बंटी शर्मा शिवपुरी। जिले के पिछोर तहसील अंतर्गत वीरा गांव के ग्रामीणों का बिजली विभाग के प्रति गुस्सा रविवार को उस समय खुलकर सामने आ गया, जब उन्होंने खोड़ गांव में आयोजित जनचौपाल के दौरान ऊर्जा मंत्री के सामने ही "बिजली विभाग चोर है" के नारे लगा दिए। अचानक हुई नारेबाजी से कार्यक्रम में मौजूद अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी चौंक गए।
जानकारी के अनुसार खोड़ स्थित धाय महादेव मंदिर परिसर में आयोजित जनचौपाल में ऊर्जा मंत्री ग्रामीणों की समस्याएं सुन रहे थे। इस दौरान कलेक्टर अर्पित वर्मा, शिवपुरी विधायक देवेन्द्र जैन, भाजपा जिला अध्यक्ष जसवंत जाटव सहित कई प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद थे। तभी वीरा गांव से पहुंचे ग्रामीणों ने बिजली विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
ग्रामीणों ने मंत्री को बताया कि उनके गांव में कई बिजली के खंभे टूटे हुए हैं और तार खेतों में पड़े हैं। कई बार शिकायत करने के बावजूद विभागीय अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। ग्रामीणों का कहना था कि बारिश के मौसम में टूटे तार कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं, लेकिन विभाग इस गंभीर समस्या को नजरअंदाज कर रहा है।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि एक दिन पहले आयोजित जनचौपाल में भी यही समस्या अधिकारियों के सामने रखी गई थी। उस समय जल्द समाधान का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे नाराज होकर उन्हें ऊर्जा मंत्री के सामने विरोध दर्ज कराना पड़ा।
वीरा गांव निवासी सुखेन्द्र राय ने आरोप लगाया कि उनके खेत से गुजरने वाली बिजली लाइन का खंभा और तार लंबे समय से टूटा पड़ा है। कई शिकायतों के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली विभाग के कर्मचारियों ने खंभा और तार ठीक कराने के लिए उनसे 3 हजार रुपये की मांग की थी।
सुखेन्द्र राय ने दावा किया कि फरवरी माह में भी तार टूटने पर उसे जुड़वाने के लिए उनके पिता से 1500 रुपये लिए गए थे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बिना पैसे दिए उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता, जिससे लोगों में भारी नाराजगी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए ऊर्जा मंत्री ने मौके पर मौजूद बिजली विभाग के अधिकारियों को फटकार लगाई और ग्रामीणों की समस्या का तत्काल समाधान करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट सीधे उन्हें उपलब्ध कराई जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे। वहीं जनचौपाल में उठे इस मुद्दे के बाद बिजली विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है।