हेल्पर तक सीमित रखी गई। जबकि सबसे बड़ा सवाल अब भी अनुत्तरित है कि खाद किसकी थी, किसने मंगवाई थी और वेयरहाउस तक कैसे पहुंची?
"ट्रक पकड़ाने से पहले खपा दी गई काफी खाद"
ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष बलभद्र सिंह धाकड़ ने आरोप लगाया कि ट्रक पकड़े जाने से पहले बड़ी मात्रा में खाद बाजार में खपाई जा चुकी थी। यदि ऐसा हुआ है तो उसकी भी जांच होनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि आखिर वह खाद किन लोगों तक पहुंची।
कांग्रेस ने उठाए कई सवाल
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जांच केवल चालक और हेल्पर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। खाद के वास्तविक मालिक, परिवहन से जुड़े लोगों और वेयरहाउस प्रबंधन की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
❓ आखिर किसके लिए आई थी खाद? ❓ वेयरहाउस तक पहुंचाने वाला कौन था? ❓ क्या खाद की कालाबाजारी का बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था? ❓ यदि खाद खपाई गई तो उसका लाभ किसे मिला?
यही सवाल अब जिले की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं।
7 दिन का अल्टीमेटम, आंदोलन की चेतावनी
कांग्रेस ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर निष्पक्ष जांच कर मुख्य जिम्मेदार लोगों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए और उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो पार्टी आंदोलन का रास्ता अपनाएगी। आवश्यकता पड़ने पर एसडीएम कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन भी किया जाएगा।
किसानों के हितों का मुद्दा बताया
ज्ञापन में कांग्रेस ने कहा कि प्रदेश में किसान पहले से खाद संकट का सामना कर रहे हैं। ऐसे में संदिग्ध परिस्थितियों में खाद का परिवहन और कथित रूप से बाजार में खपाया जाना गंभीर विषय है, जिसकी गहराई से जांच होना जरूरी है।
गौरतलब है कि प्रशासन ने खाद से भरे ट्रक को जब्त कर चालक और हेल्पर के खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था, लेकिन अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि खाद किसके लिए लाई गई थी और इसके पीछे कौन लोग शामिल थे।