बेटी को पूरी किताबें नहीं मिलीं तो पेट्रोल लेकर पानी की टंकी पर चढ़ा पिता:22 दिन की जागरूकता यात्रा की मांग पर अड़ा

Nikk Pandit
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खबर:शिवपुरी जिले के पिछोर में एक युवक द्वारा अपनी बेटी को स्कूल से पूरी किताबें नहीं मिलने के बाद अनोखे तरीके से विरोध जताने का मामला सामने आया है। मनपुरा गांव निवासी दिनेश सगर अपनी 22 दिन की शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सामाजिक परिवर्तन जागरूकता यात्रा की अनुमति नहीं मिलने से नाराज होकर पानी की टंकी पर चढ़ गया। युवक के पास पेट्रोल की बोतल होने की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन और पुलिस में हड़कंप मच गया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार युवक को समझाइश देकर नीचे उतारने का प्रयास करते रहे।

दिनेश सगर का कहना है कि उसकी बेटी मनपुरा गांव के सरकारी स्कूल में कक्षा 6 में पढ़ती है। नए शैक्षणिक सत्र में उसकी बेटी को स्कूल से पूरी किताबें नहीं मिलीं। इसी समस्या को लेकर जब उसने स्कूल स्तर पर व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए तो उसके मन में यह बात आई कि यदि उसकी बेटी को किताबें नहीं मिल पा रही हैं तो गांव और आसपास के दूसरे बच्चों को भी इसी तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

इसी के बाद दिनेश ने गांव-गांव जाकर शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुधार से जुड़े मुद्दों को देखने और लोगों को जागरूक करने के लिए 22 दिन की यात्रा निकालने का निर्णय लिया।

बेटी की किताबों से शुरू हुआ सवाल

दिनेश के मुताबिक, उसकी बेटी कक्षा 6 में पढ़ती है और उसे स्कूल से इस शैक्षणिक सत्र में पूरी किताबें उपलब्ध नहीं हो सकीं। पिता का कहना है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के लिए किताबें पढ़ाई का सबसे जरूरी माध्यम हैं। ऐसे में यदि किसी विद्यार्थी को समय पर पूरी पाठ्य सामग्री नहीं मिलती है तो उसकी पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।

दिनेश का कहना है कि उसने केवल अपनी बेटी की समस्या को लेकर सवाल नहीं उठाया, बल्कि वह यह जानना चाहता है कि क्षेत्र के अन्य सरकारी स्कूलों में भी विद्यार्थियों को किताबें, पढ़ाई और अन्य जरूरी सुविधाएं समय पर मिल रही हैं या नहीं।

स्कूलों के साथ अस्पतालों की व्यवस्था भी देखना चाहता है

दिनेश सगर ने अपनी प्रस्तावित यात्रा में केवल शिक्षा व्यवस्था को ही शामिल नहीं किया था। वह गांव और कस्बों में स्थित स्कूलों, अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और छात्रावासों की व्यवस्थाओं को भी देखना चाहता है।

उसका कहना है कि यात्रा के दौरान वह यह समझना चाहता है कि सरकारी संस्थानों में आम लोगों और विद्यार्थियों को किस तरह की सुविधाएं मिल रही हैं। इसके साथ ही उसने स्कूलों में मध्याह्न भोजन यानी मिड-डे मील की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

दिनेश का दावा है कि वह यात्रा के दौरान किसी प्रकार का असंवैधानिक काम नहीं करना चाहता था। उसका उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता से जुड़े मुद्दों को सामने लाना था।

19 अगस्त को एसडीएम को दिया आवेदन

दिनेश ने अपनी यात्रा शुरू करने की अनुमति के लिए 19 अगस्त को पिछोर एसडीएम को आवेदन दिया था। आवेदन में उसने 20 अगस्त से शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सामाजिक परिवर्तन यात्रा शुरू करने की अनुमति मांगी थी।

