बंटी शर्मा शिवपुरी:खबर शिवपुरी जिले के सुरवाया क्षेत्र में मंगलवार रात उस समय हंगामे की स्थिति बन गई जब गुर्जर समाज के दर्जनों ग्रामीण सुरवाया थाने पहुंच गए और धरने पर बैठ गए। ग्रामीणों ने माधव टाइगर रिजर्व प्रबंधन के कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके गांव के एक भैंस के बच्चे (पड़े) को डीसीएम वाहन में भरकर ले जाया गया है और उसे बाघ के शिकार के लिए टाइगर बाड़े में छोड़ा गया है।
ग्रामीणों के अनुसार संग्राम सिंह गुर्जर का लगभग तीन वर्ष का भैंस का बच्चा अचानक लापता हो गया। गांव के एक बुजुर्ग ने कथित रूप से कुछ वनकर्मियों को मवेशी को वाहन में ले जाते हुए देखा था। इसी आधार पर ग्रामीणों को संदेह है कि उनके मवेशी को टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा उठाया गया है। इस घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया और बड़ी संख्या में लोग सुरवाया थाने पहुंचकर कार्रवाई की मांग करने लगे।
ग्रामीणों का कहना है कि अब तक उन्हें लगता था कि जंगल के हिंसक जानवर उनके मवेशियों का शिकार कर रहे हैं, लेकिन इस घटना के बाद उन्हें संदेह होने लगा है कि कहीं मवेशियों के गायब होने के पीछे कोई और वजह तो नहीं है। यही कारण है कि उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने शिकायत के आधार पर अज्ञात लोगों के खिलाफ मवेशी चोरी का प्रकरण दर्ज कर लिया है। थाना प्रभारी अरविंद छारी के अनुसार मामले की जांच शुरू कर दी गई है और सभी पहलुओं की पड़ताल की जाएगी। पुलिस की कार्रवाई के बाद देर रात करीब एक बजे ग्रामीणों ने अपना धरना समाप्त किया।
वहीं दूसरी ओर माधव टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। रेंजर आर.के. दीक्षित का कहना है कि हाल ही में कुछ ग्रामीण टाइगर बाड़े के आसपास प्रतिबंधित क्षेत्र में घूमते पाए गए थे, जिनके खिलाफ वन अपराध का मामला दर्ज किया गया है। उनका आरोप है कि उसी कार्रवाई से बचने और वन विभाग पर दबाव बनाने के लिए झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं।
अब सवाल यह है कि क्या वास्तव में मवेशी चोरी हुआ है या फिर यह वन विभाग और ग्रामीणों के बीच चल रहे विवाद का नया अध्याय है? क्या जांच में सच्चाई सामने आएगी? और क्या ग्रामीणों के आरोपों में दम है या वन विभाग का पक्ष सही साबित होगा? इन सवालों के जवाब अब पुलिस जांच के बाद ही सामने आएंगे।