कलेक्टर के नाम पर फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर ठगी का जाल! CRPF अफसर बताकर बेच रहे सस्ता सामान, साइबर सेल जांच में जुटी

Nikk Pandit
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बंटी शर्मा शिवपुरी:खबर साइबर ठग अब आम लोगों ही नहीं बल्कि वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की पहचान का भी दुरुपयोग करने लगे हैं। शिवपुरी कलेक्टर अर्पित वर्मा के नाम से फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर लोगों को ठगी का शिकार बनाने का मामला सामने आया है। ठग खुद को कलेक्टर का परिचित और सीआरपीएफ अधिकारी बताकर सस्ते दामों पर फर्नीचर व इलेक्ट्रॉनिक सामान बेचने का झांसा दे रहे हैं।

जानकारी के अनुसार जनपद पंचायत शिवपुरी के लालगढ़ निवासी प्रमोद रावत को "अर्पित वर्मा IAS" नाम की फेसबुक आईडी से मैसेंजर पर संदेश प्राप्त हुए। बातचीत के दौरान पहले उनका मोबाइल नंबर मांगा गया, फिर बताया गया कि कलेक्टर का एक मित्र संतोष कुमार, जो सीआरपीएफ कैंप में पदस्थ है, उनसे संपर्क करेगा। इसके बाद एक अन्य नंबर से व्हाट्सएप पर मैसेज भेजे गए।

ठगों ने व्हाट्सएप पर "जय हिंद, जय भारत" लिखकर बातचीत शुरू की और बेड, फ्रिज, लैपटॉप, सोफा सहित कई घरेलू सामानों की तस्वीरें भेजीं। दावा किया गया कि अधिकारी का तबादला हो गया है, इसलिए वह मात्र तीन महीने पुराना सामान बेहद कम कीमत में बेच रहा है। करीब 90 हजार रुपए में पूरा सामान देने का प्रस्ताव रखा गया और सामान पर पांच साल की गारंटी-वारंटी होने की बात भी कही गई।

सूत्रों के अनुसार जिले के कई अन्य लोगों को भी इसी प्रकार के संदेश भेजे गए हैं। आशंका है कि ठग पहले विश्वास जीतने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के नाम का उपयोग करते हैं और बाद में सामान बुकिंग या डिलीवरी के नाम पर अग्रिम राशि मांगकर लोगों को चूना लगाते हैं।

बताया जा रहा है कि कलेक्टर अर्पित वर्मा के नाम से बनाई गई यह फर्जी फेसबुक आईडी हाल ही में बनाई गई है, जिस पर करीब एक हजार लोग जुड़े हुए हैं। वहीं कलेक्टर की वास्तविक प्रोफाइल पर 15 हजार से अधिक फॉलोअर्स हैं। इससे साफ है कि साइबर अपराधी लोगों का विश्वास हासिल करने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों की पहचान का दुरुपयोग कर रहे हैं।

मामले की जानकारी सामने आने के बाद जिला जनसंपर्क अधिकारी प्रियंका शर्मा द्वारा इसकी शिकायत साइबर सेल में दर्ज कराई गई है। साइबर पुलिस फर्जी आईडी संचालित करने वाले आरोपियों की पहचान करने और पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हुई है।

सावधान रहें

प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर किसी भी अधिकारी, कर्मचारी या परिचित के नाम से आने वाले संदेशों पर बिना पुष्टि किए भरोसा न करें। किसी भी प्रकार का ऑनलाइन भुगतान करने से पहले संबंधित व्यक्ति की पहचान की पुष्टि अवश्य करें। संदिग्ध गतिविधि मिलने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन या पुलिस को सूचना दें।
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