आवेदन में उसके द्वारा यह भी उल्लेख किया गया था कि यात्रा के दौरान कोई असंवैधानिक गतिविधि नहीं की जाएगी। उसने प्रशासन से अनुमति देने की मांग करते हुए कहा था कि यदि 20 अगस्त की सुबह 10 बजे तक अनुमति नहीं मिली तो वह आंदोलन करने के लिए मजबूर होगा।

अनुमति को लेकर प्रशासन की ओर से क्या निर्णय लिया गया, इसी बीच युवक ने पानी की टंकी पर चढ़कर विरोध शुरू कर दिया।

पेट्रोल की बोतल लेकर टंकी पर चढ़ा युवक

पिछोर थाना प्रभारी नीतू सिंह अहिरवार के अनुसार, युवक गुरुवार दोपहर करीब 3 बजे पानी की टंकी पर चढ़ा था। पुलिस को जब उसके पास पेट्रोल की बोतल होने की जानकारी मिली तो मौके पर सतर्कता बढ़ाई गई।

थाना प्रभारी के मुताबिक, पुलिस लगातार युवक को समझाने का प्रयास कर रही थी। हालांकि युवक अपनी मांग पर अड़ा हुआ था और नीचे उतरने को तैयार नहीं था। पुलिस के अनुसार, युवक ने टंकी से नीचे नहीं उतरने पर कूदने की धमकी भी दी।

ऐसी स्थिति में पुलिस और प्रशासन के सामने प्राथमिक चुनौती युवक को सुरक्षित नीचे उतारना और किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकना रही।

तहसीलदार बोले—सरकारी संस्थानों के निरीक्षण के लिए नियम जरूरी

पिछोर तहसीलदार शिवशंकर गुर्जर ने बताया कि युवक यात्रा के दौरान अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों, स्कूलों और छात्रावासों में जाकर वहां की व्यवस्थाओं को देखना चाहता है।

तहसीलदार के अनुसार, किसी व्यक्ति को सरकारी संस्थानों में सीधे प्रवेश कर निरीक्षण करने की अनुमति देना प्रशासनिक नियमों के तहत उचित नहीं माना जाता। सरकारी संस्थानों के निरीक्षण और व्यवस्थाओं की जांच के लिए निर्धारित प्रक्रिया और अधिकृत अधिकारियों की व्यवस्था होती है।

यही अनुमति से जुड़ा विषय युवक और प्रशासन के बीच विवाद का कारण बनता दिखाई दे रहा है।

एसडीएम का पक्ष सामने नहीं आया

मामले में पिछोर एसडीएम ममता शाक्य से चर्चा के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। ऐसे में यात्रा की अनुमति को लेकर प्रशासन की ओर से अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।

अब बड़ा सवाल—बेटी की किताबों से उठे मुद्दे का समाधान कब?

इस पूरे मामले ने एक ओर जहां युवक के विरोध के तरीके को लेकर सवाल खड़े किए हैं, वहीं दूसरी ओर सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को समय पर पाठ्य सामग्री मिलने, मिड-डे मील की गुणवत्ता और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति को लेकर भी चर्चा तेज कर दी है।

दिनेश सगर ने अपनी बेटी की किताबों की समस्या से शुरुआत करते हुए व्यापक स्तर पर शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि इन आरोपों और दावों की वास्तविक स्थिति संबंधित विभागों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

फिलहाल प्रशासन के सामने युवक को सुरक्षित तरीके से नीचे उतारना और उसके द्वारा उठाए गए मुद्दों को सुनकर नियमानुसार समाधान की दिशा में कदम उठाना चुनौती बना हुआ है। पूरे मामले में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि बेटी को किताबें नहीं मिलने की शिकायत की विभागीय स्तर पर जांच होती है या नहीं और यदि समस्या सही पाई जाती है तो जिम्मेदारी तय कर उसका समाधान कैसे किया जाता है।

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