यूसीसी पर जनसंवाद आयोजित:बड़े नीतिगत बदलाव के लिए जनसहयोग जरूरी : डॉ. शोभा पैठणकर

Nikk Pandit
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बंटी शर्मा शिवपुरी:खबर समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर मध्यप्रदेश शासन द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति की सदस्य डॉ. शोभा पैठणकर ने सोमवार को शासकीय श्रीमंत माधवराव सिंधिया स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित जन परामर्श बैठक में नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और प्रबुद्धजनों से संवाद किया। बैठक में यूसीसी के विभिन्न पहलुओं, सामाजिक प्रभावों और नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।

डॉ. पैठणकर ने कहा कि भारत की पहचान "अनेकता में एकता" है और किसी भी बड़े नीतिगत परिवर्तन को सफल बनाने के लिए जनभागीदारी बेहद आवश्यक है। उन्होंने बताया कि समिति प्रदेश के विभिन्न जिलों में जाकर लोगों की राय और सुझाव एकत्रित कर रही है, जिनके आधार पर अंतिम प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।

बैठक में विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि वर्तमान में अलग-अलग समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं, जबकि संविधान समानता का अधिकार प्रदान करता है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए समान नागरिक संहिता पर विचार किया जा रहा है।

डॉ. पैठणकर ने नागरिकों से अपील की कि वे अपने सुझाव शासन के आधिकारिक पोर्टल पर दर्ज कराएं, ताकि आमजन की राय को अंतिम मसौदे में शामिल किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य सभी वर्गों के हितों की रक्षा करते हुए एक समान कानून व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ना है।

बैठक में उपस्थित जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, कानूनविदों और धर्मगुरुओं ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने यूसीसी के संभावित प्रभावों और समाज में इसकी भूमिका पर चर्चा करते हुए रचनात्मक सुझाव प्रस्तुत किए।

बैठक के दौरान विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस के अवसर पर वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों पर भी चर्चा की गई। डॉ. पैठणकर ने कहा कि माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक अधिनियम 2007 के तहत बुजुर्गों का भरण-पोषण करना कानूनी जिम्मेदारी है और यदि किसी बुजुर्ग के साथ उपेक्षा या दुर्व्यवहार होता है तो उन्हें शिकायत करने का पूरा अधिकार है।

कार्यक्रम में नगरपालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा, सीईओ जिला पंचायत विजय राज, सांसद प्रतिनिधि मनीष अग्रवाल, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, शांति समिति सदस्य, शिक्षाविद, कानूनविद, धर्मगुरु एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
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